
शेयर बाजार के जरिए सोने और चांदी (ETFs) में निवेश करने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। अब तक आपके गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ की कीमतें लंदन के बाजार (LBMA) के भाव से तय होती थीं, लेकिन सेबी (SEBI) ने अब इस विदेशी निर्भरता को खत्म कर दिया है। नए नियमों के अनुसार, अब आपके निवेश की वैल्यू सीधे भारतीय सर्राफा बाजार के चालू दामों पर आधारित होगी। इसका मतलब है कि अब आपके पोर्टफोलियो की कीमत भारत के स्थानीय बाजार में चल रहे सोने-चांदी के भाव के साथ बेहतर तालमेल बिठा सकेगी, जिससे निवेशकों को अधिक पारदर्शिता और सटीक घरेलू कीमतों का लाभ मिलेगा।
अब विदेशी भावों की छुट्टी, भारतीय दाम होंगे लागू
सेबी ने गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ की वैल्यूएशन के तरीके में एक बड़ा बुनियादी बदलाव किया है:
- विदेशी निर्भरता खत्म: अभी तक म्यूचुअल फंड कंपनियां लंदन (LBMA) के भावों का इस्तेमाल करती थीं, जो अब बंद हो जाएगा।
- घरेलू स्पॉट प्राइस (Domestic Spot Price): 1 अप्रैल 2026 से आपके निवेश की कीमत भारतीय बाजारों में चल रहे सोने-चांदी के भाव (Spot Price) से तय होगी।
- पोल्ड स्पॉट प्राइस: इसके लिए NSE, BSE या MCX जैसे मान्यता प्राप्त एक्सचेंजों द्वारा इकट्ठा किए गए औसत भावों को आधार बनाया जाएगा।
- सटीक वैल्यूएशन: गोल्ड और सिल्वर के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स का जो ‘सेटलमेंट प्राइस’ होगा, वही अब ईटीएफ की सही वैल्यू बताएगा।
आखिर क्यों जरूरी था गोल्ड और सिल्वर ETF के नियमों में बदलाव?
सेबी द्वारा अंतरराष्ट्रीय भावों को छोड़कर भारतीय बाजार के दामों को आधार बनाने के पीछे 4 मुख्य कारण हैं:
- भारतीय बाजार की ताकत: भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, फिर भी हमारे निवेश की कीमत लंदन के बाजार से तय होती थी। अब भारतीय बाजार को उसकी सही पहचान मिलेगी।
- सटीक स्थानीय कीमतें: अंतरराष्ट्रीय भाव और भारत के हाजिर बाजार (Spot Market) के भाव में अक्सर अंतर होता है। नया नियम आपके निवेश की वैल्यू को भारतीय परिस्थितियों के अनुसार सटीक बनाएगा।
- पूरी इंडस्ट्री में एकरूपता: अभी अलग-अलग म्यूचुअल फंड कंपनियां अपनी गणना के लिए अलग तरीके अपनाती हैं। अब सभी के लिए एक ही ‘यूनिफॉर्म’ नियम होगा, जिससे तुलना करना आसान होगा।
- आसान पारदर्शिता: घरेलू प्राइसिंग मैकेनिज्म की वजह से अब आम निवेशकों के लिए यह समझना बहुत आसान हो जाएगा कि उनके फंड की NAV (Net Asset Value) कैसे तय की गई है।
AMFI और SEBI ने मिलाया हाथ
इस नए सिस्टम को सही तरीके से लागू करने के लिए सरकार ने जिम्मेदारियां तय कर दी हैं:
निगरानी और सुरक्षा: भाव इकट्ठा करने की प्रक्रिया (Spot Polling) पूरी तरह से सेबी की सख्त गाइडलाइंस के तहत होगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कीमतों के साथ कोई हेरफेर न हो सके और निवेशकों को सही दाम मिले।
एकसमान नियम (Uniform Policy): AMFI, सेबी के साथ मिलकर एक ऐसी नीति तैयार करेगा जिसे देश की सभी म्यूचुअल फंड कंपनियों को अनिवार्य रूप से मानना होगा। इससे हर फंड हाउस में पारदर्शिता बनी रहेगी।
गोल्ड और सिल्वर ETF में बदलाव
सेबी के इस नए फैसले का एक आम निवेशक के तौर पर आप पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसे इन 3 बिंदुओं में समझें:
- सटीक NAV और कम ट्रैकिंग एरर: अब आपके ईटीएफ की वैल्यू (NAV) भारतीय बाजार के वास्तविक दामों को दर्शाएगी। इससे ‘ट्रैकिंग एरर’ (मार्केट रेट और फंड की वैल्यू में अंतर) काफी हद तक कम हो जाएगा, जिससे आपको सटीक रिटर्न मिलेगा।
- टैक्स और ड्यूटी का स्पष्ट असर: भारत में सोने की कीमतों पर इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) और स्थानीय टैक्स का बड़ा असर होता है। अब ईटीएफ की कीमतों में इन स्थानीय कारकों का प्रभाव ज्यादा स्पष्ट और पारदर्शी तरीके से दिखाई देगा।
- घबराने की जरूरत नहीं: यह केवल कीमतों की गणना (Valuation) करने का एक तकनीकी तरीका है। आपके पास जितनी ईटीएफ यूनिट्स पहले थीं, उतनी ही अब भी रहेंगी। आपके निवेश की कुल मात्रा पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।









