
दुनियाभर में सौर ऊर्जा (Solar Energy) को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सोलर पैनल बनाने वाली मशहूर कंपनी ‘लोंगी ग्रीन एनर्जी’ ने अब पैनल बनाने में इस्तेमाल होने वाली महंगी चाँदी की जगह सस्ते धातुओं (Base Metals) का उपयोग करने का फैसला किया है।
इस ऐतिहासिक कदम से सोलर पैनल बनाने की लागत में भारी कमी आएगी। इसका सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा, क्योंकि अब घर और बिजनेस के लिए सोलर सिस्टम लगवाना पहले के मुकाबले काफी सस्ता और आसान हो जाएगा।
बढ़ती चाँदी की कीमतों ने बढ़ाई सोलर पैनल की लागत
पिछले कुछ सालों में चाँदी के दामों में भारी उछाल आया है, जिससे सोलर पैनल बनाना महंगा हो गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में सोलर पैनल बनाने के कुल खर्च में चाँदी की हिस्सेदारी मात्र 3 प्रतिशत थी, जो अक्टूबर 2025 तक बढ़कर 17 प्रतिशत हो गई।
चाँदी की कीमत 84 डॉलर प्रति औंस के पार पहुँचने की वजह से कंपनियों के लिए पैनल की लागत संभालना मुश्किल हो रहा था। चूँकि सोलर सेल्स में बिजली के बहाव के लिए चाँदी का बहुत अधिक इस्तेमाल होता है, इसलिए इसकी बढ़ती कीमतों का सीधा असर सौर ऊर्जा की पूरी इंडस्ट्री पर पड़ रहा था।
मुनाफे के दबाव और बढ़ती लागत ने बदला सोलर सेक्टर का रास्ता
बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और पैनलों की भारी संख्या (ओवरकैपेसिटी) के कारण सोलर कंपनियों पर कीमतें घटाने का भारी दबाव है। ऐसे में चाँदी जैसे महंगे कच्चे माल का उपयोग करने से कंपनियों का मुनाफा लगातार कम हो रहा था। इसी आर्थिक दबाव से निपटने के लिए Longi जैसी बड़ी कंपनियों ने चाँदी का विकल्प खोजने का रणनीतिक फैसला लिया है। चाँदी पर निर्भरता कम करने से न केवल कंपनियों की लागत घटेगी, बल्कि वे वैश्विक बाजार में खुद को और मजबूत कर पाएंगी।
सोलर पैनल में चाँदी की जगह अब होगा कॉपर का इस्तेमाल
दिग्गज कंपनी लोंगी ग्रीन एनर्जी (Longi Green Energy) ने एक बड़ा ऐलान किया है कि वह अब अपने सोलर सेल्स में चाँदी के बजाय तांबे (कॉपर) जैसी सस्ती धातुओं का उपयोग करेगी। कंपनी के मुताबिक, इस नई तकनीक पर आधारित सोलर पैनलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन इस साल की दूसरी तिमाही से शुरू हो जाएगा। तांबा, चाँदी के मुकाबले काफी सस्ता है, जिससे सोलर मॉड्यूल बनाने का कुल खर्च काफी कम हो जाएगा। इस बदलाव से लोंगी कंपनी को वैश्विक बाजार में अन्य कंपनियों के मुकाबले बेहतर स्थिति हासिल करने और अपनी कीमतें घटाने में मदद मिलेगी।
सोलर सेल्स में नए बदलाव
लोंगी कंपनी बैक-कॉन्टैक्ट (BC) सोलर सेल्स बनाती है, जो साधारण पैनलों के मुकाबले धूप से ज्यादा बिजली पैदा करते हैं। खास बात यह है कि इस तकनीक में चाँदी की जगह सस्ते धातुओं (जैसे कॉपर) का इस्तेमाल करना ज्यादा आसान है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि तांबे का उपयोग करना पूरी तरह सरल नहीं है, क्योंकि इससे असेंबली का खर्च बढ़ सकता है और लंबे समय तक इसकी मजबूती को लेकर चुनौतियां आ सकती हैं। इसके बावजूद, लोंगी कंपनी को भरोसा है कि वह अपनी एडवांस तकनीक के जरिए इन दिक्कतों को दूर कर लेगी और सोलर ऊर्जा को और अधिक किफायती बनाएगी।
सोलर पैनल होंगे और भी सस्ते
लोंगी के इस कदम ने पूरी सोलर इंडस्ट्री में हलचल पैदा कर दी है। जिंको सोलर (Jinko Solar) और शंघाई आइको (Shanghai Aiko) जैसी अन्य दिग्गज कंपनियां भी अब चाँदी के विकल्प के रूप में तांबे (कॉपर) का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 तक सोलर सेक्टर में चाँदी की खपत में 7 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है, जबकि सोलर पैनल लगाने की रफ्तार में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। आम उपभोक्ताओं के लिए यह बहुत अच्छी खबर है, क्योंकि कच्चे माल की लागत कम होने से घरों की छतों पर लगने वाले रूफटॉप सोलर सिस्टम और बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स अब पहले से काफी कम कीमतों पर उपलब्ध होंगे।









