
नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत महंगाई के काले बादलों के साथ हो रही है। 1 अप्रैल से कार, टू-व्हीलर, टीवी, फ्रिज, एयर कंडीशनर (एसी) जैसे जरूरी सामान 5-10 फीसदी तक महंगे हो सकते हैं। कच्चे माल की कीमतों में वैश्विक उछाल, रुपये की कमजोरी और माल ढुलाई लागत में बढ़ोतरी ने कंपनियों को कीमतें बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है। उपभोक्ताओं की जेब पर यह अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, खासकर मध्यम वर्ग के लिए।
कच्चे माल की बढ़ती कीमतें मुख्य वजह
प्लास्टिक, रेजिन और पॉलिमर जैसे कच्चे माल की कीमतों में अचानक तेजी आ गई है। ये सामग्री ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मालवाहतुकी (फ्रेट) दरें 7-10 फीसदी बढ़ चुकी हैं, जिससे आयातित सामान महंगा हो गया।
भारतीय रुपये की अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 2 फीसदी की कमजोरी ने स्थिति को और जटिल बना दिया। कंपनियों को उत्पादन और वितरण में बढ़ा खर्च वहन करना पड़ रहा है, जिसे वे ग्राहकों पर डाल रही हैं। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह चक्र महंगाई को और भड़का सकता है।
कार और टू-व्हीलर महंगे
लग्जरी कार निर्माता मर्सिडीज-बेंज और ऑडी ने 1 अप्रैल से 2 फीसदी कीमत वृद्धि की घोषणा कर दी है। मर्सिडीज ने सभी मॉडल्स पर यह बढ़ोतरी लागू करने की बात कही, जबकि ऑडी भी लागत वसूली के लिए कदम उठा रही है।
मास मार्केट कंपनियां जैसे मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, हुंडई और किआ 2-3 फीसदी की बढ़ोतरी पर विचार कर रही हैं। टू-व्हीलर सेगमेंट में भी यही ट्रेंड दिख रहा है। ईरान-इजरायल तनाव से सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका ने कीमतों को और ऊपर धकेल दिया।
टीवी, फ्रिज और एसी पर 5-6 फीसदी का असर
घरेलू उपकरणों पर प्रभाव ज्यादा गहरा होगा। टीवी, फ्रिज और एसी में प्लास्टिक पार्ट्स का व्यापक उपयोग होने से 5-6 फीसदी वृद्धि तय मानी जा रही है। डाइकिन और वोल्टास जैसी एसी कंपनियां 7-12 फीसदी तक बढ़ोतरी की चेतावनी दे चुकी हैं। तांबे की कीमतें बढ़ने से एसी और फ्रिज सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
जूते-पेंट पर 9-10 फीसदी उछाल
जूते, सिंथेटिक फाइबर कपड़े और डेकोरेटिव पेंट 9-10 फीसदी महंगे हो सकते हैं। ये सभी प्लास्टिक-आधारित हैं, इसलिए बढ़ोतरी अपरिहार्य है। रोजमर्रा की जरूरतों पर यह महंगाई सीधा असर डालेगी।
उपभोक्ताओं के लिए क्या करें?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्टॉक खत्म होने से पहले खरीदारी पूरी कर लें। ऊर्जा-कुशल मॉडल चुनें, जो लंबे समय में बिजली बिल बचाएंगे। बजट प्लानिंग जरूरी है, क्योंकि महंगाई का दौर लंबा खिंच सकता है। सरकार से राहत की उम्मीद कम है।









