
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जगत में मंगलवार को एक हिला देने वाली खबर सामने आई है। ओपनएआई (OpenAI) ने अपने बेहद मशहूर एआई वीडियो-जेनरेशन प्लेटफॉर्म सोरा (Sora) को बंद करने का फैसला ले लिया है। बता दें कि यह ऐप महज छह महीने पहले (सितंबर 2025) पब्लिक लॉन्च हुआ था और दुनियाभर में धूम मचा रहा था। कंपनी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अब अपने किसी भी प्रोडक्ट, डेवलपर टूल या चैटजीपीटी में वीडियो बनाने का सपोर्ट नहीं देगी। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सोरा के ऑफिशियल अकाउंट ने लिखा, “हम सोरा ऐप को अलविदा कह रहे हैं। हमें पता है कि यह खबर निराश करने वाली है।”
डिज्नी की 100 करोड़ डॉलर की डील भी रद्द
इस फैसले की टाइमिंग सबसे ज्यादा विवादित है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ओपनएआई ने सोरा को बंद करने का फैसला डिज्नी के अधिकारियों के साथ हुई एक अहम मीटिंग के महज आधे घंटे बाद ही ले लिया। पिछले साल डिज्नी ने ओपनएआई में 100 करोड़ डॉलर (लगभग 84,000 करोड़ रुपये) के निवेश पर सहमति जताई थी, जिसके तहत मार्वल, पिक्सर और स्टार वॉर्स के 200 से अधिक कैरेक्टर्स का उपयोग करके वीडियो बनाए जाने थे।
ओपनएआई के इस अचानक फैसले से डिज्नी पूरी तरह हैरान रह गया। डिज्नी के एक प्रवक्ता ने इसको “एक बड़ा धोखा” करार दिया, हालांकि डील में अभी तक कोई पैसे का लेन-देन नहीं हुआ था, इसलिए आर्थिक नुकसान टल गया।
डीपफेक का अड्डा और सुरक्षा विफल
सोरा के अंत की सबसे बड़ी वजहें इसके सुरक्षा सिस्टम की विफलता और डीपफेक की बाढ़ थीं। ऐप में ‘कैरेक्टर्स’ (पहले ‘कैमियो’) फीचर का इस्तेमाल कर यूजर अपने ही असली लगने वाले डीपफेक बना सकते थे, जो जल्द ही अजीबोगरीब और डरावने वीडियो का अड्डा बन गया। यूजर्स ने ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन के भी कई विचित्र डीपफेक बना दिए।
नियमों के बावजूद, मार्टिन लूथर किंग जूनियर और रॉबिन विलियम्स जैसे दिवंगत दिग्गजों के वीडियो धड़ल्ले से बनने लगे, जिसके लिए उनके परिवारों को खुद इंस्टाग्राम पर अपील करनी पड़ी। कॉपीराइट कैरेक्टर्स (मारियो, पिकाचू) के आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने से कंपनी के दावों की पोल खुल गई।
सर्वर पिघलने की नौबत और भारी घाटा
टेक्निकल चुनौतियां भी कम नहीं थीं। सोरा के लॉन्च के बाद इतना भारी ट्रैफिक आया कि कंपनी की महंगे ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) पिघलने की नौबत आ गई थी, जिसके लिए इस्तेमाल पर रोक लगानी पड़ी थी। आर्थिक मोर्चे पर भी ओपनएआई भारी दबाव में है। एपफिगर्स के डेटा के अनुसार, नवंबर में 33 मिलियन डाउनलोड्स के पीक after फरवरी में यह गिरकर 11 मिलियन रह गया। कमाई केवल 21 लाख डॉलर (17.5 करोड़ रुपये) रही, जबकि कंपनी को इस साल 14 बिलियन डॉलर का नुकसान झेलना पड़ सकता है।
सुपर ऐप और एजेंटिक AI
सोरा बंद होने का मतलब है कि ओपनएआई अब “कोड रेड” मोड में है और अपना पूरा फोकस मुनाफे वाले बिजनेस पर लगा रहा है, खासकर इस साल के अंत में आने वाले IPO को देखते हुए। कंपनी अब एक “सुपर ऐप्प” (चैटजीपीटी + कोडेक्स + एटलस ब्राउजर) और “एजेंटिक AI” (खुद से फैसले लेने वाले सिस्टम) पर काम कर रही है। सोरा 2 मॉडल अभी भी मौजूद है, बस उसे चैटजीपीटी के पेड वर्जन के पीछे कर दिया गया है।
यह कदम दिखाता है कि AI क्षेत्र में तकनीकी चमक के अलावा आर्थिक व्यवहार्यता और सामाजिक जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण हैं।









