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भारत का वो इकलौता राज्य, जहाँ से आप ‘पैदल’ जा सकते हैं 3 अलग देशों में! क्या आपको पता है इसका नाम?

क्या आप जानते हैं भारत में एक ऐसा जादुई स्थान है जहाँ की सरजमीं से आप पैदल ही तीन अलग-अलग देशों की सीमाएँ छू सकते हैं? दुनिया का पहला ऑर्गेनिक राज्य और कंचनजंगा की गोद में बसा यह राज्य अपनी भौगोलिक स्थिति से सबको हैरान कर देता है। आइए जानते हैं इस अनोखे 'भारत के ताज' के बारे में।

By Pinki Negi

भारत का वो इकलौता राज्य, जहाँ से आप 'पैदल' जा सकते हैं 3 अलग देशों में! क्या आपको पता है इसका नाम?
Sikkim International Borders

भारत का सिक्किम राज्य अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण पूरी दुनिया में मशहूर है। यह देश का इकलौता ऐसा राज्य है जिसकी सीमाएं तीन अलग-अलग देशों— नेपाल, भूटान और चीन (तिब्बत) से लगती हैं। सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होने और अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के कारण इसे ‘भारत का ताज’ भी कहा जाता है। अगर आप सिक्किम के सीमावर्ती इलाकों में खड़े हों, तो आप पैदल ही इन तीन विदेशी सीमाओं की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। अपनी इन्ही अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और पहाड़ों की खूबसूरती की वजह से यह राज्य न केवल पर्यटन बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी भारत का सबसे खास हिस्सा माना जाता है।

कंचनजंगा की गोद और बौद्ध संस्कृति का संगम

हिमालय की वादियों में बसा सिक्किम सिर्फ अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अतुलनीय विरासत के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ से दुनिया की तीसरी सबसे ऊँची चोटी, माउंट कंचनजंगा, का भव्य नजारा दिखाई देता है। यह राज्य अपनी अद्भुत जैव विविधता (Biodiversity) और रुमटेक जैसे प्राचीन बौद्ध मठों के लिए जाना जाता है, जो इसकी समृद्ध सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाते हैं। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण में मिसाल पेश करते हुए सिक्किम ने दुनिया का पहला 100% ऑर्गेनिक राज्य होने का गौरव भी हासिल किया है।

सिक्किम के इस बॉर्डर से आप पैदल ही पार कर सकते हैं 3 देशों की सीमा

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि भारत में एक ऐसी जगह भी है जहाँ से आप बिना किसी गाड़ी या लंबी यात्रा के, सिर्फ पैदल चलकर तीन अलग-अलग देशों की सीमा तक पहुँच सकते हैं? जी हाँ, सिक्किम की भौगोलिक स्थिति इतनी अद्भुत है कि यहाँ के कुछ पॉइंट से आप नेपाल, भूटान और चीन की सरहदों को केवल अपने कदमों से नाप सकते हैं। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि एक ठोस भौगोलिक तथ्य (Fact) है, जो सिक्किम को सामरिक और रोमांच के लिहाज से भारत का सबसे अनोखा राज्य बनाता है।

गोवा के बाद भारत का दूसरा सबसे छोटा राज्य

क्षेत्रफल की दृष्टि से सिक्किम भारत का दूसरा सबसे छोटा राज्य है। हालांकि यह आकार में छोटा है, लेकिन इसका महत्व बहुत बड़ा है। अक्सर लोग देश के सबसे छोटे राज्य के रूप में सिर्फ गोवा को जानते हैं, लेकिन गोवा के ठीक बाद सिक्किम का ही नंबर आता है। अपनी छोटी सी भौगोलिक सीमा के बावजूद, यह राज्य तीन अंतरराष्ट्रीय सीमाओं (नेपाल, भूटान और चीन) को अपने आंचल में समेटे हुए है, जो इसे क्षेत्रफल के लिहाज से छोटा होने के बाद भी सामरिक और प्राकृतिक रूप से बेहद विशाल बनाता है।

हिमालय की गोद में बसा सिक्किम

सिक्किम उत्तर-पूर्वी भारत का एक ऐसा रत्न है जिसकी भौगोलिक स्थिति इसे बेहद खास बनाती है। हिमालयी क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण यहाँ का परिदृश्य (Landscape) और प्राकृतिक बनावट अत्यंत लुभावनी है। यह राज्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का एक मुख्य केंद्र है: इसके पश्चिम में नेपाल, उत्तर में तिब्बत (चीन) और पूर्व में भूटान स्थित है। इन तीन अलग-अलग देशों से घिरे होने के कारण सिक्किम न केवल सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहाँ की संस्कृति और प्रकृति पर भी इन विविध सीमाओं का अनोखा प्रभाव देखने को मिलता है।

सिक्किम की पहचान: गंगटोक, क्षेत्रफल और यहाँ की विविध भाषाएँ

सिक्किम भारत का एक ऐसा सुंदर राज्य है जिसकी राजधानी गंगटोक अपनी स्वच्छता और पहाड़ों के नजारों के लिए जानी जाती है। मात्र 7,096 वर्ग किमी के क्षेत्रफल के साथ यह राज्य भले ही छोटा हो, लेकिन सांस्कृतिक रूप से बहुत धनी है। यहाँ की भाषाई विविधता इसकी सबसे बड़ी खूबी है; यहाँ मुख्य रूप से अंग्रेजी, नेपाली, भूटिया और लेप्चा भाषाएँ बोली जाती हैं। यह संगम न केवल यहाँ के लोगों को आपस में जोड़ता है, बल्कि दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों के लिए भी इसे एक सुलभ और आकर्षक स्थान बनाता है।

ग्लेशियरों और बौद्ध मठों की पावन धरती है सिक्किम

सिक्किम की असली पहचान यहाँ स्थित भारत का सबसे ऊँचा पर्वत ‘माउंट कंचनजंगा’ है, जिसकी विशाल चोटी 8,586 मीटर की ऊँचाई पर बादलों को छूती है। यह राज्य प्राकृतिक अजूबों का खजाना है, जहाँ ऊँचे ग्लेशियर, अल्पाइन घास के मैदान और हज़ारों प्रकार के रंग-बिरंगे जंगली फूल इसके सौंदर्य में चार चाँद लगा देते हैं। यहाँ की खड़ी पगडंडियाँ सैलानियों को पहाड़ों की चोटियों पर बने शांत और प्राचीन बौद्ध मठों तक ले जाती हैं, जहाँ पहुँचकर रूहानी सुकून का अहसास होता है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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