
भारत में आज से मैसेजिंग ऐप्स के लिए नए सिम-बाइंडिंग नियम पूरी तरह लागू हो चुके हैं। दूरसंचार विभाग (DoT) की ओर से जारी 90 दिन की समयसीमा 28 फरवरी को समाप्त हो गई, जिसके बाद WhatsApp, Telegram और Signal जैसे लोकप्रिय ऐप्स को सख्ती से अनुपालन करना होगा। इन ऐप्स को अब सुनिश्चित करना पड़ेगा कि यूजर का रजिस्टर्ड सिम कार्ड उसी मोबाइल फोन के प्राइमरी स्लॉट में मौजूद हो, जिसमें ऐप इंस्टॉल और चल रहा है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य साइबर अपराधों पर अंकुश लगाना और डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत करना है, लेकिन यूजर्स के बीच चिंता की लहर है।
सिम-बाइंडिंग नियम क्या है और कैसे काम करेगा?
पहले के दौर में यूजर्स एक बार OTP वेरिफिकेशन के जरिए अकाउंट बना लेते थे और उसके बाद सिम कार्ड निकालकर भी वाई-फाई पर ऐप का इस्तेमाल कर पाते थे। यह सुविधा अब इतिहास बन चुकी है। नए टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी (TCS) रूल्स 2024 के तहत ऐप का प्रत्यक्ष लिंक फोन में मौजूद एक्टिव सिम से जुड़ा रहेगा। अगर रजिस्टर्ड सिम को फोन से हटाया जाता है, बदला जाता है या डीएक्टिवेट कर दिया जाता है, तो मैसेजिंग ऐप तुरंत काम करना बंद कर देगा।
दोबारा ऐप सक्रिय करने के लिए उसी सिम को वापस फोन में लगाकर दोबारा वेरिफिकेशन जरूरी होगा। DoT के अनुसार, यह चेक हर 6 घंटे में ऑटोमैटिक होगा, जो ऐप कंपनियों को लागू करना होगा। यह बदलाव विशेष रूप से उन यूजर्स को प्रभावित करेगा जो बिना सिम वाले टैबलेट, पुराने फोन या सेकेंडरी डिवाइस पर ऐप चलाते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपका प्राइमरी फोन खराब हो जाए और सिम निकालकर दूसरे डिवाइस में डाल दें, तो पुराने डिवाइस पर ऐप बंद हो जाएगा।
WhatsApp Web और मल्टी-डिवाइस यूजर्स पर असर
सबसे बड़ी मुसीबत WhatsApp Web, Telegram Desktop और Linked Devices फीचर यूजर्स को हो रही है। अब ये सेकेंडरी प्लेटफॉर्म हर 6 घंटे में अपने आप लॉगआउट हो जाएंगे। यूजर को प्राइमरी फोन से QR कोड स्कैन करके दोबारा लॉगिन करना पड़ेगा, वो भी केवल तभी जब फोन में एक्टिव सिम मौजूद हो। अगर सिम गायब पाई गई, तो चैट हिस्ट्री एक्सेस करने में दिक्कत होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे प्रोडक्टिविटी प्रभावित होगी, खासकर बिजनेस यूजर्स और फ्रीलांसर्स के लिए जो डेस्कटॉप पर निर्भर हैं।
मल्टी-सिम फोन यूजर्स को भी सावधान रहना होगा। नियम प्राइमरी स्लॉट को ही मान्यता देगा, जहां रजिस्टर्ड नंबर की सिम हो। डुअल-सिम फोन में सेकेंडरी स्लॉट की सिम से ऐप वेरिफाई नहीं होगा।
सरकार का तर्क: साइबर फ्रॉड पर लगाम
सरकार ने इस नियम को साइबर ठगी रोकने का हथियार बताया है। पिछले कुछ वर्षों में साइबर फ्रॉड के मामले 300% से अधिक बढ़ चुके हैं। अपराधी एक बार OTP से भारतीय नंबर वेरिफाई कर विदेश से फर्जी अकाउंट्स चला रहे थे। अब हर अकाउंट KYC-कंप्लायंट सिम से बंधा रहेगा, जिससे ट्रेसिंग आसान हो जाएगी। DoT के एक अधिकारी ने कहा, “यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। सिम-बाइंडिंग से फेक अकाउंट्स और स्पैम पर नियंत्रण होगा।”
किसे मिलेगी छूट और चुनौतियां?
नियम केवल भारत-रजिस्टर्ड अकाउंट्स पर लागू होगा। रोमिंग या विदेश यात्रा के दौरान अगर भारतीय सिम फोन में मौजूद रहे, तो सर्विस चलेगी। लेकिन लोकल सिम इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को अस्थायी समस्या हो सकती है। eSIM यूजर्स को भी राहत है, बशर्ते वो एक्टिव हो।
हालांकि, टेक कंपनियां असंतुष्ट हैं। WhatsApp और Telegram ने कोर्ट में चुनौती दी है कि OTT प्लेटफॉर्म्स पर टेलीकॉम नियम लागू नहीं होने चाहिए। इंडस्ट्री बॉडी ने कहा, “यह यूजर एक्सपीरियंस खराब करेगा।” लेकिन सरकार ने कोई छूट नहीं दी। कंपनियों को 28 फरवरी तक कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करनी थी।
यूजर्स क्या करें?
यूजर्स को सलाह है कि सिम हमेशा प्राइमरी फोन में रखें, बैकअप डिवाइस तैयार रखें और ऐप अपडेट चेक करें। लंबे सफर पर eSIM या डुअल-सिम का सही इस्तेमाल करें। यह नियम डिजिटल इंडिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन कार्यान्वयन में संतुलन जरूरी है।









