
पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना एक वरदान साबित हो रही है। साल 2023 में शुरू हुई इस योजना के जरिए सरकार छोटे कामगारों को न केवल नई तकनीक की ट्रेनिंग और टूलकिट (औजार) देती है, बल्कि अपना काम बढ़ाने के लिए ₹3 लाख तक का लोन भी बहुत कम ब्याज पर मुहैया कराती है। अगर आप लकड़ी, लोहे, मिट्टी या सिलाई जैसे किसी भी हुनर से जुड़े हैं और अपने काम को बड़े स्तर पर ले जाना चाहते हैं, तो यह योजना आपको आर्थिक मजबूती और नई पहचान दिलाने में पूरी मदद करेगी।
पीएम विश्वकर्मा योजना में मिल रहे हैं रोज़ाना ₹500 और औज़ार खरीदने के लिए ₹15,000
पीएम विश्वकर्मा योजना केवल आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि कारीगरों के कौशल को निखारने का एक संपूर्ण पैकेज है। इसके तहत लाभार्थियों को उनके काम की एडवांस ट्रेनिंग दी जाती है और ट्रेनिंग के दौरान खर्च के लिए ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड भी मिलता है।
इतना ही नहीं, नया काम शुरू करने के लिए सरकार औजारों की किट खरीदने हेतु ₹15,000 की अलग से सहायता देती है। लोन की प्रक्रिया भी बहुत आसान है; पहले चरण में ₹1 लाख का लोन मिलता है, और उसे समय पर चुकाने के बाद आप ₹2 लाख के दूसरे लोन के हकदार बन जाते हैं। इस तरह कुल ₹3 लाख की मदद से कोई भी मध्यम वर्गीय कारीगर अपना बड़ा सपना पूरा कर सकता है।
इन 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों की चमकेगी किस्मत
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का लाभ मुख्य रूप से उन कारीगरों को मिलता है जो पुस्तैनी या पारंपरिक हुनर से जुड़े हैं। सरकार ने इस योजना में 18 अलग-अलग क्षेत्रों को शामिल किया है, जिनमें दर्जी, नाई, मोची, लोहार, राजमिस्त्री, खिलौना बनाने वाले और धोबी जैसे मेहनती वर्ग शामिल हैं।
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि व्यवसाय शुरू करने के लिए मिलने वाला लोन बहुत ही मामूली यानी करीब 5 प्रतिशत ब्याज दर पर दिया जाता है। अगर आप भी इन 18 ट्रेडों में से किसी एक में माहिर हैं और अपने हुनर को एक बड़े कारोबार में बदलना चाहते हैं, तो यह सरकारी स्कीम आपकी आर्थिक बाधाओं को दूर करने का सबसे अच्छा जरिया है।









