
भारत सरकार और यातायात विभाग ने अब ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और चालान के भुगतान को लेकर बेहद सख्त रुख अपना लिया है। अगर आपका भी कोई चालान कटा है और आप उसे हल्के में ले रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। अब देरी करने पर सिर्फ जुर्माना नहीं, बल्कि जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।
चालान भरने में देरी अब पड़ेगी महंगी
यातायात विभाग के नए डिजिटल सिस्टम के तहत अब चालान की मॉनिटरिंग रीयल-टाइम में हो रही है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि चालान कटने के बाद उसे एक निश्चित समय सीमा के भीतर भरना अनिवार्य है।
90 दिनों की ‘डेडलाइन’ का नियम
नियमों के मुताबिक, यदि आपका ई-चालान (E-Challan) कटता है, तो आपको उसे भरने के लिए अधिकतम 90 दिनों का समय दिया जाता है।
- पहले 60 दिन: आप सामान्य रूप से ऑनलाइन या ट्रैफिक पुलिस ऑफिस जाकर जुर्माना भर सकते हैं।
- 60 से 90 दिन: इस अवधि के बाद आपको रिमाइंडर भेजे जाते हैं और जुर्माना राशि पर लेट फीस भी लग सकती है।
- 90 दिनों के बाद: यदि 90 दिनों के भीतर चालान का भुगतान नहीं किया गया, तो मामले को सीधे ‘वर्चुअल कोर्ट’ (Virtual Court) या संबंधित क्षेत्र की अदालत में भेज दिया जाता है।
कोर्ट केस और जेल की कार्रवाई
एक बार चालान कोर्ट में चला गया, तो मामला गंभीर हो जाता है:
- गैर-जमानती वारंट: बार-बार नोटिस के बाद भी कोर्ट में पेश न होने या चालान न भरने पर वाहन मालिक के खिलाफ वारंट जारी किया जा सकता है।
- जेल की सजा: गंभीर उल्लंघन (जैसे शराब पीकर गाड़ी चलाना या खतरनाक ड्राइविंग) और चालान न भरने की स्थिति में 3 से 6 महीने तक की जेल का प्रावधान है।
- वाहन का ज़ब्ती: पुलिस आपके वाहन को ज़ब्त (Impound) कर सकती है और जब तक सारे पुराने चालान क्लियर नहीं होते, गाड़ी नहीं छोड़ी जाएगी।
ब्लैक लिस्ट हो सकती है आपकी गाड़ी
अगर आपके नाम पर कई चालान पेंडिंग हैं, तो परिवहन विभाग आपके वाहन को ‘ब्लैक लिस्ट’ में डाल सकता है। इसके बाद आप:
- अपनी गाड़ी का इंश्योरेंस (Insurance) रिन्यू नहीं करा पाएंगे।
- गाड़ी को किसी दूसरे के नाम ट्रांसफर या बेच नहीं सकेंगे।
- फिटनेस सर्टिफिकेट या पॉल्यूशन (PUC) बनवाने में दिक्कत आएगी।









