
डायबिटीज कोई रातों-रात होने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर में पांच अलग-अलग चरणों में धीरे-धीरे पनपती है। डॉ. शालिनी सिंह सोलंकी के अनुसार, हमारा शरीर हर स्टेज पर कुछ खास संकेत देता है जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। सबसे राहत की बात यह है कि यदि इस बीमारी को शुरुआती तीन चरणों में ही पहचान लिया जाए, तो इसे न केवल कंट्रोल किया जा सकता है, बल्कि सही खान-पान और अच्छी जीवनशैली से पूरी तरह ‘रिवर्स’ (ठीक) भी किया जा सकता है। लेकिन सावधानी जरूरी है, क्योंकि आखिरी चरणों में पहुँचने पर यह शरीर के अंगों को नुकसान पहुँचाना शुरू कर देती है, जहाँ से वापसी मुश्किल हो जाती है।
स्टेज 1 (इंसुलिन रेजिस्टेंस)
डायबिटीज की पहली स्टेज को ‘इंसुलिन रेजिस्टेंस’ कहा जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस स्टेज में आपकी ब्लड शुगर रिपोर्ट बिल्कुल नॉर्मल आती है, लेकिन अंदर ही अंदर आपका मेटाबॉलिज्म धीमा होने लगता है। अगर आपको खाना खाने के तुरंत बाद बहुत ज्यादा नींद आती है, शरीर में भारीपन महसूस होता है या दिमाग में धुंधलापन (ब्रेन फॉग) रहता है, तो समझ लीजिए कि आपका शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। यह वह शुरुआती चेतावनी है जहाँ सचेत होकर आप भविष्य के बड़े खतरे को टाल सकते हैं।
स्टेज 2 (प्री-डायबिटीज)
दूसरी स्टेज ‘प्री-डायबिटीज’ वह मोड़ है जहाँ आपकी ब्लड शुगर रिपोर्ट में गड़बड़ी दिखने लगती है। इस दौरान खाली पेट शुगर (Fasting Sugar) 100 से ऊपर और HbA1c का लेवल 5.7 से 6.4 के बीच पहुँच जाता है। इसका सबसे स्पष्ट बाहरी संकेत पेट के आसपास बढ़ती चर्बी (Belly Fat) है। अच्छी खबर यह है कि पहली और दूसरी स्टेज में डायबिटीज को सिर्फ अनुशासन, सही डाइट और थोड़ी एक्सरसाइज से पूरी तरह ‘रिवर्स’ यानी जड़ से खत्म किया जा सकता है। यह आपके पास बिना दवा के ठीक होने का सबसे बेहतरीन मौका होता है।
स्टेज 3 (अर्ली डायबिटीज)
यह ‘अर्ली डायबिटीज’ का चरण है, जहाँ आपकी ब्लड शुगर का स्तर खतरनाक सीमा को पार करने लगता है। इस स्टेज में फास्टिंग शुगर 126 से ऊपर और HbA1c 6.5 के पार पहुँच जाती है। अब आपका शरीर साफ़ तौर पर चिल्ला-चिल्लाकर संकेत देने लगता है, जैसे अचानक बार-बार भूख लगना या रात में कई बार पेशाब आना।
डॉक्टर शालिनी के अनुसार, यह वह अंतिम पड़ाव है जहाँ से आप अपनी सेहत को वापस सामान्य स्थिति में ला सकते हैं। अगर यहाँ आप एक सख्त डाइट चार्ट और सक्रिय जीवनशैली अपना लेते हैं, तो इसे अब भी पूरी तरह ‘रिवर्स’ करना मुमकिन है।
स्टेज 4 (अनकंट्रोल डायबिटीज)
डायबिटीज की चौथी स्टेज वह खतरनाक स्थिति है जहाँ बीमारी ‘अनकंट्रोल’ हो जाती है। इस स्तर पर केवल दवाएं भी शुगर को पूरी तरह काबू में नहीं रख पातीं। इसका सबसे बड़ा संकेत तंत्रिकाओं (Nerves) पर बुरा असर पड़ना है, जिससे पैरों में झनझनाहट, जलन या सुन्नपन महसूस होने लगता है। सबसे जरूरी बात यह है कि एक बार डायबिटीज इस स्टेज तक पहुँच जाए, तो इसे पूरी तरह ‘रिवर्स’ करना या ठीक करना लगभग असंभव हो जाता है। यहाँ से सारा ध्यान केवल बीमारी को और ज्यादा बिगड़ने से रोकने पर केंद्रित करना पड़ता है।
स्टेज 5 (कॉम्प्लिकेटेड डायबिटीज)
डायबिटीज की पांचवीं स्टेज को ‘कॉम्प्लिकेटेड डायबिटीज’ कहा जाता है। यह वह स्थिति है जब कई वर्षों तक शुगर लेवल हाई रहने के कारण शरीर के महत्वपूर्ण अंग जैसे किडनी, आंखें और दिल प्रभावित होने लगते हैं। इस स्टेज पर पहुँचकर डायबिटीज को पूरी तरह ठीक (Reverse) करना नामूमकिन हो जाता है। यहाँ डॉक्टर का मुख्य उद्देश्य केवल बीमारी को मैनेज करना और अंगों को और ज्यादा नुकसान पहुँचने से बचाना होता है। यह चरण हमें याद दिलाता है कि शुरुआती संकेतों को पहचानना और समय पर इलाज शुरू करना कितना जरूरी है।
शुरुआती संकेतों को पहचानकर चुनें एक स्वस्थ भविष्य
डायबिटीज का यह सफर हमें एक महत्वपूर्ण सबक देता है—शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को नजरअंदाज करना बहुत भारी पड़ सकता है। यह बीमारी एक ‘साइलेंट किलर’ है, लेकिन अच्छी बात यह है कि इसका इलाज आपके हाथ में है।
यदि आप पहले तीन चरणों में अपनी स्थिति पहचान लेते हैं, तो आज ही अपनी जीवनशैली और खान-पान में सुधार करके आप खुद को पूरी तरह रोग मुक्त कर सकते हैं। समय-समय पर ब्लड टेस्ट करवाना और विशेषज्ञों की सलाह मानना ही इस बीमारी को हराने का एकमात्र तरीका है। याद रखें, आपकी आज की सतर्कता ही आपके कल के स्वास्थ्य की गारंटी है।









