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किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब 50% सब्सिडी पर मिल रहे हैं ये फसल बीज, जल्दी करें आवेदन, मौका सीमित

रबी मौसम में किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। कृषि विभाग ने प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराए हैं जिन पर 30 से 50 प्रतिशत अनुदान मिल रहा है। चना, मटर, सरसों, मसूर और गेहूं की विभिन्न किस्मों के बीज अब सरकारी केंद्रों पर आसानी से मिल रहे हैं। किसान अपने आधार कार्ड और खतौनी के साथ आवेदन करके बीज प्राप्त कर सकते हैं। विभाग नियमित प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित करता है, जिससे किसानों को सही कृषि तकनीकें सीखने को मिलती हैं।

By Pinki Negi

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रबी की बुवाई का मौसम आते ही किसानों के लिए खुशियों का पिटारा खुल गया है। कृषि विभाग ने इस बार ऐसी योजना लागू की है, जिससे किसानों की परेशानी कम होगी और कमाई अधिक होगी। देश के विभिन्न हिस्सों में अब सरकारी कृषि केंद्रों पर उच्च गुणवत्ता वाले बीज आ गए हैं, जिन पर किसानों को 30 से 50 प्रतिशत तक अनुदान मिल रहा है। यह कोई सामान्य योजना नहीं है यह किसानों के भविष्य को संवारने की एक बड़ी कोशिश है।

बीजों की किस्मों में है विविधता

किसानों को अब यह सुविधा है कि वे अपनी जमीन की जरूरत और मौसम के अनुसार अलग-अलग फसलें चुन सकते हैं। चना, मटर, सरसों, मसूर और गेहूं- सभी की उन्नत प्रजातियों के बीज सरकारी भंडारों पर मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश में किसानों को गेहूं की DBW-303, DBW-222 जैसी किस्मों के बीज मिल रहे हैं, जबकि चना की RVG-204 और मटर की IPFD-9-2 किस्मों का भी इंतजाम किया गया है। हर किस्म को सरकार की ओर से परखा-परीक्षा किया जाता है, ताकि किसानों को केवल सेरा-सेर बीज ही मिले।

अनुदान की बारिश से गहरी खुशी

अनुदान की यह रकम किसानों के बटुए पर सीधा असर डालती है। मसलन, अगर गेहूं की कीमत 4,680 रुपए प्रति क्विंटल है, तो सरकार 2,340 रुपए देती है और किसान को मात्र 2,340 रुपए देने होते हैं। राई और सरसों के मामले में तो ऐसी किस्में भी हैं, जिनके बीज किसानों को बिल्कुल निःशुल्क दिए जा रहे हैं। छोटे किसानों के लिए तो यह वरदान साबित हो रहा है, क्योंकि उनके लिए अच्छे बीज खरीदना हमेशा मुश्किल होता था।

आवेदन की प्रक्रिया सरल बनाई गई है

किसानों को इस योजना का लाभ लेने के लिए ज्यादा परेशानी नहीं करनी पड़ेगी। अपने आधार कार्ड, बैंक पासबुक और खतौनी की फोटोकॉपी लेकर सीधे नजदीकी कृषि कल्याण केंद्र जाना है। कुछ इलाकों में तो ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की भी सुविधा दी गई है। अगर बहुत सारे किसान आवेदन दें, तो लॉटरी प्रणाली से बीज का वितरण किया जाएगा। यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि सभी को न्यायसंगत मौका मिले।

विशेषज्ञों की सलाह से भी फायदा

कृषि विभाग केवल बीज ही नहीं देता, बल्कि किसानों को उन बीजों से अधिकतम फायदा उठाने का तरीका भी सिखाता है। समय-समय पर खेतों में प्रशिक्षण शिविर और जागरूकता कैंप लगाए जाते हैं, जहां खेतिहर मजदूरों और किसानों को बीज की बुवाई, पौधों की देखभाल, समय पर सिंचाई और कीटनाशकों के सही इस्तेमाल के बारे में बताया जाता है। यह तकनीकी ज्ञान किसानों को फसल तैयार करने में आत्मविश्वास देता है।

किसानों की वास्तविक कहानियां

अमेठी जिले के किसान मणि तिवारी और राम प्रकाश यादव का कहना है कि इस योजना से उनकी परेशानियां कम हुई हैं। पहले उन्हें बाजारों की भटकन करनी पड़ती थी, नकली बीजों का डर रहता था। अब जो बीज सरकार के पास से मिलते हैं, वे न केवल असली होते हैं, बल्कि परीक्षित भी होते हैं। पैदावार भी बेहतर होती है। साथ ही, अनुदान से उनका खर्च भी आधे में आ जाता है।

भविष्य की तरफ एक बड़ा कदम

इस योजना का मकसद साफ है, किसानों की आय बढ़ानी है और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। जब किसान अच्छे बीज और सही जानकारी पाएंगे, तो वे बेहतर फसल उगाएंगे। उत्पादन बढ़ेगा, गुणवत्ता भी बेहतर होगी। यह न केवल किसान परिवार के लिए फायदेमंद है, बल्कि पूरे देश की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत करता है। किसानों को चाहिए कि वे इस मौके को हाथ से न जाने दें और जल्द से जल्द अपने नजदीकी कृषि केंद्र से संपर्क कर लें।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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