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फोन के राइट साइड में ही क्यों होता है पावर बटन? इसके पीछे छिपी है बड़ी वजह, क्या आप जानते हैं?

स्मार्टफोन का पावर बटन हमेशा दाहिनी ओर क्यों होता है? यह सिर्फ डिजाइन नहीं, बल्कि 90% आबादी के दाएं हाथ से काम करने, एर्गोनॉमिक्स, हार्डवेयर लेआउट और इंडस्ट्री स्टैंडर्ड का नतीजा है। जानिए इस छोटे बटन के पीछे छिपी बड़ी विज्ञान और सुविधा की कहानी।

By Pinki Negi

फोन के राइट साइड में ही क्यों होता है पावर बटन? इसके पीछे छिपी है बड़ी वजह, क्या आप जानते हैं?

फोन तो आप लोग सालों से चला रहे होंगे, लेकिन क्या कभी गौर किया है कि हर कंपनी के स्मार्टफोन में पावर बटन आखिर राइट साइड में ही क्यों होता है? चाहे वो ऐपल का आईफोन हो, सैमसंग का गैलेक्सी सीरीज का मॉडल, या फिर वनप्लस, रियलमी, शाओमी जैसे ब्रांड्स- आजकल लगभग सभी फोन्स में पावर बटन दाहिनी तरफ ही मिलता है। लेकिन क्या आपको पता है इसके पीछे की असली वजह क्या है? यह सिर्फ डिजाइन का मामला नहीं, बल्कि विज्ञान, एर्गोनॉमिक्स और यूजर एक्सपीरियंस का गहरा खेल है।

शुरुआत में नहीं थी फिक्स जगह

शुरुआती दिनों में स्मार्टफोन में पावर बटन की कोई फिक्स जगह नहीं थी। कुछ कंपनियां इसे फोन के ऊपरी हिस्से में लगाती थीं, तो कुछ पीछे के पैनल पर। मसलन, iPhone 5s में पावर बटन टॉप एज पर होता था, जबकि iPhone 6 से ऐपल ने इसे राइट साइड में शिफ्ट कर दिया। वहीं, LG G3 जैसे फोन्स में पावर बटन रियर पैनल पर, कैमरा मॉड्यूल के नीचे दिया जाता था। लेकिन धीरे-धीरे इंडस्ट्री ने एक स्टैंडर्ड अपना लिया- और वो है राइट साइड।

ये है असली वजह

विश्व स्वास्थ्य संगठन और विभिन्न शोधों के मुताबिक, दुनिया की लगभग 90% आबादी दाएं हाथ (right-handed) से काम करती है। जब कोई यूजर फोन को अपने बाएं हाथ में पकड़ता है- जो कि ज्यादातर लोगों की नैचुरल ग्रिप है- तो उसका दायां अंगूठा स्वाभाविक रूप से फोन के दाहिने किनारे के ऊपरी हिस्से पर पहुंच जाता है। ऐसे में पावर बटन वहीं होने से यूजर को बिना फोन की पकड़ ढीले किए, बिना हाथ बदले, सिर्फ एक अंगूठे के दबाव से फोन को लॉक, अनलॉक, ऑन या ऑफ करना आसान हो जाता है।

यही वजह है कि कंपनियां एक्सेसिबिलिटी और यूजर कम्फर्ट को ध्यान में रखते हुए पावर बटन को राइट साइड में फिक्स कर रही हैं। यह छोटा सा डिजाइन बदलाव यूजर एक्सपीरियंस को बड़े स्तर पर बेहतर बना देता है।

हार्डवेयर डिजाइन भी है जिम्मेदार

केवल एर्गोनॉमिक्स ही नहीं, हार्डवेयर इंजीनियरिंग भी इसमें अहम भूमिका निभाती है। स्मार्टफोन के अंदर बैटरी आमतौर पर बीच में होती है, जो फोन के 60-70% हिस्से पर कब्जा कर लेती है। वहीं, मदरबोर्ड, प्रोसेसर और अन्य सर्किट्री अक्सर दाहिनी तरफ व्यवस्थित की जाती है। ऐसे में पावर बटन को राइट साइड में रखने से उसके फ्लेक्स केबल को मदरबोर्ड से जोड़ना आसान और किफायती हो जाता है। इससे मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट कम होती है और डिजाइन भी कॉम्पैक्ट रहता है।

इंडस्ट्री स्टैंडर्ड बन चुका है राइट साइड

एक बार जब बड़ी कंपनियों ने इस डिजाइन को अपनाया, तो यह धीरे-धीरे इंडस्ट्री स्टैंडर्ड बन गया। अब यूजर को किसी नए फोन को पकड़ते ही यह नहीं सोचना पड़ता कि पावर बटन कहां होगा- वह तुरंत दाहिनी तरफ टटोल लेता है। इससे यूजर एक्सपीरियंस सहज और बिना कन्फ्यूजन वाला बन जाता है।

आजकल तो कई फोन्स में पावर बटन में ही फिंगरप्रिंट सेंसर भी एम्बेड किया जाता है। दाहिनी तरफ होने की वजह से अंगूठा रखते ही फोन अनलॉक हो जाता है, जो समय बचाता है और सुरक्षा भी बढ़ाता है। हालांकि, कुछ अपवाद अभी भी मौजूद हैं। कुछ सोनी मॉडल्स या पुराने डिजाइन्स में पावर बटन टॉप या लेफ्ट साइड में भी देखने को मिलता है, लेकिन ये अब बहुत कम हैं।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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