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Union Budget 2026: पेट्रोल और डीजल होंगे GST के तहत, बजट के बाद कीमतों में आएगी बड़ी गिरावट

क्या 1 फरवरी को पेट्रोल-डीजल के दाम ₹20-25 तक गिर जाएंगे? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट 2026 में ईंधन को GST के दायरे में लाने का मास्टरस्ट्रोक खेल सकती हैं। इस ऐतिहासिक बदलाव और आपकी जेब पर पड़ने वाले असर की पूरी कैलकुलेशन यहाँ देखें।

By Pinki Negi

Union Budget 2026: पेट्रोल और डीजल होंगे GST के तहत, बजट के बाद कीमतों में आएगी बड़ी गिरावट
Union Budget 2026

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट में आम आदमी को बड़ी राहत दे सकती हैं। काफी समय से चली आ रही मांग को देखते हुए, सरकार पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दायरे में लाने का ऐतिहासिक ऐलान कर सकती है। वर्तमान में, अलग-अलग राज्यों में टैक्स की वजह से पेट्रोल ₹95-105 और डीजल ₹88-96 प्रति लीटर के करीब बिक रहा है। यदि इन ईंधनों पर GST लागू होता है, तो देशभर में इनकी कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है और आम जनता को महंगाई से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

क्यों अलग-अलग शहरों में बदल जाते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

वर्तमान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों के पीछे टैक्स का एक जटिल ढांचा है। जब आप तेल खरीदते हैं, तो उस पर केंद्र सरकार ‘एक्साइज ड्यूटी’ और राज्य सरकारें ‘वैट’ (VAT) लगाती हैं। चूंकि हर राज्य में वैट की दरें अलग-अलग होती हैं, इसीलिए दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों की कीमतों में बड़ा अंतर दिखाई देता है। हालांकि देश में जीएसटी लागू है, लेकिन पेट्रोलियम उत्पादों को फिलहाल इससे बाहर रखा गया है। अगर सरकार इन्हें जीएसटी के दायरे में ले आती है, तो राज्यों का वैट खत्म हो जाएगा और पूरे देश में तेल की कीमतें एक समान और काफी कम हो सकती हैं।

क्या खत्म होगा पेट्रोल-डीजल का अंतर?

अगर 1 फरवरी के बजट में पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाने का फैसला होता है, तो सबसे बड़ा बदलाव कीमतों में एकरूपता के रूप में दिखेगा। यानी पूरे देश में तेल के दाम लगभग एक जैसे हो जाएंगे। याद दिला दें कि जब 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू हुआ था, तब राजस्व की स्थिरता बनाए रखने के लिए पेट्रोल और डीजल को इससे अस्थायी रूप से बाहर रखा गया था। हालांकि, उस समय भी यह योजना थी कि भविष्य में इन्हें इस व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। अब 9 साल बाद, आम जनता को उम्मीद है कि सरकार इस पुराने वादे को पूरा कर तेल की कीमतों में बड़ी राहत देगी।

जीएसटी के स्लैब और तेल की कीमतें

जीएसटी (GST) की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह ‘टैक्स पर टैक्स’ (कैस्केडिंग इफ़ेक्ट) को खत्म कर देता है, जिससे उत्पादों की अंतिम कीमत कम हो जाती है। यदि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल किया जाता है, तो वर्तमान में लगने वाले कई अन्य टैक्स हट जाएंगे।

हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन्हें किस स्लैब में रखा जाएगा। वर्तमान में जीएसटी के मुख्य स्लैब 5%, 12%, 18% और 28% हैं (अधिकतम दर उपकर के साथ बढ़ सकती है)। अगर सरकार इन्हें सबसे ऊंचे स्लैब में भी रखती है, तब भी वर्तमान टैक्स (जो कई राज्यों में 50% से ऊपर है) के मुकाबले कीमतें काफी गिर सकती हैं।

पेट्रोल-डीजल की कीमत के 4 मुख्य आधार

आप जो पेट्रोल-डीजल की कीमत चुकाते हैं, वह इन चार हिस्सों को जोड़कर बनती है:

  • बेसिक कीमत (Base Price): इसमें कच्चे तेल (Crude Oil) को रिफाइन करने की लागत और उसे डिपो तक पहुँचाने का भाड़ा शामिल होता है।
  • डीलर कमीशन (Dealer Commission): पेट्रोल पंप के मालिक को तेल बेचने के बदले मिलने वाला हिस्सा, जो प्रति लीटर के हिसाब से जुड़ता है।
  • एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty): यह केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला टैक्स है, जो पूरे देश में एक समान रहता है।
  • वैट (VAT): यह राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला टैक्स है। हर राज्य की अपनी दरें होने के कारण ही अलग-अलग शहरों में कीमतें अलग होती हैं।

GST के दायरे में ईंधन: फायदे और चुनौतियाँ

  • कीमतों में भारी गिरावट: जीएसटी लागू होते ही वर्तमान में लगने वाली ‘एक्साइज ड्यूटी’ और ‘वैट’ (VAT) खत्म हो जाएंगे, जिससे पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम काफी कम हो सकते हैं।
  • महंगाई से राहत: ईंधन सस्ता होने से माल ढुलाई (Logistics) और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कम होगा, जिससे फल, सब्जी और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें भी नीचे आएंगी।
  • एक देश, एक रेट: पूरे भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक समान हो जाएंगी, जिससे राज्यों के बीच रेट का अंतर खत्म होगा।
  • राज्यों की सहमति की चुनौती: इस बदलाव के लिए सभी राज्यों की मंजूरी अनिवार्य है। कई राज्य सरकारें इसका विरोध कर रही हैं क्योंकि तेल पर लगने वाला वैट उनकी कमाई (Revenue) का एक बड़ा जरिया है।
  • राजस्व का नुकसान: राज्यों को डर है कि जीएसटी के तहत आने से उनका कर संग्रह कम हो जाएगा, जिसकी भरपाई कैसे होगी, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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