
आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख की कटौती की सीमा जल्दी खत्म हो जाती है, खासकर उन लोगों के लिए जो बच्चों की फीस, फिक्स्ड डिपॉजिट, यूनिट लिंक्ड प्लांस या ईएलएसएस जैसे टूल्स में अलग‑अलग जगह निवेश करते हैं। वित्तीय वर्ष 2025‑26 (AY 2026‑27) के लिए अगर आपकी 80C सीमा पहले ही खत्म हो चुकी है, तो चिंता की जरूरत नहीं है। आयकर अधिनियम के तहत कई ऐसी धाराएं हैं जो 80C की सीमा से बिल्कुल अलग होकर आपको अतिरिक्त टैक्स छूट दिलाती हैं।
आज के लेख में हम आपको 5 ऐसे बेहतरीन टैक्स‑सेविंग विकल्पों की विस्तार से जानकारी देंगे, जिनमें आवेदन पात्रता, छूट की सीमा, और यह भी बताया जाएगा कि आप अभी या जल्द ही क्या‑क्या कदम उठा सकते हैं।
1. नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) – धारा 80CCD(1B)
NPS एक रिटायरमेंट‑ओरिएंटेड निवेश योजना है, जिसमें आप पूरे जीवन नियमित रूप से निवेश करते हैं और रिटायरमेंट के बाद पेंशन रूप में रिटर्न पाते हैं। बजट 2015 से इसमें एक बड़ा बदलाव हुआ कि अब आप धारा 80CCD(1B) के तहत NPS में किए गए निवेश पर अतिरिक्त कटौती ले सकते हैं।
आवेदन पात्रता और शर्तें
- कोई भी भारतीय नागरिक, जिसकी आय पर आयकर लागू होता है, NPS में अपनी ओर से निवेश कर सकता है (सिवाय NRIs जो कुछ शर्तों के अधीन हैं)।
- निवेश NPS Tier‑1 खाते में होना चाहिए (Tier‑2 अकाउंट पर टैक्स लाभ नहीं मिलता)।
- यह लाभ केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलता है; नई टैक्स व्यवस्था में 80CCD(1B) का क्लेम नहीं किया जा सकता।
छूट की सीमा
- धारा 80C के तहत पहले से ही आप ₹1.5 लाख तक की कटौती ले सकते हैं।
- NPS में अतिरिक्त निवेश पर धारा 80CCD(1B) के तहत ₹50,000 तक की अतिरिक्त कटौती मिलती है, जो 80C की सीमा से अलग होती है।
- इस तरह आप कुल ₹2 लाख तक की कटौती (80C + 80CCD(1B)) पा सकते हैं, जो आपकी टैक्स देयता पर काफी असर डाल सकती है।
कब और कैसे निवेश करें
- NPS खाता किसी भी बैंक, पोस्ट ऑफिस या राष्ट्रीय पेंशन सिस्टम ट्रस्ट (NPS Trust) के माध्यम से खोला जा सकता है।
- वित्तीय वर्ष 2025‑26 के लिए टैक्स बचत के लिए आप अभी भी Tier‑1 NPS में ₹50,000 तक का निवेश कर सकते हैं और अगर आपकी 80C सीमा पहले से खत्म हो चुकी है तो यह अतिरिक्त टैक्स‑बचत का सबसे मजबूत तरीका है।
2. स्वास्थ्य बीमा – धारा 80D
धारा 80D के तहत स्वास्थ्य बीमा के प्रीमियम पर मिलने वाली कटौती निवेश‑आधारित नहीं है, बल्कि आप जो भी प्रीमियम भरते हैं वह टैक्स‑सेविंग का हिस्सा बन जाता है। यह विकल्प उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जो बच्चों या बुजुर्ग माता‑पिता से जुड़ी जिम्मेदारी उठाते हैं।
आवेदन पात्रता
- भारतीय निवासी व्यक्ति (Individual/HUF) धारा 80D के तहत लाभ ले सकता है।
- आवेदनकर्ता खुद के लिए, अपने जीवनसाथी के लिए, बच्चों के लिए और माता‑पिता के लिए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम भरकर कटौती का दावा कर सकता है।
छूट की सीमा और निवारक जांच
- सामान्य श्रेणी (60 साल से कम आयु):
- स्वयं + जीवनसाथी + बच्चों के लिए ₹25,000 तक कटौती।
- माता‑पिता के लिए अतिरिक्त लाभ:
- यदि माता‑पिता 60 साल से कम हैं, तो ₹25,000 तक की अतिरिक्त कटौती।
- यदि माता‑पिता 60 साल या अधिक (वरिष्ठ नागरिक) हैं, तो ₹50,000 तक की अतिरिक्त कटौती।
- यदि आवेदक खुद 60+ वर्ष का है, तो उसके लिए भी सीमा बढ़कर अलग से लागू होती है।
निवारक स्वास्थ्य जांच
- धारा 80D के अंदर शामिल छूट की सीमा में ₹5,000 तक की अतिरिक्त राशि निवारक स्वास्थ्य जांच पर भी ली जा सकती है, जो आपकी कुल टैक्स‑योग्य आय से कम होने पर कटौती के रूप में जुड़ती है।
क्या अभी करें
- अगर आपका हेल्थ‑इंश्योरेंस रिन्यूअल अभी आ रहा है या आपने अभी तक नया पॉलिसी नहीं लिया है, तो वित्तीय वर्ष 2025‑26 के लिए प्रीमियम जल्द से जल्द भर दें और रसीदें सुरक्षित रखें, ताकि आप 2026‑27 में इसका फायदा विहित सीमा तक उठा सकें।
3. होम लोन के ब्याज पर छूट – धारा 24(b)
अगर आपने घर खरीदने या बनाने के लिए बैंक से लोन लिया है, तो उस पर भुगतान किए गए ब्याज का अच्छा खासा हिस्सा आप टैक्स‑सेविंग के रूप में दावा कर सकते हैं। यह खास तौर पर उन लोगों के लिए राहत भरा है जो नौकरी में हैं, लेकिन घर खरीदने के लिए लोन लिया है।
आवेदन पात्रता
- कोई भी व्यक्ति जिसके नाम पर होम लोन है, वह धारा 24(b) के तहत ब्याज पर कटौती का दावा कर सकता है।
- यह लाभ दोनों के लिए लागू होता है, चाहे आप अकेले लोन लें या सह‑धारक/सह‑बोरोवर हों; हर सह‑धारक अपने हिस्से के ब्याज के लिए अलग से कटौती का दावा कर सकता है।
छूट की सीमा और शर्तें
- स्व‑कब्जे वाले (self‑occupied) घर के लिए:
- एक वित्तीय वर्ष में भुगतान किए गए ब्याज पर ₹2 लाख तक की कटौती।
- किराए पर दी गई संपत्ति के केस ब्याज की पूरी राशि (जितनी भी हो) टैक्स दावे में जोड़ी जा सकती है, बशर्ते वह दाना ब्याज ही हो, मूलधन नहीं।
क्या अभी करें
- अगर आपका होम लोन अभी भी चल रहा है, तो अपने बैंक से वार्षिक ब्याज सर्टिफिकेट जरूर लें और यह डेटा अपने टैक्स प्लान में शामिल करें। यह आपकी टैक्स देयता को साल‑दर‑साल कम करेगा।









