
उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर (SI) बनना न केवल सम्मान की बात है, बल्कि यह समाज की सेवा करने का एक बेहतरीन मौका भी है। देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में इस पद पर रहते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी जिम्मेदारी होती है।
एक सब इंस्पेक्टर को अपनी ड्यूटी के दौरान कई कठिन चुनौतियों और जोखिमों का सामना करना पड़ता है। अक्सर उन्हें अपनी जान की परवाह किए बिना नागरिकों की सुरक्षा के लिए तैनात रहना होता है। यदि आपमें साहस है और आप कानून के दायरे में रहकर समाज में बदलाव लाना चाहते हैं, तो यह करियर आपके लिए गौरवपूर्ण साबित हो सकता है।
यूपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर
अक्सर उम्मीदवारों के मन में यह सवाल होता है कि उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (SI) बनने का सही रास्ता क्या है और इस पद पर कितनी कमाई होती है? आपकी इसी जिज्ञासा को शांत करने के लिए हम इस करियर से जुड़ी हर बारीक जानकारी यहाँ साझा कर रहे हैं।
हम आपको न केवल भर्ती की पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताएंगे, बल्कि यह भी स्पष्ट करेंगे कि एक सब-इंस्पेक्टर को कितनी सैलरी मिलती है। इसके अलावा, हम उन सरकारी भत्तों (Allowances) पर भी चर्चा करेंगे जो इस गौरवशाली पद के साथ एक अधिकारी को मिलते हैं, जिससे उनका जीवन सुरक्षित और सुविधाजनक बनता है।
यूपी पुलिस SI चयन प्रक्रिया
यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बनने के लिए सबसे पहली शर्त यह है कि उम्मीदवार के पास किसी भी विषय में ग्रेजुएशन (Bachelor Degree) की डिग्री होनी चाहिए। इसके बाद, चयन की प्रक्रिया मुख्य रूप से तीन चरणों में पूरी होती है:
- लिखित परीक्षा (Written Exam): इसमें पास होने के लिए हर विषय में कम से कम 35% और कुल मिलाकर 50% अंक लाना अनिवार्य है।
- शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET): लिखित परीक्षा पास करने वालों का शारीरिक माप (ऊंचाई, छाती का माप और वजन) लिया जाता है और शारीरिक फिटनेस टेस्ट होता है।
- डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: अंत में उम्मीदवार के सभी शैक्षिक और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जाती है।
जो उम्मीदवार इन तीनों चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करते हैं, उन्हें ही अंतिम रूप से सब-इंस्पेक्टर पद के लिए चुना जाता है।
यूपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर सैलरी
उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों को 7वें वेतन आयोग के आधार पर बेहतरीन सैलरी पैकेज मिलता है। एक SI का मूल वेतन (Base Pay) ₹35,400 होता है, लेकिन इसके साथ ही उन्हें कई सरकारी सुविधाएं और भत्ते भी दिए जाते हैं।
इनमें महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और यात्रा भत्ता (TA) शामिल हैं। इन सभी भत्तों को जोड़ने के बाद, एक नए सब-इंस्पेक्टर की ग्रॉस सैलरी ₹55,000 से ₹58,000 के बीच बैठती है। यह सम्मानजनक वेतन और सरकारी सुविधाएं इस पद को युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बनाती हैं।
यूपी पुलिस को मिलने वाली सैलरी और भत्ते
– बेसिक पे (Basic Pay) – 35,400 रुपये
– ग्रेड पे (Grade Pay) – 4,200 रुपये
– महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) – 14,868 रुपये (बेसिक पे का 42%)
– मकान किराया भत्ता (House Rent Allowance) – 8,496 रुपये (मेट्रो शहरों के लिए बेसिक पे का 24%)
– इन-हैंड सैलरी (In-Hand Salary) – 55,000 रुपये से 58,000 रुपये
– ग्रॉस सैलरी (Gross Salary) – 62,000 रुपये – रुपये 65,000
– कुल कटौती (Total deduction) – Rs. 5,000 – Rs. 8,000
– नेट सैलरी (ग्रॉस – कटौती) Net Pay (Gross -Deduction) – Rs. 55,000 – Rs. 58,000
सैलरी के साथ मिलते हैं ये शानदार भत्ते
यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर को केवल बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि सरकार की ओर से कई तरह के आर्थिक लाभ और भत्ते भी दिए जाते हैं। ये भत्ते एक अधिकारी की जीवनशैली और जरूरतों को ध्यान में रखकर तय किए गए हैं। प्रमुख भत्तों में महंगाई भत्ता (DA) शामिल है, जो फिलहाल मूल वेतन का लगभग 42% है।
इसके अलावा, रहने के लिए मकान किराया भत्ता (HRA), स्वास्थ्य के लिए मेडिकल भत्ता और वर्दी के रखरखाव के लिए यूनिफॉर्म भत्ता मिलता है। ड्यूटी के दौरान यात्रा के लिए TA और दैनिक खान-पान के लिए राशन मनी भी दी जाती है। जोखिम भरे कार्यों के लिए ‘कठिनाई भत्ता’ जैसे विशेष लाभ भी इस नौकरी का हिस्सा हैं।
भत्तों की सूची
| भत्ता (Allowance) | उद्देश्य (Purpose) |
| महंगाई भत्ता (DA) | बढ़ती महंगाई से राहत के लिए (मूल वेतन का ~42%) |
| मकान किराया (HRA) | रहने के खर्च के लिए (8% से 24% तक) |
| मेडिकल भत्ता | स्वास्थ्य संबंधी खर्चों को कवर करने के लिए |
| यूनिफॉर्म भत्ता | वर्दी की खरीदारी और रख-रखाव के लिए |
| राशन मनी | दैनिक खान-पान और जीवन यापन के लिए |
| यात्रा भत्ता (TA) | आधिकारिक दौरों और ट्रांसपोर्टेशन के खर्च के लिए |
सब-इंस्पेक्टर की 5 मुख्य जिम्मेदारियां
- शांति व्यवस्था: अपने इलाके में कानून का पालन कराना और दंगों जैसी स्थिति को संभालना।
- अपराध की जांच: आपराधिक मामलों की तहकीकात करना और दोषियों के खिलाफ सबूत जुटाना।
- टीम लीडरशिप: जूनियर पुलिस कर्मियों को निर्देश देना और उनके कार्यों की निगरानी करना।
- जनसंपर्क: स्थानीय लोगों से जुड़कर अपराध रोकने के लिए ‘कम्युनिटी पुलिसिंग’ को बढ़ावा देना।
- कागजी कार्रवाई: पुलिस केस से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स को मेंटेन करना।









