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Type-1 Diabetes: शुगर के मरीजों के लिए चमत्कार! अब एक इंजेक्शन से ठीक होगी लाइलाज बीमारी? वैज्ञानिकों ने किया बड़ा खुलासा

टाइप‑1 डायबिटीज को अभी भी लाइलाज माना जाता है, लेकिन नई जीन‑थेरेपी जैसे KRIYA‑839 ने उम्मीद जगाई है कि एक सिंगल इंजेक्शन से शरीर की मांसपेशियों को लंबे समय तक इंसुलिन बनाने वाली फैक्ट्री में बदला जा सकता है, जिससे रोजमर्रा के इंजेक्शन की ज़रूरत कम हो। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह थेरेपी वादा करती है, लेकिन अभी यह मानव परीक्षण के शुरुआती चरण में है और आज के लिए जीवनभर इंसुलिन और सख्त मैनेजमेंट ही व्यवहार्य रास्ता है।

By Pinki Negi

Type-1 Diabetes: शुगर के मरीजों के लिए चमत्कार! अब एक इंजेक्शन से ठीक होगी लाइलाज बीमारी? वैज्ञानिकों ने किया बड़ा खुलासा

दुनियाभर में डायबिटीज एक सामान्य बीमारी से धीरे‑धीरे महामारी बनती जा रही है, और हर उम्र के लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। अगर टाइप‑2 डायबिटीज वयस्कों में सबसे ज्यादा देखी जाती है, तो टाइप‑1 डायबिटीज बच्चों और किशोरों में इस बीमारी की भयानक पहचान बन चुकी है। इन दिनों सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों पर वायरल हो रही “एक इंजेक्शन से टाइप‑1 डायबिटीज ठीक हो जाएगी” तरह की खबरों ने मरीजों और उनके परिजनों के मन में उम्मीद की नई लहर दौड़ा दी है। लेकिन सवाल यह है कि यह वाकई “चमत्कार” है या बस वैज्ञानिक शोध का शुरुआती चरण?

टाइप‑1 डायबिटीज क्या है?

टाइप‑1 डायबिटीज, एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की ही प्रतिरक्षा प्रणाली अग्न्याशय की इंसुलिन‑बनाने वाली बीटा कोशिकाओं पर हमला कर देती है। जब ये कोशिकाएँ खत्म हो जाती हैं, तो शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है और ब्लड शुगर सीधे आसमान की ओर भागता है। इसके इलाज का अभी तक एक ही व्यावहारिक तरीका है – जीवनभर इंसुलिन इंजेक्शन, ऑटो‑पंप या सीजीएम जैसी नई तकनीकों के ज़रिए शुगर को कंट्रोल में रखना। बार‑बार जांच, सख्त आहार, और इंसुलिन से अलग न हो पाने की जिंदगी इन मरीजों की दिनचर्या बन चुकी है।

“एक इंजेक्शन से इंसुलिन बनाने वाली फैक्ट्री”

अब इसी ज़िंदगी को बदलने की दिशा में नया मोड़ वैज्ञानिकों ने दिखाया है। “इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज एंड ट्रीटमेंट्स फॉर डायबिटीज” में पेश की गई एक नई रिसर्च में वैज्ञानिक कह रहे हैं कि टाइप‑1 डायबिटीज के लिए एक ऐसी जीन‑थेरेपी विकसित हो रही है जो शरीर की अपनी ही मांसपेशियों को इंसुलिन फैक्ट्री में बदल सकती है।

एक बार दिया गया इंजेक्शन शायद कई वर्षों, या फिर दशकों तक मांसपेशियों की कोशिकाओं को इंसुलिन और अन्य ग्लूकोज‑कंट्रोलिंग प्रोटीन बनाने लगा सकता है। इसका मतलब – रोजाना इंसुलिन इंजेक्शन लेने की ज़रूरत समाप्त हो सकती है, जो आज तक टाइप‑1 डायबिटीज मरीजों के लिए असंभव सा लगता था।

KRIYA‑839 थेरेपी

इस नई थेरेपी का नाम KRIYA‑839 है, जो इंसुलिन डिलीवरी डिवाइस या ट्रांसप्लांट से अलग दिशा लेकर चल रही है। शोधकर्ता स्पष्ट करते हैं कि यह जीन‑एडिटिंग नहीं है; यानी यह व्यक्ति के डीएनए में सीधा बदलाव नहीं करता, बल्कि दिए गए सिंगल इंजेक्शन से मांसपेशियों की कोशिकाओं में एक जेनेटिक सिग्नल पहुँचाकर उन्हें नियंत्रित तरीके से इंसुलिन बनाने की क्षमता देता है। जानवरों पर किए गए प्रारंभिक ट्रायल में दिखा है कि यह थेरेपी लगभग चार साल तक बिना इम्यून‑सप्रेशन दवाओं के काम करती रही। अब पहली बार इसे इंसानों पर परीक्षण के चरण में ले जाया जा रहा है, खास तौर पर उन वयस्क टाइप‑1 डायबिटीज मरीजों पर जिनका शुगर पहले से ही ऑटोमेटेड इंसुलिन डिलीवरी सिस्टम से भी ठीक तरह नहीं संभाला जा रहा।

वैज्ञानिकों की उम्मीद और सावधानी

वैज्ञानिक और डॉक्टर इस दिशा में उत्साहित हैं, लेकिन उनका संदेश साफ है – यह अभी तक “चमत्कार” नहीं, बल्कि एक उम्मीद भरी शोध है। इंग्लैंड की नेशनल हेल्थ सर्विस के डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. पार्थ कर कहते हैं कि यह तरीका टाइप‑1 डायबिटीज को ‘पूरी तरह ठीक’ करने की क्षमता रखता है, लेकिन इसकी लंबी अवधि वाली सफलता और सुरक्षा अभी ज्यादा जांच के बाद ही पुष्ट होगी।

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट प्रोफेसर जेरेमी पेटस का मानना है कि यह थेरेपी डायबिटीज रोगियों के लिए एक नया दौर ला सकती है, जबकि स्लोवेनिया के यूसीएच‑यूएमसी, लुब्लियाना के एंडोक्रिनोलॉजी प्रमुख डॉ. तादेज बैटेलिनो ने साफ किया है कि अभी ज़रूरी है कि यह थेरेपी लंबे समय तक ब्लड शुगर को नॉर्मल रेंज में रख पाने में कितनी सफल होती है, यह जांच अभी चलेगी।

भविष्य की उम्मीद और आज की ज़िम्मेदारी

इस बीच, भारत सहित दुनियाभर में स्टेम‑सेल और अन्य नई थेरेपी पर भी रिसर्च जारी है, जो इंसुलिन डिपेंडेंसी कम करने पर फोकस करती है, न कि तुरंत “क्यूर” का दावा करती है। इस कारण डॉक्टर और मरीजों से यह अपील है कि नई रिसर्च की ओर आशावादी तो ज़रूर रहें, लेकिन आज के लिए भी जीवनभर के लिए तैयार डायबिटीज मैनेजमेंट प्लान, नियमित इंसुलिन, स्वास्थ्यवर्धक आहार और निगरानी पर ध्यान बनाए रखना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

टाइप‑1 डायबिटीज का सच्चा “इलाज” अभी भी वैज्ञानिक प्रयोगों के पड़ाव में है, लेकिन कम से कम अब यह निश्चित है कि भविष्य में शायद रोजाना इंसुलिन इंजेक्शन की ज़िंदगी भी धीरे‑धीरे पुरानी दुनिया की बात बन सकती है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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