
भारत में ट्रेनों का लेट होना एक आम समस्या है, जो यात्रियों की योजनाओं को पटरी से उतार देती है। खराब मौसम, तकनीकी खराबी या सिग्नल फेलियर जैसी वजहों से ट्रेनें कई-कई घंटे लेट हो जाती हैं। लेकिन अच्छी खबर यह है कि अगर आपकी ट्रेन निर्धारित समय से तीन घंटे या उससे अधिक लेट हो, तो आप बिना टिकट कैंसिल किए पूरा पैसा वापस पा सकते हैं। भारतीय रेलवे का यह TDR (टिकट डिपॉजिट रसीद) नियम यात्रियों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जो असुविधा की भरपाई करता है ।
रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, प्रतिदिन करोड़ों यात्री ट्रेनों से सफर करते हैं, लेकिन देरी की घटनाएं 20-30% तक होती हैं। ऐसे में कई यात्री जल्दबाजी में टिकट कैंसिल कर देते हैं, जिससे कैंसलेशन चार्ज कट जाता है। लेकिन TDR फाइल करने से ऐसा कोई नुकसान नहीं होता। कन्फर्म्ड, RAC, वेटिंग या टाटकल टिकट सभी पर यह लागू है, बशर्ते आपने यात्रा शुरू न की हो। ट्रेन के ओरिजिनेटिंग या बोर्डिंग स्टेशन पर तीन घंटे की देरी साबित होने पर पूरा किराया लौटाया जाता है ।
TDR फाइल करने का आसान तरीका
IRCTC वेबसाइट या ऐप पर लॉगिन करें और ‘My Bookings’ में जाएं। प्रभावित टिकट चुनकर ‘File TDR’ विकल्प पर क्लिक करें। कारण में “ट्रेन 3 घंटे से अधिक लेट” चुनें, ट्रेन की वास्तविक स्थिति (NTES से चेक करें) दर्ज करें और सबमिट करें। चार्ट तैयार होने से पहले फाइल करना सबसे अच्छा, लेकिन उसके बाद भी संभव है। रिफंड 3-7 दिनों में बैंक अकाउंट, UPI या कार्ड में आ जाता है। स्टेटस ‘Check TDR Status’ से ट्रैक करें ।
ऑफलाइन टिकट धारकों के लिए स्टेशन मास्टर या रिजर्वेशन काउंटर पर सरेंडर करें। रेलवे बोर्ड के नियमों के अनुसार, यात्रा न करने पर कोई कैंसलेशन फीस नहीं ।
कौन से टिकट योग्य?
| टिकट प्रकार | रिफंड योग्यता | शर्तें |
|---|---|---|
| कन्फर्म्ड | पूरा रिफंड | ट्रेन प्रस्थान से पहले TDR |
| RAC | पूरा रिफंड | देरी 3+ घंटे, यात्रा न शुरू |
| वेटिंग | पूरा रिफंड | TDR समय पर फाइल |
| टाटकल | पूरा रिफंड | स्टेशन पर देरी साबित |
सावधानियां और अपडेट्स
टिकट कैंसिल न करें, वरना चार्ज कटेगा। ट्रेन चलने के बाद TDR अमान्य। 2026 में नए नियमों से प्रीमियम ट्रेनों (वंदे भारत) में रिफंड प्रक्रिया और सख्त हुई है, लेकिन देरी नियम वही । यात्रियों को NTES ऐप से ट्रेन स्टेटस चेक करने की सलाह दी जाती है। हाल के केस में, दिल्ली-मुंबई राजधानी 5 घंटे लेट होने पर सैकड़ों यात्रियों ने TDR फाइल कर रिफंड पाया। रेलवे मंत्रालय ने 2025-26 में TDR प्रोसेस को डिजिटल बनाकर तेज किया है। यह नियम यात्रियों को सशक्त बनाता है, लेकिन जागरूकता की कमी से लाखों रुपये बर्बाद हो जाते हैं।









