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अब रात में भी बनेगी बिजली; ‘थर्मोरैडिएटिव’ सेल ने बदल दी सोलर एनर्जी की दुनिया

क्या आपने कभी सोचा है कि सूरज ढलने के बाद भी सोलर पैनल बिजली बना सकते हैं? विज्ञान के नए चमत्कार 'थर्मोरैडिएटिव सेल' ने यह मुमकिन कर दिखाया है। जानें यह अद्भुत तकनीक कैसे रात के अंधेरे में भी आपके घर को रोशन रखेगी।

By Pinki Negi

अब रात में भी बनेगी बिजली; 'थर्मोरैडिएटिव' सेल ने बदल दी सोलर एनर्जी की दुनिया।
थर्मोरैडिएटिव’ सेल

सोलर एनर्जी के क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी समस्या यह थी कि सूरज ढलते ही बिजली का उत्पादन बंद हो जाता था। लेकिन वैज्ञानिकों ने ‘एंटी-सोलर पैनल’ यानी थर्मोरैडिएटिव सेल बनाकर इस समस्या का समाधान ढूंढ लिया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह तकनीक कैसे काम करती है और यह हमारे जीवन को कैसे बदलेगी।

क्या है यह ‘थर्मोरैडिएटिव’ तकनीक?

सामान्य सोलर पैनल ‘फोटोवोल्टिक’ प्रभाव पर काम करते हैं—वे ठंडे होते हैं और सूरज की गर्म रोशनी को सोखकर बिजली बनाते हैं।

इसके ठीक उलट, थर्मोरैडिएटिव सेल गर्मी को बाहर निकालकर बिजली पैदा करते हैं।

  • रात के समय जब सूरज नहीं होता, तब हमारी पृथ्वी ठंडी होने के लिए अपनी गर्मी को इन्फ्रारेड रेडिएशन के रूप में अंतरिक्ष में छोड़ती है।
  • यह सेल उस गर्मी के बहाव को पकड़ लेता है।
  • जैसे ही गर्मी सेल से होकर ठंडे अंतरिक्ष की ओर बढ़ती है, यह इलेक्ट्रॉन्स को गति देता है, जिससे बिजली (Current) पैदा होती है।

इस तकनीक के 3 सबसे बड़े फायदे

  1. 24/7 बिजली सप्लाई: अब तक सोलर ऊर्जा की सबसे बड़ी कमी यह थी कि रात में बैटरी बैकअप पर निर्भर रहना पड़ता था। इस तकनीक से रात में भी सीधे पैनल से बिजली मिल सकेगी।
  2. बैटरी खर्च में कमी: चूंकि रात में भी बिजली का उत्पादन जारी रहेगा, इसलिए बहुत बड़ी और महंगी बैटरी स्टोरेज की जरूरत कम हो जाएगी।
  3. पुरानी मशीनों का इस्तेमाल: इस सेल का उपयोग ऐसी मशीनों में भी किया जा सकता है जो बहुत ज्यादा गर्मी पैदा करती हैं, जिससे बर्बाद होने वाली गर्मी से फिर से बिजली बनाई जा सकेगी।

चुनौतियां और भविष्य की राह

अभी यह तकनीक शुरुआती दौर में है। वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसकी क्षमता (Efficiency) बढ़ाना है।

  • फिलहाल, यह रात में एक सामान्य सोलर पैनल की तुलना में काफी कम बिजली बनाता है।
  • शोधकर्ता अब ‘मर्करी-कैडमियम-टेल्यूराइड’ जैसे नए पदार्थों का उपयोग कर रहे हैं ताकि रात में बनने वाली बिजली की मात्रा को बढ़ाया जा सके।

थर्मोरैडिएटिव सेल का आना ऊर्जा संकट के समाधान की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह तकनीक न केवल घरों के बिजली बिल को स्थायी रूप से ‘जीरो’ कर सकती है, बल्कि दुनिया को पूरी तरह से ग्रीन एनर्जी पर शिफ्ट करने में मदद करेगी।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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