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सावधान! घर के पर्दों को कितनी बार धोना जरूरी? ये 4 वजहें उन्हें बनाती हैं बीमारी का घर, जानकर रह जाएंगे दंग

घर सजाने के चक्कर में पर्दों की अनदेखी सेहत को नुकसान पहुंचा रही है। धूल, प्रदूषण, पेट्स के बाल और किचन का तेल इन्हें 3-6 महीने में गंदा कर देते हैं। गंदे पर्दे एलर्जी, अस्थमा बढ़ाते हैं। शांत इलाके में 6-12 महीने, शहरों में हर तिमाही धोएं। ठंडे पानी से साफ कर छाया में सुखाएं।

By Pinki Negi

सावधान! घर के पर्दों को कितनी बार धोना जरूरी? ये 4 वजहें उन्हें बनाती हैं बीमारी का घर, जानकर रह जाएंगे दंग

हर कोई अपने घर को अपनी पसंद से सजाता है। तरह-तरह के डेकोरेटिव आइटम्स लगाता है, लेकिन लिविंग रूम, किचन या बाथरूम के पर्दों को अक्सर नजरअंदाज कर देता है। लोग सोचते हैं कि कौन इन्हें उतारे, धोए और दोबारा लगाए। कुछ तो चार-पांच महीने इन्हें गंदा ही रहने देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये पर्दे धूल-मिट्टी, प्रदूषण और एलर्जेंस का अड्डा बनकर आपकी सेहत को चुपचाप नुकसान पहुंचा रहे हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, गंदे पर्दे घर की हवा को जहरीला बना सकते हैं, जिससे अस्थमा, एलर्जी और स्किन प्रॉब्लम जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

पर्दों की सफाई कब और कितनी बार?

पर्दों को धोने का कोई सख्त नियम तो नहीं, लेकिन पर्यावरण पर निर्भर करता है। शांत, हरे-भरे इलाके में रहने वालों के लिए 6-12 महीने में एक बार काफी है। वहीं, धूल-भरी सड़क किनारे या प्रदूषित शहरों जैसे मैनपुरी जैसे इलाकों में हर 3-6 महीने में साफ करना जरूरी। किचन या बाथरूम के पर्दे तो महीने में एक बार हल्के से पोछें या धोएं, क्योंकि यहां तेल, नमी और फफूंद तेजी से जमा होती है। टाइम्स ऑफ इंडिया जैसी रिपोर्ट्स भी यही कहती हैं कि साल भर बिना साफ किए न छोड़ें।

क्या बनाते हैं पर्दों को जल्दी गंदा ये 4 फैक्टर्स?

पर्दे हवा के जरिए आने वाली गंदगी को फंसाते हैं। पहला बड़ा कारक धूल-प्रदूषण: सड़क किनारे घरों में कण लगातार चिपकते रहते हैं। दूसरा, पालतू जानवर: कुत्ते-बिल्ली के बाल, रूसी पर्दों पर जमकर एलर्जी पैदा करते हैं, खासकर बच्चों वाले घरों में। तीसरा, किचन का तेल-धुआं: खाना पकाने से चिकनाई और मसाले हवा में फैलकर पर्दों का रंग बदल देते हैं, बदबू भी लाते हैं। चौथा, नमी और परागकण: बाथरूम में फफूंद लगती है, जबकि बाहर के पराग सांस की समस्या बढ़ाते हैं। ये फैक्टर्स जानकर हैरानी होती है कि कितनी तेजी से पर्दे बैक्टीरिया का घर बन जाते हैं।

सेहत पर गंभीर असर

गंदे पर्दे एलर्जेंस, धूल के कण और पेट्स की रूसी से भरे होते हैं। इससे सेंसिटिव स्किन वालों को खुजली, अस्थमा पेशेंट्स को सांस फूलना और बच्चों को बार-बार बीमारी हो सकती है। घर की हवा की क्वालिटी खराब होने से पूरे परिवार का इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ता है। विशेषज्ञ चेताते हैं कि ये ‘साइलेंट किलर’ घर की हाइजीन बर्बाद कर देते हैं।

आसान सफाई टिप्स अपनाएं

फैब्रिक लेबल चेक करें। मशीन वॉश वाले को ठंडे पानी और हल्के डिटर्जेंट से धोएं, जाली बैग में डालकर। नाजुक पर्दों को ड्राई क्लीन करवाएं। दाग पहले साबुन से हटाएं, मशीन में ठूंसें नहीं- स्पेस रखें। छाया में सुखाएं ताकि रंग फीके न हों। वैक्यूम से हफ्ते में हल्की सफाई भी काफी। इन स्टेप्स से पर्दे नए जैसे चमकेंगे। पर्दों की अनदेखी महंगी पड़ सकती है। नियमित सफाई से घर स्वस्थ और सुंदर बनेगा। आज ही चेक करें- क्या आपके पर्दे साफ हैं? 

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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