
अक्सर लोग सोचते हैं कि बचत खाते (Saving Account) में जमा राशि पर टैक्स लगता है, लेकिन असल में टैक्स आपकी जमा पूंजी पर नहीं बल्कि उस पर मिलने वाले ब्याज पर लगता है। टैक्स विभाग इस ब्याज को आपकी सालाना कमाई का हिस्सा मानता है।
साल 2026 में आरबीआई (RBI) ने निगरानी के नियम और सख्त कर दिए हैं, जिससे अब इनकम टैक्स विभाग आपके बैंक लेनदेन और ब्याज से होने वाली आय पर अधिक बारीकी से नज़र रख सकता है। इसलिए अपनी ब्याज आय की जानकारी सही समय पर देना ज़रूरी है।
बचत खाते के ब्याज पर टैक्स नियम और छूट की सीमा
बैंक बचत खाते से मिलने वाले ब्याज को इनकम टैक्स की भाषा में “अन्य स्रोतों से आय” माना जाता है। हालांकि इस पर टैक्स लगता है, लेकिन सरकार धारा 80TTA के तहत एक बड़ी राहत भी देती है। इस नियम के अनुसार, एक वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) के दौरान अगर आपको ₹10,000 तक का ब्याज मिलता है, तो उस पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा। यह छूट आम नागरिकों और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) दोनों के लिए उपलब्ध है, जिससे छोटी बचत करने वालों को सीधा लाभ मिलता है।
₹10,000 से अधिक ब्याज पर टैक्स और TDS के नियम
यदि एक साल में आपके बचत खाते का ब्याज ₹10,000 की सीमा को पार कर जाता है, तो अतिरिक्त राशि पर आपको अपने टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा। बैंक इस पर TDS (टैक्स कटौती) तभी काटते हैं जब पूरे साल का कुल ब्याज ₹40,000 से ज्यादा हो। अगर आपका PAN कार्ड बैंक में जमा है, तो बैंक 10% की दर से TDS काटता है। यदि कुल आय टैक्स के दायरे में नहीं आती है, तो आप TDS बचाने के लिए बैंक में फॉर्म 15G या 15H जमा कर सकते हैं।
न्यूनतम बैलेंस पर जुर्माने के लिए RBI के नए नियम
साल 2026 में आरबीआई (RBI) ने बैंक ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए जुर्माने के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। अब बैंक अपनी मर्जी से मनमाना जुर्माना नहीं वसूल सकेंगे; जुर्माने की राशि बैंक द्वारा दी जाने वाली सेवाओं के अनुपात में ही तय की जाएगी। इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि यदि आपके खाते में न्यूनतम बैलेंस (Minimum Balance) कम होता है, तो बैंक के लिए आपको SMS या अलर्ट के जरिए पहले से जानकारी देना अनिवार्य है। इससे ग्राहकों को अपना बैलेंस सुधारने का मौका मिलेगा और वे अनचाहे खर्चों से बच सकेंगे।









