
अगर आप किसी ऐसे देश में जाकर बसना चाहते हैं जहाँ हवा और पानी साफ हो, इलाज की बेहतरीन सुविधाएँ मिलें और लोग लंबी उम्र जीते हों, तो हाल ही में जारी हुई ग्लोबल हेल्थ इंडेक्स की रिपोर्ट आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकती है। इस रिपोर्ट में दुनिया के तमाम देशों को वहां के हेल्थ केयर सिस्टम, प्रदूषण के स्तर और लाइफस्टाइल के आधार पर रैंक किया गया है। अंतरराष्ट्रीय मानकों पर तैयार की गई इस लिस्ट से साफ होता है कि किन देशों में रहना आपकी सेहत के लिए सबसे अच्छा है। आइए जानते हैं दुनिया के टॉप 5 सबसे हेल्दी देशों के नाम और इस लिस्ट में भारत को कौन सा स्थान मिला है।
नॉर्वे
ग्लोबल हेल्थ इंडेक्स में नॉर्वे को दुनिया के सबसे हेल्दी देश का खिताब मिला है। यहाँ के लोग औसतन 83.46 साल तक जीते हैं, जिसका श्रेय यहाँ की शुद्ध हवा, प्रदूषण मुक्त वातावरण और दुनिया के सबसे बेहतरीन हेल्थ केयर सिस्टम को जाता है। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो अपनी हरियाली के लिए पूरे यूरोप में प्रसिद्ध है। यहाँ की सबसे खास बात यह है कि लोग मशीनों के बजाय पैदल चलना, साइक्लिंग करना और प्रकृति के बीच समय बिताना ज्यादा पसंद करते हैं। नॉर्वे की यही एक्टिव लाइफस्टाइल और साफ-सुथरा माहौल इसे रहने के लिए दुनिया की सबसे बेहतरीन जगह बनाता है।
स्विट्जरलैंड
ग्लोबल हेल्थ इंडेक्स में स्विट्जरलैंड ने दूसरा स्थान हासिल किया है, जहाँ लोगों की औसत उम्र 84 साल से भी अधिक है। यहाँ की सबसे बड़ी खूबी इसका ‘अनिवार्य हेल्थ इंश्योरेंस सिस्टम’ है, जो यह सुनिश्चित करता है कि देश के हर नागरिक को उच्च गुणवत्ता वाली बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलें। यहाँ डॉक्टरों और नर्सों की उपलब्धता विश्व में सबसे बेहतर स्तर पर है। प्रदूषण मुक्त वातावरण और काम-काज के साथ संतुलित जीवनशैली (Work-Life Balance) स्विट्जरलैंड को दुनिया के सबसे सेहतमंद और रहने योग्य देशों की श्रेणी में शीर्ष पर रखती है।
फिनलैंड
ग्लोबल हेल्थ इंडेक्स में फिनलैंड को तीसरा स्थान मिला है। इस देश की सबसे बड़ी ताकत यहाँ का विशाल हरित क्षेत्र (Green Area) और बेहद शुद्ध हवा है, जो यूरोप के अधिकांश देशों की तुलना में काफी बेहतर मानी जाती है। हालांकि, यहाँ शराब और तंबाकू के सेवन जैसी कुछ स्वास्थ्य चुनौतियां जरूर रही हैं, लेकिन फिनलैंड की सरकार ने अपनी सख्त नीतियों और बड़े स्तर पर चलाए गए जागरूकता अभियानों से इन पर काफी हद तक काबू पा लिया है। बेहतरीन पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति सरकारी सजगता ही फिनलैंड को दुनिया के सबसे फिट देशों की लिस्ट में बनाए रखती है।
ऑस्ट्रेलिया
ग्लोबल हेल्थ इंडेक्स में ऑस्ट्रेलिया अपनी शानदार जीवनशैली के कारण प्रमुख स्थान रखता है। यहाँ के लोग सक्रिय रहना पसंद करते हैं और उनकी दिनचर्या मुख्य रूप से आउटडोर गतिविधियों पर आधारित होती है। ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी ताकत इसका ‘मेडिकेयर’ (Medicare) नामक सार्वजनिक स्वास्थ्य सिस्टम है, जो नागरिकों और स्थायी निवासियों को बहुत ही सस्ती और सुलभ चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करता है। सरकार द्वारा चलाए जाने वाले प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों और स्वच्छ वातावरण की वजह से यहाँ औसत जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) 84 साल के करीब है।
स्वीडन
ग्लोबल हेल्थ इंडेक्स में स्वीडन दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शामिल है। यहाँ की सबसे बड़ी खूबी इसका ‘यूनिवर्सल हेल्थकेयर सिस्टम’ है, जिसके तहत स्वास्थ्य सुविधाओं पर सरकार अपनी जीडीपी (GDP) का एक बहुत बड़ा हिस्सा खर्च करती है। स्वीडन में लोगों को न केवल बेहतरीन इलाज मिलता है, बल्कि यहाँ की साफ हवा और सक्रिय जीवनशैली (Active Lifestyle) भी लोगों को बीमारियों से दूर रखने में मदद करती है। स्वीडिश लोग प्रकृति के साथ जुड़ाव और शारीरिक गतिविधि को बहुत महत्व देते हैं, जो उन्हें लंबी और स्वस्थ जिंदगी प्रदान करता है।
भारत और पाकिस्तान के लिए चुनौतियाँ और सबसे पिछड़े देशों की स्थिति
ग्लोबल हेल्थ इंडेक्स 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और पाकिस्तान जैसे देश दुनिया के टॉप-10 या टॉप-20 सबसे सेहतमंद देशों की सूची में जगह नहीं बना पाए हैं। विकसित देशों की तुलना में यहाँ के कमजोर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण प्रदूषण और कम जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) जैसी समस्याएँ एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। दूसरी ओर, इस इंडेक्स में सबसे निचले पायदान पर सोमालिया, उत्तर कोरिया और तिमोर-लेस्ते जैसे देश शामिल हैं। इन देशों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी और सीमित संसाधनों के कारण नागरिकों को बेहतर इलाज और स्वस्थ जीवनशैली के लिए संघर्ष करना पड़ता है।









