
अगर आपके वाहन पर लंबे समय से ट्रैफिक चालान लंबित हैं और आप भारी जुर्माने की राशि के कारण उन्हें नहीं भर पा रहे हैं, तो आपके लिए राहत भरी खबर है। न्याय विभाग और कानूनी सेवा प्राधिकरण ने साल 2026 के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का कैलेंडर जारी कर दिया है। साल की पहली लोक अदालत 14 मार्च 2026 को आयोजित की जाएगी।
लोक अदालत न केवल अदालतों का बोझ कम करने का माध्यम है, बल्कि आम आदमी के लिए अपने छोटे-मोटे विवादों और चालानों को आपसी सहमति से ‘जीरो’ या नाममात्र के जुर्माने पर खत्म करने का सबसे बड़ा मंच भी है।
2026 का कैलेंडर, इन तारीखों को कर लें मार्क
विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के अनुसार, इस वर्ष चार चरणों में लोक अदालतों का आयोजन होगा:
- प्रथम लोक अदालत: 14 मार्च 2026
- द्वितीय लोक अदालत: 09 मई 2026
- तृतीय लोक अदालत: 12 सितंबर 2026
- चतुर्थ (अंतिम) लोक अदालत: 12 दिसंबर 2026
इन गलतियों पर मिल सकती है 100% तक छूट
लोक अदालत में मुख्य रूप से उन चालानों का निपटारा किया जाता है जो ‘कंपाउंडेबल’ (Compoundable) यानी शमनीय अपराध की श्रेणी में आते हैं। इनमें शामिल हैं:
- बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के ड्राइविंग।
- रेड लाइट जंप करना या गलत साइड ड्राइविंग।
- गलत पार्किंग या नो-एंट्री क्षेत्र में प्रवेश।
- ओवरस्पीडिंग (अति-गति) के साधारण मामले।
गंभीर अपराधों में कोई राहत नहीं
कानूनी जानकारों का कहना है कि लोक अदालत का मतलब यह कतई नहीं है कि हर तरह की गलती माफ होगी। शराब पीकर गाड़ी चलाना (Drunk and Drive), बिना इंश्योरेंस के वाहन चलाना (कुछ मामलों को छोड़कर), और ऐसे मामले जिनसे गंभीर दुर्घटना हुई हो, उन्हें लोक अदालत में नहीं सुलझाया जा सकता। ऐसे मामलों के लिए नियमित कोर्ट की प्रक्रिया का ही पालन करना होगा।
स्लॉट बुकिंग और प्रक्रिया
लोक अदालत में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अब अधिकांश राज्यों (जैसे दिल्ली, यूपी, हरियाणा) में ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग अनिवार्य कर दी गई है।
- ऑनलाइन पोर्टल: अदालत की तारीख से लगभग एक हफ्ते पहले ट्रैफिक पुलिस या कानूनी सेवा प्राधिकरण की वेबसाइट पर लिंक एक्टिव होता है।
- डाउनलोड स्लिप: आपको अपने वाहन नंबर या चालान नंबर के जरिए स्लॉट बुक करना होगा और उसकी रसीद का प्रिंट आउट लेना होगा।
- भौतिक उपस्थिति: निर्धारित तिथि और कोर्ट रूम नंबर पर पहुंचकर जज के सामने अपनी बात रखनी होती है। आपसी सहमति के बाद जज जुर्माने की राशि कम करने या माफ करने का आदेश देते हैं।
अंतिम और सर्वमान्य फैसला
लोक अदालत की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि यहाँ दिए गए फैसले के खिलाफ किसी भी ऊपरी अदालत में अपील नहीं की जा सकती। यह फैसला आपसी रजामंदी से होता है, इसलिए इसे ‘सिविल कोर्ट’ की डिक्री के बराबर माना जाता है। एक बार यहाँ चालान सेटल हो गया, तो वह हमेशा के लिए रिकॉर्ड से हट जाता है।









