
अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे हैं या टेक जगत में रुचि रखते हैं, तो यह खबर आपके लिए चिंता का विषय हो सकती है। मार्केट इंटेलिजेंस फर्म IDC (International Data Corporation) की ताजा रिपोर्ट ने स्मार्टफोन उद्योग को बड़ा झटका दिया है। 2026 में वैश्विक शिपमेंट में 12.9 प्रतिशत की भारी गिरावट का अनुमान है, जो पिछले दशक की सबसे बड़ी मंदी साबित हो सकती है। कुल शिपमेंट घटकर मात्र 1.12 अरब यूनिट रह जाएंगे।
यह संकट केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। भारत जैसे उभरते बाजारों में भी 12-15 प्रतिशत की कमी का खतरा मंडरा रहा है, जहां बजट स्मार्टफोन ग्राहकों की संख्या सबसे ज्यादा है। विशेषज्ञ इसे ‘ट्रिपल थ्रेट’ बता रहे हैं- मेमोरी चिप की कमी, बढ़ती लागत और खरीदारी में देरी।
मंदी की जड़: मेमोरी चिप संकट
इस सुनामी का मुख्य कारण मोबाइल फोनों में प्रयुक्त DRAM और NAND मेमोरी चिप्स की कीमतों में बेतहाशा उछाल है। AI फीचर्स, जैसे उन्नत कैमरा प्रोसेसिंग और मल्टीटास्किंग, ने चिप डिमांड को आसमान छू लिया है। चिप निर्माता कंपनियां जैसे Western Digital के पास अगले एक साल के ऑर्डर पहले से बुक हैं, जिससे सप्लाई चेन चरमरा गई है।
परिणामस्वरूप, फोन निर्माण लागत 20-30 प्रतिशत बढ़ चुकी है। सैमसंग जैसी कंपनियां अपनी नई सीरीज में 1000 रुपये से अधिक की वृद्धि कर चुकी हैं। भारत में रुपये की कमजोरी ने इस बोझ को और गहरा दिया है। छोटे ब्रांड्स, जो एंड्रॉइड फोन्स पर निर्भर हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। अगर 20,000 रुपये वाले फोन की कीमत 500-1000 रुपये बढ़ जाए, तो ग्रामीण और मध्यम वर्ग के ग्राहक खरीदारी टाल सकते हैं।
बाजार पर गहरा असर
IDC के अनुसार, बजट और मिड-रेंज एंड्रॉइड फोन्स पर सबसे बुरा असर पड़ेगा। वैश्विक स्तर पर शिपमेंट में 15 प्रतिशत तक कमी हो सकती है, जबकि भारत में यह आंकड़ा और ऊंचा है। रिटेलर्स को स्टॉक की कमी और बढ़ती कीमतों का दोहरा संकट झेलना पड़ रहा है।
दूसरी ओर, प्रीमियम ब्रांड्स जैसे Apple और Samsung अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं। IDC वाइस प्रेसिडेंट फ्रांसिस्को जेरोनिमो का कहना है कि हाई-एंड ग्राहक 1 लाख रुपये के फोन पर 2-3 हजार की बढ़ोतरी को नजरअंदाज कर देते हैं। iPhone और Galaxy सीरीज की मजबूत ब्रांड वफादारी उन्हें स्थिर रखेगी।
| सेगमेंट | अनुमानित गिरावट | मुख्य प्रभावित क्षेत्र |
|---|---|---|
| बजट (<20,000 रु.) | 15%+ | ग्रामीण भारत, छोटे ब्रांड्स |
| मिड-रेंज (20-40k रु.) | 10-12% | शहरी युवा, सप्लाई क्रंच |
| प्रीमियम (>40k रु.) | 0-5% | मजबूत डिमांड |
भारत पर विशेष नजर
भारतीय बाजार, जहां 15 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन सालाना बिकते हैं, इस मंदी से सबसे ज्यादा चोट खाएगा। विशेषज्ञ सलाह देते हैं – अभी मौजूदा स्टॉक पर छूट का फायदा उठाएं। होली या IPL सेल के दौरान खरीदारी सही रणनीति हो सकती है। 2026 भर समस्या बनी रहने की संभावना है, लेकिन 2027 की पहली छमाही में हल्का सुधार दिखेगा।
सरकार की सब्सिडी स्कीम्स, जैसे PLI (Production Linked Incentive), उत्पादन बढ़ाने में मदद करेंगी, लेकिन तात्कालिक राहत मुश्किल है। उपभोक्ताओं को पुराने मॉडल्स या रिफर्बिश्ड फोन्स पर नजर रखनी चाहिए।
भविष्य की तस्वीर
IDC का अनुमान है कि 2027 में मात्र 2 प्रतिशत ग्रोथ होगी, जबकि 2028 तक सामान्यीकरण संभव है। तब तक चिप उत्पादन बढ़ाने वाली कंपनियां जैसे TSMC और Samsung Foundry क्षमता विस्तार करेंगी। हालांकि, AI और 5G की मांग लंबे समय तक दबाव बनाए रखेगी। यह मंदी स्मार्टफोन इंडस्ट्री को पुनर्गठन के लिए मजबूर करेगी। छोटे खिलाड़ी विलय को मजबूर हो सकते हैं, जबकि बड़े ब्रांड्स इनोवेशन पर जोर देंगे। उपभोक्ताओं के लिए संदेश साफ है- खरीदारी में जल्दबाजी न करें, लेकिन अवसरों को हाथ से न जाने दें।









