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मोबाइल ने छीना बच्चों का बचपन? फिजिकल एक्टिविटी न होने से मेंटल हेल्थ पर पड़ रहा है बुरा असर

गाजियाबाद में तीन बहनों की मोबाइल लत से आत्महत्या ने देश को झकझोर दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, स्क्रीन टाइम से नींद-डिप्रेशन बढ़ा, लेकिन आउटडोर गेम्स एंडोर्फिन रिलीज कर तनाव दूर करते हैं। टीमवर्क, विटामिन-D और गहरी नींद देते हैं। अभिभावक जागें- मैदान से जोड़ें बच्चों को, बचपन बचाएं।

By Pinki Negi

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मोबाइल की चकाचौंध भरी दुनिया ने बच्चों के बचपन को कैद कर लिया है। हाल ही में गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों ने मोबाइल गेम की लत के चलते आत्मघाती कदम उठा लिया, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। एक स्टडी के अनुसार, बच्चों को औसतन 11 साल की उम्र में स्मार्टफोन मिल जाता है, जिससे नींद की कमी, मोटापा और डिप्रेशन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि फिजिकल एक्टिविटी की कमी से मेंटल हेल्थ पर गहरा बुरा असर पड़ रहा है। Pediatrics जर्नल की रिसर्च में 30,000 बच्चों पर पाया गया कि रोज 3 घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम दिमाग के प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स को नुकसान पहुंचाता है, जो ध्यान, स्मृति और भावनात्मक नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है।

डिजिटल लत का काला सच

मोबाइल ने बच्चों को बंद कमरों में कैद कर दिया है। जगरण की रिपोर्ट के मुताबिक, अचानक फोन छीनने से बच्चे हिंसक हो सकते हैं, क्योंकि लत इतनी गहरी हो जाती है। WHO गाइडलाइंस कहती हैं कि शारीरिक निष्क्रियता मोटापा, गर्दन-रीढ़ की समस्याएं और आंखों पर स्ट्रेन बढ़ाती है। कम उम्र में फोन मिलने से चिंता, आक्रामकता और आत्महत्या के विचार 6-20% तक बढ़ जाते हैं। साइबरबुलिंग और खराब नींद मानसिक विकास को रोकती है, जबकि रील्स-शॉर्ट्स जैसी कंटेंट से आभासी दुनिया में खो जाते हैं बच्चे।

आउटडोर गेम्स से सकारात्मक प्रभाव

इस समस्या का सबसे प्रभावी हल आउटडोर गेम्स हैं। जब बच्चा मैदान में दौड़ता-भागता है, तो एंडोर्फिन और सेरोटोनिन जैसे हैप्पी हार्मोन्स रिलीज होते हैं, जो तनाव-अकेलापन दूर भगाते हैं। दौड़ने से मस्तिष्क में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है, एकाग्रता-याददाश्त सुधरती है और कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन कम होते हैं।

फुटबॉल, क्रिकेट या कबड्डी जैसे खेल टीमवर्क, हार-जीत स्वीकारना और वास्तविक सामाजिक संवाद सिखाते हैं। ये वर्चुअल रिवॉर्ड्स से कहीं बेहतर हैं, जो बच्चों को आइसोलेशन से बचाते हैं और आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।​

शारीरिक फायदे जो बचाते हैं जिंदगी

बाहर खेलने से विटामिन-D मिलता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है और इम्यून सिस्टम ठीक रखता है। शारीरिक थकान गहरी नींद लाती है, जो डिप्रेशन से लड़ने में मदद करती है। इसके उलट, रातभर गेमिंग स्लीप साइकिल बिगाड़ देती है। स्टडीज दिखाती हैं कि आउटडोर एक्टिविटी सुसाइडल टेंडेंसी को 20% तक कम कर सकती है।

विशेषज्ञ सलाह

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि स्क्रीन टाइम 1-2 घंटे तक सीमित रखें, सोने से 1 घंटा पहले बंद करें। आउटडोर खेल बढ़ाएं, परिवार संग समय बिताएं। अचानक फोन न छीनें, धीरे-धीरे कम करें। गाजियाबाद जैसी घटनाएं चेतावनी हैं- बच्चों को मिट्टी से जोड़ें, स्क्रीन से दूर। आज ही मैदान की ओर कदम बढ़ाएं, वरना बचपन हाथ से निकल जाएगा।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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