Tags

Mobile Tech Facts: फोन का पावर बटन हमेशा ‘Right Side’ ही क्यों होता है? वजह जानकर कहेंगे- पहले क्यों नहीं सोचा!

लगभग हर फोन का पावर बटन दाईं तरफ ही क्यों? 90% दाएं हाथ के यूजर्स के लिए अंगूठे की आसान पहुंच, एक हाथ इस्तेमाल और हार्डवेयर डिजाइन की मजबूरी। इंडस्ट्री स्टैंडर्ड बन चुका यह फीचर स्क्रीनशॉट से फिंगरप्रिंट तक सुविधा देता- टेक का गहरा विज्ञान!

By Pinki Negi

Mobile Tech Facts: फोन का पावर बटन हमेशा 'Right Side' ही क्यों होता है? वजह जानकर कहेंगे- पहले क्यों नहीं सोचा!

आज के स्मार्टफोन यूजर्स के हाथों में जो चमकदार गैजेट्स हैं, उनके डिजाइन का हर कोना सोच-समझकर बनाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया कि लगभग हर फोन का पावर बटन दाईं तरफ ही क्यों होता है? यह कोई संयोग नहीं, बल्कि इर्गोनॉमिक्स, ह्यूमन बिहेवियर और इंजीनियरिंग का कमाल है। दुनिया भर के बिलियन्स यूजर्स के आराम को ध्यान में रखते हुए कंपनियां इस स्टैंडर्ड को फॉलो करती हैं, जो अब इंडस्ट्री का अनकहा नियम बन चुका है।

दाएं हाथ का प्राकृतिक फायदा

दुनिया की करीब 90 प्रतिशत आबादी दाएं हाथ की होती है। जब कोई व्यक्ति फोन को दाएं हाथ से पकड़ता है, तो अंगूठा स्वाभाविक रूप से दाईं साइड पर टिक जाता है। इस पोजिशन में पावर बटन दबाना सबसे आसान और तेज होता है। बड़े स्क्रीन वाले आज के फोन्स- जैसे 6.7 इंच डिस्प्ले वाले फ्लैगशिप्स- में एक हाथ से ऑपरेट करना चुनौती बन गया है।

अगर बटन ऊपर की तरफ होता, तो दूसरा हाथ इस्तेमाल करना पड़ता, जो असुविधाजनक होता। दाईं तरफ होने से यूजर मजबूती से फोन ग्रिप कर पावर बटन, वॉल्यूम या लॉक एक झटके में हैंडल कर लेता है। पुराने छोटे नोकिया या ब्लैकबेरी में बटन टॉप पर ठीक था, लेकिन स्मार्टफोन क्रांति के बाद साइड माउंटिंग जरूरी हो गई।

हार्डवेयर डिजाइन की मजबूरी

इसके पीछे इंटरनल हार्डवेयर का भी बड़ा रोल है। फोन के अंदर बैटरी बीच में 60-70 प्रतिशत जगह घेर लेती है, जबकि मदरबोर्ड और सर्किट्स किनारों पर बंटे होते हैं। दाईं साइड पर पावर बटन का फ्लेक्स केबल कनेक्ट करना इंजीनियर्स के लिए सरल और किफायती पड़ता है। लागत बचत के साथ रिलायबिलिटी भी बढ़ती है।

ऊपर या बाईं तरफ शिफ्ट करने से वायरिंग जटिल हो जाती, जो मैन्युफैक्चरिंग को महंगा बना देती। मिड-रेंज फोन्स में तो पावर बटन को फिंगरप्रिंट सेंसर से इंटीग्रेट किया जाता है- दाएं अंगूठे का सीधा पहुंच इसकी परफेक्ट फिट है, जो सिक्योरिटी और स्पीड दोनों देता है।

इंडस्ट्री का अनकहा नियम

इंडस्ट्री स्टैंडर्ड ने इसे सील कर दिया। शुरुआती आईफोन में बटन टॉप पर था, LG Optimus सीरीज में पीछे, लेकिन एप्पल और सैमसंग जैसे दिग्गजों ने दाईं साइड को अपनाया। यूजर बिहेवियर स्टडीज से साबित हुआ कि यह सबसे इंट्यूटिव है। स्विचिंग आसान हो जाती- सैमसंग से वनप्लस या शाओमी पर जाते वक्त कन्फ्यूजन नहीं। अपवाद भी हैं, जैसे सैमसंग गैलेक्सी नोट 10 में बाईं साइड का प्रयोग लेफ्ट-हैंडेड यूजर्स के लिए, लेकिन बहुमत दाईं तरफ ही भारी पड़ता है।

अतिरिक्त फायदे और भविष्य

फिलहाल, एंड्रॉइड फोन्स में पावर+वॉल्यूम कॉम्बो से स्क्रीनशॉट लेना भी इसी डिजाइन का तोहफा है। सेटिंग्स में जाकर इसे गूगल असिस्टेंट या कैमरा शॉर्टकट बना सकते हैं। भविष्य में फोल्डेबल्स या बटन-लेस डिजाइन्स बदलाव ला सकते हैं, लेकिन फिलहाल दाईं साइड का दबदबा कायम है। यह छोटी सी डिटेल बताती है कि टेक वर्ल्ड में यूजर सेंट्रीक थिंकिंग कितनी गहरी है- कभी सोचा नहीं था न!

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

अभी-अभी मोदी का ऐलान

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें