
सपनों का घर हर किसी का अभिमान होता है। अपना घर होना सिर्फ एक जरूरत नहीं, बल्कि जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है। लेकिन यह खुशी जिंदगी भर के लिए नुकसान का सबब बन सकती है, अगर प्रॉपर्टी खरीदते समय दस्तावेजों की बारीकी से जांच न की जाए। देश में प्रॉपर्टी फ्रॉड के मामले रोजाना सामने आ रहे हैं- फर्जी टाइटल डीड से लेकर छुपे लोन तक। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का रियल एस्टेट सेक्टर 2026 में 10 लाख करोड़ रुपये का बाजार है, जहां धोखाधड़ी से सालाना हजारों खरीदार फंसते हैं।
घर खरीदना वर्षों की बचत और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। यह स्थिरता और परिवार के भविष्य की गारंटी देता है। लेकिन सही लोकेशन या कीमत चुनने से कहीं आगे की सावधानी बरतनी पड़ती है। एक छोटी लापरवाही कानूनी विवाद, कोर्ट केस या बैंक के कब्जे का कारण बन सकती है। उदाहरण के तौर पर, दिल्ली-एनसीआर में हाल ही में 50 से ज्यादा मामले सामने आए, जहां खरीदारों को फर्जी एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट के चलते लाखों का नुकसान हुआ। इसलिए, डील फाइनल करने से पहले हर कागजात को लीगल एक्सपर्ट से वेरिफाई करवाएं।
मुख्य दस्तावेज जो जांचना अनिवार्य
टाइटल डीड (Title Deed): यह प्रॉपर्टी के वैध मालिकाना हक का प्रमाण है। जांचें कि विक्रेता का नाम साफ हो और चेन ऑफ टाइटल (पिछले मालिकों का इतिहास) में कोई विवाद न हो। सब-रजिस्ट्रार ऑफिस से मूल कॉपी लें। असली टाइटल न होने पर स्वामित्व चुनौती दी जा सकती है।
एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC): पिछले 13-30 सालों का रिकॉर्ड लें। यह बताता है कि प्रॉपर्टी पर लोन, मॉर्गेज या कोर्ट केस तो नहीं। दिल्ली में MC या DDA से सत्यापन जरूरी। छुपा कर्ज होने पर बैंक खरीदार पर थोप सकता है।
सेल एग्रीमेंट और सेल डीड: एग्रीमेंट में कीमत, भुगतान शर्तें, कब्जा तारीख और जिम्मेदारियां लिखी हों। सेल डीड रजिस्टर्ड हो, जिसमें प्रॉपर्टी का सटीक विवरण हो। बिना रजिस्ट्रेशन के ट्रांसफर अमान्य।
अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लान, CC और OC: लोकल अथॉरिटी से मंजूर प्लान चेक करें। कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (CC) निर्माण पूरा होने का प्रमाण, जबकि ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) रहने योग्य होने का। बिना इनके बिजली-पानी कनेक्शन रुक सकता है।
प्रॉपर्टी टैक्स रसीदें और म्यूटेशन एंट्री: सभी ड्यू टैक्स क्लियर हों। म्यूटेशन से सरकारी रिकॉर्ड में विक्रेता का नाम दर्ज होना चाहिए। बकाया टैक्स खरीदार को चुकाना पड़ सकता है।
अतिरिक्त जरूरी कागजात
नई प्रोजेक्ट्स के लिए RERA रजिस्ट्रेशन अनिवार्य। NOC (अग्निशमन, पर्यावरण, बिजली) और पजेशन लेटर लें। पुराना लोन हो तो क्लोजर सर्टिफिकेट मांगें। ये सुनिश्चित करते हैं कि कोई छुपा दावा न हो। 2026 में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन सख्त हो गया है। डिजिटल वेरिफिकेशन और Aadhaar लिंकिंग जरूरी। होम लोन ले रहे हैं तो बैंक का लीगल चेक इस्तेमाल करें। वकील या प्रॉपर्टी कंसल्टेंट से 5-10 हजार में जांच करवाएं। इससे फ्रॉड से 100% बचाव।









