
भारतीय रसोई में रोटी सिर्फ भोजन का हिस्सा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। लेकिन अगर आप अपनी साधारण गेहूं की रोटी को थोड़ा बदल दें और उसमें बेसन मिला दें, तो वही रोटी आपके शरीर के लिए हेल्थ बूस्टर बन सकती है। बेसन (चना आटा) और गेहूं का संयोजन न सिर्फ स्वाद बढ़ाता है, बल्कि इसे अधिक पौष्टिक और सेहतमंद भी बना देता है।
फाइबर और प्रोटीन से भरपूर रोटी
गेहूं के आटे में पहले से ही जटिल कार्बोहाइड्रेट और कुछ मात्रा में प्रोटीन मौजूद होते हैं। जब इसमें आप बेसन मिला देते हैं, तो इसकी प्रोटीन मात्रा और फाइबर कंटेंट दोनों बढ़ जाते हैं। यह संयोजन पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देता है।
बेसन में मौजूद फाइबर आंतों की गति सुधारता है, जिससे कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएँ कम होती हैं। वहीं प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और शरीर की विकास प्रक्रिया को सपोर्ट करता है।
वजन घटाने और नियंत्रण में मददगार
अगर आप वजन कम करने की सोच रहे हैं या कैलोरी को नियंत्रित रखना चाहते हैं, तो बेसन-मिश्रित गेहूं की रोटी एक बेहतरीन विकल्प है। यह रोटी देर तक पेट भरा रखती है, जिससे अनावश्यक खान-पान से बचाव होता है। बेसन में फाइबर की अधिक मात्रा पाचन को धीरे-धीरे करती है, जिससे कैलोरी रिलीज़ होने की गति कम होती है। इस वजह से ब्लड शुगर में अचानक वृद्धि नहीं होती और वजन प्रबंधन आसान बनता है।
ब्लड शुगर और डायबिटीज़ के लिए फायदेमंद
बेसन का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कम होता है, यानी यह शरीर में धीरे-धीरे ग्लूकोज छोड़ता है। इसलिए डायबिटीज़ के मरीज जो अपनी ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना चाहते हैं, उनके लिए गेहूं और बेसन की बनी रोटी एक बेहतर विकल्प है। यह इंसुलिन रेसिस्टेंस को कम करती है और दिनभर एनर्जी को स्थिर बनाए रखती है। इस कारण ऐसी रोटी खाने से थकान या कमजोरी महसूस नहीं होती, बल्कि शरीर तरोताज़ा रहता है।
दिल को स्वस्थ रखने में मददगार
बेसन और गेहूं, दोनों ही हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। इन दोनों में मौजूद फाइबर, मैग्नीशियम और पोटेशियम शरीर के खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करते हैं और ब्लड प्रेशर को संतुलित रखते हैं।
नियमित रूप से इस रोटी का सेवन करने से आर्टरीज़ साफ रहती हैं और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा घटता है। इसलिए यह रोटी खास तौर पर हृदय रोगियों और मध्यम आयु वर्ग के लोगों के लिए उपयोगी मानी जाती है।
प्रोटीन, मिनरल्स और विटामिन से भरपूर
गेहूं और बेसन दोनों ही पोषक तत्वों का खज़ाना हैं। इस रोटी में आयरन, जिंक, मैग्नीशियम, फोलेट और पोटेशियम जैसे आवश्यक मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर में खून की कमी को दूर करने के साथ मेटाबॉलिज़्म को सक्रिय रखते हैं।
इसके अलावा, इसमें विटामिन B कॉम्प्लेक्स और अमीनो एसिड होते हैं जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं, जिससे शरीर संक्रमणों से बेहतर तरीके से लड़ पाता है।
रोटी बनेगी ज़्यादा नरम और स्वादिष्ट
सिर्फ सेहत ही नहीं, स्वाद के मामले में भी बसन वाला यह प्रयोग शानदार है। गेहूं और बेसन का मिश्रण रोटी को हल्का नटी (nutty) फ्लेवर देता है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं। बेसन रोटी की बनावट को थोड़ा ज्यादा मुलायम और हल्का बना देता है। इसे खाने पर पेट भरा-भरा महसूस होता है, फिर भी रोटी भारी नहीं लगती।
कैसे बनाएं गेहूं-बेसन की पौष्टिक रोटी
इसे बनाना बेहद आसान है:
- एक बर्तन में गेहूं के आटे के साथ समान या अपनी पसंद के अनुसार बेसन मिलाएं (आमतौर पर 1:1 अनुपात काफी है)।
- थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए आटा गूंथ लें। ध्यान रखें, बेसन गेहूं की तुलना में पानी जल्दी सोखता है, इसलिए धीरे-धीरे पानी डालें।
- आटे को 10-15 मिनट तक ढककर रखें ताकि यह सेट हो जाए।
- अब सामान्य रोटी की तरह बेलकर तवे पर सेकें। चाहें तो उस पर हल्का घी लगा सकते हैं।
सावधानी और निष्कर्ष
हालांकि यह रोटी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, लेकिन अगर आपको ग्लूटेन एलर्जी, थायरॉयड या कोई गंभीर बीमारी है, तो अपने डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह जरूर लें। कुल मिलाकर, गेहूं और बेसन की रोटी स्वाद, पोषण और सेहत तीनों ही मामलों में एक बेहतरीन विकल्प है। यह न केवल रोज़मर्रा की थाली को बेहतर बनाती है, बल्कि शरीर को फिट और ऊर्जा से भरपूर भी रखती है।









