
भारतीय रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। हम सभी ने ट्रेन के नीले या लाल डिब्बों के बाहर पीले या सफेद रंग से लिखे 5 या 6 अंकों के नंबर देखे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह नंबर आपकी सुरक्षा और सुविधा से कैसे जुड़े हैं? आज की इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि रेलवे के इन ‘सीक्रेट कोड्स’ का असली मतलब क्या है।
कोच की ‘उम्र’ का पता
ट्रेन के कोच पर लिखे नंबर के शुरुआती दो अंक कोच के मैन्युफैक्चरिंग ईयर (निर्माण वर्ष) को दर्शाते हैं। इससे पता चलता है कि जिस डिब्बे में आप बैठे हैं, वह कितना पुराना या नया है।
- 95XXX: इसका मतलब है कि यह कोच साल 1995 में बना है।
- 08XXX: इसका मतलब है कि यह कोच साल 2008 में बना है।
- 22XXX: यानी यह बिल्कुल नया कोच है, जो साल 2022 में तैयार हुआ है।
प्रो टिप: अगर आप 20 से ऊपर वाले नंबर देखते हैं, तो समझ जाइए कि आप एक आधुनिक और नई तकनीक वाले कोच में सफर कर रहे हैं।
डिब्बे की कैटेगरी
असली जानकारी कोच नंबर के आखिरी तीन अंकों में छिपी होती है। इन नंबरों से तय होता है कि डिब्बा किस क्लास का है। रेलवे ने इसके लिए एक खास ‘नंबरिंग चार्ट’ बनाया है:
एसी (AC) कोच के लिए:
- 001 – 025: फर्स्ट क्लास एसी (1st AC)
- 026 – 050: कंपोजिट कोच (फर्स्ट एसी + सेकंड एसी का मिश्रण)
- 051 – 100: सेकंड एसी (2nd AC)
- 101 – 150: थर्ड एसी (3rd AC)
- 151 – 200: एसी चेयर कार (AC Chair Car)
स्लीपर और जनरल कोच के लिए:
- 201 – 400: स्लीपर क्लास (Sleeper Class) – यह सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले कोच हैं।
- 401 – 600: जनरल कोच (General Class) – ये अनारक्षित डिब्बे होते हैं।
अन्य विशेष कोच
- 601 – 700: सेकंड क्लास सीटिंग (जनशताब्दी जैसी ट्रेनों की कुर्सी वाली बोगी)
- 701 – 800: लगेज और गार्ड डिब्बा (SLR)
- 801 से ऊपर: पेंट्री कार (खाना बनाने वाला कोच) या जनरेटर वाली बोगी।
नीली और लाल ट्रेनों का अंतर (ICF vs LHB)
नंबरों के अलावा कोच के रंगों का भी अपना महत्व है:
- नीले कोच (ICF): ये पुराने मॉडल के कोच हैं, जो लोहे के बने होते हैं। इनमें दुर्घटना के वक्त एक के ऊपर एक चढ़ने का खतरा रहता है।
- लाल कोच (LHB): ये स्टेनलेस स्टील के बने जर्मन तकनीक वाले कोच हैं। ये ज्यादा तेज दौड़ सकते हैं और दुर्घटना के वक्त कम से कम नुकसान पहुंचाते हैं। इनके नंबरिंग सिस्टम में भी अंत में कभी-कभी ‘C’ या कोई और अक्षर जुड़ा होता है।
क्यों जरूरी है ये नंबर जानना?
मान लीजिए आप प्लेटफॉर्म पर खड़े हैं और आपको अपनी बोगी नहीं मिल रही। अगर आप जानते हैं कि 400 से 600 के बीच वाले नंबर जनरल कोच के हैं, तो आप भीड़ में भागने के बजाय सीधे सही दिशा में जा सकते हैं। साथ ही, अगर कोच बहुत पुराना (जैसे 90 या 92 से शुरू होने वाला) है, तो रेलवे उसे समय-समय पर रिटायर भी करता है, जो सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है।









