Tags

Vande Mataram: अब ‘जन गण मन’ की तरह वंदे मातरम् के लिए भी बनेगा सख्त कानून! अपमान करने पर होगी जेल; जानें सरकार का नया प्लान।

केंद्र सरकार 'वंदे मातरम' को राष्ट्रीय गान जैसा सम्मान देने पर विचार कर रही! उच्च बैठक में प्रोटोकॉल, गायन नियम और अपमान पर सजा पर चर्चा। बीजेपी बोली- कांग्रेस ने कमजोर किया, कांग्रेस ने खारिजा। 2026 तक विशेष आयोजन। क्या बनेगा नया कानून? देशभक्ति की धड़कन मजबूत होगी!

By Pinki Negi

Vande Mataram: अब 'जन गण मन' की तरह वंदे मातरम् के लिए भी बनेगा सख्त कानून! अपमान करने पर होगी जेल; जानें सरकार का नया प्लान।

यह खबर सुनकर दिल थोड़ा गर्व से भर आता है। देश का राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ अब केंद्र सरकार के रडार पर है। हाल ही में उच्च स्तर की एक बैठक हुई, जहां इसे राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ की तरह ही सम्मान देने के लिए सख्त प्रोटोकॉल बनाने पर गंभीर चर्चा हुई। गृह मंत्रालय ने इसे बुलाया था, और कई मंत्रालयों के बड़े अधिकारी इसमें शरीक हुए। सोचिए, आजादी की लड़ाई का वो जोशीला नारा अब कानूनी रूप से मजबूत हो सकता है।

वंदे मातरम की प्रेरणादायक कहानी

‘वंदे मातरम’ कोई साधारण गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की धड़कन था। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1882 में इसे लिखा, जो उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा बना। स्वदेशी आंदोलन में यह नारा बन गया, लोगों के सीने में आग भर दी। संविधान सभा ने इसे राष्ट्रीय गान के बराबर सम्मान दिया, लेकिन अफसोस, इसके गायन या पाठ के लिए कभी कोई साफ नियम बने ही नहीं। न मुद्रा तय हुई, न अवसर निर्धारित। बस, भावनाओं पर छोड़ दिया गया।

बैठक में क्या-क्या हुआ चर्चा?

सूत्र बताते हैं कि बैठक में कई अहम सवाल उठे। कब और कहां ‘वंदे मातरम’ गाया जाए? क्या इसे राष्ट्रीय गान के साथ ही गाया जाए? और सबसे बड़ा, अगर कोई इसका अपमान करे तो सजा का क्या प्रावधान हो? अभी तो ऐसा कुछ नहीं है। सरकार ने 2022 में सुप्रीम कोर्ट को साफ कहा था कि राष्ट्रीय गान के लिए 1971 का कानून है, जो अपमान पर तीन साल की जेल तक देता है।

लेकिन राष्ट्रीय गीत के लिए खाली हाथ। राष्ट्रीय गान के लिए तो अनुच्छेद 51A(a) और गृह मंत्रालय के दिशानिर्देश हैं – खड़े होकर गाना, कोई विकृति नहीं। ‘वंदे मातरम’ को भी वैसा ही ढांचा देने की कोशिश चल रही है।

बीजेपी का जोरदार पक्ष

बीजेपी इसे राष्ट्रीय गीत की गरिमा बचाने का कदम बता रही है। पार्टी कहती है कि कांग्रेस ने तुष्टीकरण की राजनीति से इसका महत्व कम किया। अमित शाह ने संसद में पुराना जख्म कसा – संविधान सभा में गीत के कुछ छंद हटाए गए, क्योंकि वे मातृभूमि को देवी बताते थे, जो सबके लिए स्वीकार्य न थे।

यही सोच देश के बंटवारे का कारण बनी, उनका आरोप। इसी साल से सरकार ‘वंदे मातरम’ के सम्मान में एक साल लंबे कार्यक्रम चला रही है, जो 2026 तक चलेगा। जश्न, गायन, सांस्कृतिक आयोजन – सब कुछ।

कांग्रेस की सधी हुई जवाबी भारी

कांग्रेस इन इल्जामों को सिरे से खारिज कर रही। उनका कहना है कि बीजेपी इतिहास को तोड़-मरोड़ रही, इसे वोट बैंक के लिए हथियार बना रही। संविधान सभा का फैसला सबकी भावनाओं का सम्मान था, न कि अपमान। वैसे भी, ‘वंदे मातरम’ हमेशा से गाया जाता रहा, राजनीति इसमें घुसेड़ने की क्या जरूरत? अगर नया कानून बना, तो यह बहस और तेज हो जाएगी।

आगे क्या हो सकता है असर?

अभी गृह मंत्रालय चुप है, कोई आधिकारिक बयान नहीं। लेकिन अगर प्रोटोकॉल बन गया – जैसे स्कूलों, सरकारी आयोजनों में अनिवार्य गायन, अपमान पर सजा – तो यह बड़ा बदलाव होगा। सांस्कृतिक रूप से गीत मजबूत होगा, राजनीतिक रूप से बहस छिड़ेगी। कानूनी तौर पर राष्ट्रीय गान के बराबर सुरक्षा मिलेगी। सोचिए, बच्चे स्कूल में खड़े होकर गाएंगे, दिल में देशभक्ति जागेगी। लेकिन सवाल वही – क्या यह सभी के लिए एक जैसा लगेगा? या फिर नई विवादों की आग लगेगी?

कुल मिलाकर, ‘वंदे मातरम’ का ये नया अध्याय देश की एकता और सम्मान की याद दिलाता है। उम्मीद है, इससे हमारी साझा विरासत और मजबूत बनेगी।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

अभी-अभी मोदी का ऐलान

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें