
भारत सरकार ने इनकम टैक्स सिस्टम को और पारदर्शी व सरल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत 1 अप्रैल 2026 से पुराने फॉर्म 15G और 15H को पूरी तरह से हटा दिया गया है। इनकी जगह एक नया यूनिफाइड फॉर्म 121 लाया गया है, जो टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) कटौती से बचने की प्रक्रिया को अभूतपूर्व रूप से आसान बना देगा। इस बदलाव से लाखों टैक्सपेयर्स, खासकर सीनियर सिटीजन्स और छोटी आय वालों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अब उम्र के आधार पर अलग-अलग फॉर्म भरने की झंझट खत्म हो गई है।
फॉर्म 121: एक नजर में समझें
फॉर्म 121 असल में एक सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म है, जिसमें टैक्सपेयर घोषणा करता है कि उसकी कुल सालाना आय टैक्सेबल लिमिट से कम है या शून्य है। नए नियमों के अनुसार, नई टैक्स व्यवस्था में बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट सभी के लिए 4 लाख रुपये हो गई है, जबकि पुरानी व्यवस्था में सीनियर सिटीजन्स के लिए यह 3 लाख रुपये थी।
अगर आपकी कुल आय इससे कम है, तो बैंक, पोस्ट ऑफिस, म्यूचुअल फंड कंपनियों या अन्य भुगतानकर्ताओं को यह फॉर्म देकर टीडीएस कटने से रोक सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपकी बैंक एफडी पर ब्याज आता है या पीएफ निकासी हो रही है, तो फॉर्म 121 जमा करने मात्र से 10 प्रतिशत टीडीएस बच सकता है।
पुराने फॉर्म्स से नया बदलाव
पहले सिस्टम में दो फॉर्म्स की दुविधा थी- फॉर्म 15G युवाओं (60 साल से कम उम्र) के लिए और 15H सीनियर सिटीजन्स के लिए। लेकिन अब फॉर्म 121 हर योग्य व्यक्ति के लिए एकसमान है। यह भारत के रेजिडेंट इंडिविजुअल्स, हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) और कुछ अन्य एंटिटीज के लिए उपलब्ध है।
हालांकि, गैर-निवासी (एनआरआई), कंपनियां और फर्म्स इसका इस्तेमाल नहीं कर सकतीं। इस फॉर्म का फायदा कई आय स्रोतों पर मिलेगा, जैसे बैंक डिपॉजिट या आरडी पर ब्याज, डिविडेंड, किराया आय, बीमा कमीशन, म्यूचुअल फंड वितरण, पीएफ निकासी और पेंशन। अगर आपकी आय इनसे आती है और कुल टैक्स जीरो है, तो हर जगह अलग-अलग फॉर्म जमा करना पड़ेगा।
फॉर्म भरने की प्रक्रिया और जरूरी बातें
फॉर्म भरना अनिवार्य नहीं है। अगर आप इसे छोड़ देते हैं, तो टीडीएस कटेगा और बाद में आईटीआर फाइलिंग के दौरान रिफंड क्लेम कर सकते हैं। लेकिन फॉर्म 121 जमा करने से कैश फ्लो बेहतर रहता है, खासकर रिटायर्ड लोगों के लिए। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट से फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं, जिसमें पैन-आधार लिंकिंग अनिवार्य है। गलत घोषणा पर भारी जुर्माना या कानूनी कार्रवाई हो सकती है, इसलिए कुल आय का सही अनुमान लगाएं। समय पर जमा न करने से टीडीएस कट ही जाएगा।
बदलाव का व्यापक प्रभाव
यह बदलाव टैक्स प्रक्रिया को डिजिटल इंडिया के अनुरूप डिजाइन करने का प्रयास है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पेपरवर्क 50 प्रतिशत कम हो जाएगा और अनुपालन आसान बनेगा। हालांकि, टैक्सपेयर्स को सलाह दी जाती है कि सीए से सलाह लें, क्योंकि नई व्यवस्था में रेजिम चुनना भी महत्वपूर्ण है। सरकार का यह कदम छोटे निवेशकों को सशक्त बनाएगा, लेकिन सटीकता ही कुंजी है।









