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UP Police Knowledge: यूपी पुलिस में मुंशी और दीवान जी की क्या होती है भूमिका? हेड कांस्टेबल से अंतर जानें

यूपी पुलिस में 'मुंशी' और 'दीवान जी' जैसे शब्द अक्सर सुनाई देते हैं, लेकिन क्या आप इनका असली मतलब जानते हैं? क्या ये कोई अलग रैंक हैं या सिर्फ जिम्मेदारी? कांस्टेबल भर्ती के बीच जानें इन महत्वपूर्ण पदों के पीछे की दिलचस्प सच्चाई और हेड कांस्टेबल से इनका खास कनेक्शन।

By Pinki Negi

UP Police Knowledge: यूपी पुलिस में मुंशी और दीवान जी की क्या होती है भूमिका? हेड कांस्टेबल से अंतर जानें
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उत्तर प्रदेश में 32,000 कांस्टेबल पदों पर भर्ती की हलचल के बीच युवाओं में पुलिस महकमे की रैंक और प्रमोशन को लेकर काफी उत्सुकता है। अक्सर थानों में ‘दीवान जी’ या ‘मुंशी जी’ जैसे शब्द सुनने को मिलते हैं, जो पुलिस की आधिकारिक रैंक लिस्ट में तो नहीं होते, लेकिन थाने के कामकाज के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं।

दरअसल, जब एक कांस्टेबल 8 से 10 साल की कड़ी मेहनत और अनुभव के बाद अपना पहला प्रमोशन पाता है, तो वह ‘हेड कांस्टेबल’ बनता है, जिसे बोलचाल की भाषा में ‘दीवान जी’ कहा जाता है। वहीं, थाने के कागजी कामकाज और रिकॉर्ड को संभालने वाले जिम्मेदार पुलिसकर्मी को ‘मुंशी जी’ के नाम से पुकारा जाता है। भले ही ये पद सुनने में सामान्य लगें, लेकिन थाने की अनुशासन व्यवस्था और लिखा-पढ़ी को सुचारू रूप से चलाने में इनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।

पुलिस महकमे में ‘दीवान जी’ और ‘मुंशी जी’ का अंतर

पुलिस विभाग में ‘दीवान जी’ और ‘मुंशी जी’ कोई अलग पद नहीं हैं, बल्कि ये हेड कांस्टेबल को ही दिए गए पारंपरिक नाम हैं। उत्तर भारत, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में, हेड कांस्टेबल को सम्मान के तौर पर ‘दीवान जी’ कहकर पुकारने का पुराना रिवाज है। वहीं, जब कोई हेड कांस्टेबल थाने के कार्यालय (ऑफिस) की जिम्मेदारी संभालता है और लिखा-पढ़ी या रिकॉर्ड का काम देखता है, तो उसे ‘मुंशी जी’ कहा जाता है।

सरल शब्दों में कहें तो, पद एक ही है (हेड कांस्टेबल), लेकिन जब वह विशेष प्रभार या जिम्मेदारी संभालता है, तो उसे इन बोलचाल के शब्दों से संबोधित किया जाता है। यह शब्द किसी अलग रैंक को नहीं, बल्कि पुलिसकर्मी के प्रति सम्मान और उसके कार्य की प्रकृति को दर्शाते हैं।

थाने के ‘मुंशी जी’, पद नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है यह काम

पुलिस विभाग में ‘मुंशी’ कोई आधिकारिक पद नहीं, बल्कि थाने के भीतर निभाई जाने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण ड्यूटी है। आमतौर पर यह जिम्मेदारी किसी अनुभवी हेड कांस्टेबल को सौंपी जाती है, जो एक तरह से थाने के ‘मैनेजर’ के रूप में काम करता है। मुंशी जी का मुख्य काम सभी कांस्टेबलों की ड्यूटी लगाना और उनकी निगरानी करना होता है।

इसके अलावा, थाने की FIR दर्ज करना, केस डायरी और सरकारी रजिस्टर मेंटेन करना, वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का रिकॉर्ड रखना और तमाम पत्राचार संभालना उनकी जिम्मेदारी होती है। संक्षेप में कहें तो, ‘दीवान जी’ जहाँ एक सम्मानजनक संबोधन है, वहीं ‘मुंशी जी’ उस हेड कांस्टेबल को कहा जाता है जो थाने की पूरी लिखा-पढ़ी और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाता है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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