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क्या छोटे बच्चों के सामने कपड़े बदलना या नहाना सही है? Pediatrician ने बताया बच्चों पर क्या पड़ता है असर

क्या बच्चों के सामने कपड़े बदलना उनकी मासूमियत के लिए वाकई ठीक है? मशहूर पीडियाट्रिशियन अनुराधा ने खुलासा किया है कि यह आदत बच्चों की 'बॉडी बाउंड्री' और प्राइवेसी की समझ को कैसे प्रभावित कर सकती है। अपने बच्चे के सुरक्षित भविष्य के लिए यह ज़रूरी सलाह ज़रूर जानें।

By Pinki Negi

क्या छोटे बच्चों के सामने कपड़े बदलना या नहाना सही है? Pediatrician ने बताया बच्चों पर क्या पड़ता है असर
Parenting Tips for Body Boundaries

अक्सर माता-पिता यह सोचकर छोटे बच्चों के सामने कपड़े बदल लेते हैं कि बच्चा अभी नासमझ है, लेकिन यह आदत बच्चे के मानसिक विकास पर गहरा असर डाल सकती है। मशहूर पीडियाट्रिशियन (बच्चों की डॉक्टर) अनुराधा ने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया है कि बच्चों के सामने नहाना या कपड़े बदलना किस उम्र तक सही है।

उनके अनुसार, बच्चों में शरीर की बनावट और प्राइवेसी को लेकर समझ बहुत जल्दी विकसित होने लगती है। इसलिए, बच्चों को ‘बॉडी बाउंड्री’ और ‘प्राइवेसी’ का सही मतलब समझाने के लिए माता-पिता को एक निश्चित उम्र के बाद उनके सामने कपड़े चेंज करने से बचना चाहिए, ताकि बच्चे की सोच पर इसका नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

बच्चों को ‘प्राइवेसी’ सिखाना क्यों है जरूरी? डॉक्टर ने बताया

डॉक्टर अनुराधा के अनुसार, 6 साल तक की उम्र के बच्चे अपने शरीर और निजता (Privacy) के बारे में सीख रहे होते हैं। यदि माता-पिता अक्सर उनके सामने कपड़े बदलते हैं, तो बच्चों को लगता है कि शरीर का प्रदर्शन सामान्य बात है और प्राइवेसी जैसी कोई चीज़ नहीं होती। यह धारणा बच्चों की ‘बॉडी बाउंड्री’ को कमजोर कर सकती है, जिससे भविष्य में वे ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ जैसे अंतर को समझने में कंफ्यूज हो सकते हैं।

डॉक्टर की सलाह है कि माता-पिता को खुद कमरे में कपड़े बदलकर और बाथरूम में नहाकर बच्चों के सामने सही उदाहरण पेश करना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे यह सीखते हैं कि उनका शरीर उनका अपना है और प्राइवेसी हर इंसान का बुनियादी हक है।

बॉडी सेफ्टी’ और सही व्यवहार सिखाने के लिए डॉक्टर की महत्वपूर्ण सलाह

डॉक्टर अनुराधा के अनुसार, माता-पिता घर के छोटे-छोटे बदलावों के जरिए बच्चों को ‘बॉडी सेफ्टी’ के बारे में जागरूक कर सकते हैं। प्राइवेसी का पालन करते हुए बच्चों को सरल भाषा में समझाएं कि कौन सा स्पर्श (Touch) सही है और कौन सा गलत।

यह बहुत ज़रूरी है कि बच्चा अपने शरीर को लेकर सहज रहे और अगर वह कभी भी किसी बात पर असहज महसूस करे, तो उसे बिना डरे अपनी बात कहने की आज़ादी हो। बचपन में सिखाई गई ये ‘बॉडी बाउंड्रीज़’ बच्चों के मानसिक विकास के लिए ढाल का काम करती हैं। माता-पिता द्वारा तय की गई ये सही सीमाएं ही भविष्य में बच्चों को अधिक जागरूक, सुरक्षित और आत्मविश्वास से भरपूर बनाती हैं।

बच्चों को सुरक्षित बनाने के तरीके

  • खुली बातचीत: बच्चों को सिखाएं कि वे आपसे हर बात शेयर कर सकते हैं।
  • सरल भाषा: उम्र के हिसाब से उन्हें उनके अंगों और सुरक्षा के बारे में जानकारी दें।
  • असहजता का सम्मान: यदि बच्चा किसी के पास जाने या छूने से मना करे, तो उसकी भावनाओं को समझें।
  • जागरूकता: छोटी उम्र के ये सबक उन्हें जीवन भर गलत व्यवहार की पहचान करने में मदद करेंगे।
Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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