
2026 की शुरुआत में बुलियन मार्केट (सोना-चांदी) ने जो ‘सुनामी’ देखी थी, वह अब उतनी ही भयावह गिरावट में बदल चुकी है। जनवरी के अंत में जो चांदी रिकॉर्ड तेजी के साथ आसमान छू रही थी, वह अब अपने लाइफ-टाइम हाई से 40% तक क्रैश हो चुकी है। वैश्विक बाजारों (COMEX) में चांदी की कीमतों में आया यह भूचाल पिछले कई दशकों की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावटों में से एक है।
गिरावट की असली वजह
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस क्रैश की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा केविन वॉर्श (Kevin Warsh) को अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले चेयरमैन के रूप में नामांकित करना है।
- Hawkish रुख: केविन वॉर्श को एक ‘पॉलिसी हॉक’ (कड़े फैसलों के पक्षधर) माना जाता है। निवेशकों को डर है कि उनके आने से ब्याज दरों में कटौती की प्रक्रिया धीमी हो सकती है, जिससे डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ और सोने-चांदी की चमक फीकी पड़ गई।
- मार्जिन कॉल और पैनिक: कीमतों में अचानक गिरावट आने से बड़े फंड्स के ‘स्टॉप लॉस’ ट्रिगर हो गए, जिससे बाजार में जबरन बिकवाली (Forced Selling) शुरू हो गई।
चांदी में कोहराम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का भाव पिछले महीने $120 प्रति औंस के अविश्वसनीय स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन गुरुवार को इसमें 20% की एक और भारी गिरावट आई और यह $64 के स्तर पर आ गई।
- भारत में स्थिति (MCX): भारत में चांदी ने ₹4,30,000 प्रति किलो का स्तर छुआ था।
- ताजा गिरावट: गुरुवार को यह ₹2,43,815 पर बंद हुई। यानी महज एक हफ्ते में चांदी अपने हाई से ₹1,86,233 प्रति किलो सस्ती हो चुकी है।
सोना भी नहीं संभल पाया
चांदी के पीछे-पीछे सोने की कीमतों में भी भारी मुनाफावसूली देखी जा रही है।
- हाई लेवल: 29 जनवरी को 24 कैरेट सोना ₹1,93,096 (प्रति 10 ग्राम) के शिखर पर था।
- मौजूदा भाव: एमसीएक्स पर सोना अब तक ₹41,025 सस्ता होकर ₹1,52,000 के आसपास ट्रेड कर रहा है।
क्या अभी खरीदारी करना सही है?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बाजार में ‘ओवरबॉट’ (Overbought) जोन होने के कारण यह करेक्शन आना तय था।
“बाजार में फिलहाल पैनिक सेलिंग का माहौल है। हालांकि, सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में चांदी की औद्योगिक मांग अभी भी मजबूत है। विशेषज्ञों की सलाह है कि बाजार को स्थिर होने दें और एक बार में सारा पैसा लगाने के बजाय ‘एसआईपी’ (SIP) मोड में खरीदारी करें।”









