
हमारी दुनिया रहस्यों और विविधताओं से भरी हुई है, जहाँ हर समुदाय के अपने निराले नियम और परंपराएं हैं। ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला गाँव भी मौजूद है, जहाँ पुरुषों के आने-जाने पर पूरी तरह पाबंदी है। इस गाँव की कमान पूरी तरह से महिलाओं के हाथों में है और यहाँ केवल औरतों का ही राज चलता है। इस अनोखी सामाजिक व्यवस्था के पीछे की वजहें जितनी दिलचस्प हैं, उतनी ही चौंकाने वाली भी।
केन्या का वो गाँव जहाँ प्रताड़ित महिलाओं ने बसाई अपनी अलग दुनिया
अफ्रीका के केन्या देश में स्थित ‘उमोजा’ गाँव अपनी अनोखी व्यवस्था के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। संबुरू प्रांत के इस गाँव को करीब 30 साल पहले उन महिलाओं ने बसाया था जो घरेलू हिंसा, बाल विवाह और अन्य प्रताड़नाओं की शिकार हुई थीं। यहाँ मिट्टी और गोबर से बने घरों के बीच सिर्फ औरतें ही रहती हैं और पुरुषों के आने पर पूरी तरह पाबंदी है। खुद को सुरक्षित रखने और अपनी एक स्वतंत्र दुनिया बनाने के मकसद से इन महिलाओं ने इस गाँव को अपनी पनाहगाह बनाया है।
उमोजा गाँव कैसे बना बेसहारा महिलाओं की आखिरी उम्मीद?
उमोजा गाँव की महिलाओं के लिए यह जगह केवल एक घर नहीं, बल्कि अपमान और गुलामी से आजादी का प्रतीक है। यहाँ रहने वाली क्रिस्टीन सितियान जैसी कई महिलाओं की कहानियाँ दिल दहला देने वाली हैं। क्रिस्टीन जब अपने पति के अत्याचारों से तंग आकर मायके लौटीं, तो दहेज के मवेशी चोरी होने के कारण उनके माता-पिता ने उन्हें वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। ऐसे कठिन समय में उमोजा गाँव ने उन्हें सहारा दिया, जहाँ दहेज और परंपराओं की बेड़ियों से मुक्त होकर वे आज एक स्वतंत्र और स्वाभिमानी जीवन जी रही हैं।
15 महिलाओं से शुरू हुआ ‘उमोजा’ अब है 40 परिवारों का अटूट किला
तकरीबन 30 साल पहले रेबेका लोलोसॉली ने पुरुष प्रधान समाज के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई और 15 अन्य महिलाओं के साथ मिलकर ‘उमोजा’ गांव की नींव रखी। आज यहाँ करीब 40 परिवार रहते हैं, जहाँ महिलाएँ पारंपरिक मोतियों के आभूषण (Beads) पर्यटकों को बेचकर अपना गुजारा करती हैं।
हालाँकि, स्थानीय पुरुषों द्वारा मवेशी चोरी जैसी चुनौतियां यहाँ आज भी बनी हुई हैं, लेकिन ये महिलाएँ पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वे यहाँ एक माँ और एक स्वतंत्र स्त्री के रूप में खुश हैं और अब दोबारा शादी करने या पुराने दुखों के पास लौटने का उनका कोई इरादा नहीं है।









