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बैंक खाते में जमा ‘अपनों की अमानत’ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, RBI से पूछा- वारिसों को क्यों नहीं मिलती जानकारी?

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र और RBI से पूछा कि मृत खाताधारक के वैध वारिसों को बैंक खाते की जानकारी क्यों नहीं मिलती। सुचेता दलाल की जनहित याचिका पर जस्टिस विक्रम नाथ व संदीप मेहता की पीठ ने नीति बनाने का निर्देश दिया। अनक्लेम्ड राशि 3.5 लाख करोड़ से अधिक। अगली सुनवाई 5 मई को।

By Pinki Negi

बैंक खाते में जमा 'अपनों की अमानत' पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, RBI से पूछा- वारिसों को क्यों नहीं मिलती जानकारी?

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से एक अहम सवाल पूछा। कोर्ट ने जानना चाहा कि जब किसी खाताधारक की मृत्यु हो जाती है, तो उसके बैंक खाते की जानकारी उसके सही (वैध) उत्तराधिकारियों को देने में आखिर दिक्कत क्या है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में अभी स्पष्ट नियम या नीति नहीं है, जिसकी वजह से लोगों को परेशानी होती है। इसलिए जरूरी है कि एक साफ और आसान नीति बनाई जाए, ताकि मृत व्यक्ति के परिवार या वारिसों को बिना परेशानी के बैंक खाते से जुड़ी जानकारी मिल सके।

अदालत का अहम सवाल

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने पत्रकार सुचेता दलाल की तरफ से दायर जनहित याचिका (W.P.(C) No. 185/2022) पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। इस याचिका में मृत खाताधारकों के निष्क्रिय पड़े हुए जमा (‘अपनों की अमानत’) की जानकारी उनके उत्तराधिकारियों तक पहुंचाने के लिए एक केंद्रीकृत व्यवस्था बनाने का निर्देश देने की अपील की गई है।

पीठ ने सख्त लहजे में कहा, “यदि कोई व्यक्ति अपने कई बैंक खातों का विवरण छोड़े बगैर मर जाता है, तो उसके वारिस उनमें जमा राशि के बारे में जानकारी कैसे जुटाएंगे? कानूनी वारिसों को जानकारी देने में क्या समस्या है? सरकार को इस पर नीति बनानी होगी।”

याचिकाकर्ता का पक्ष

याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि ऐसे निष्क्रिय खातों का विवरण सार्वजनिक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आरबीआई ने भी “केंद्रीकृत और तलाश-योग्य डेटाबेस” बनाने की सिफारिश की है, जिससे लोग अपने दिवंगत परिजनों के खातों का पता लगा सकें।

केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वी वेंकटरमण ने बचाव में कहा कि यदि कोई वास्तविक वारिस सामने आता है तो उसे ’जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता कोष’ (DEA Fund) से राशि वापस कर दी जाती है। आरबीआई ने यह कोष 2014 में बनाया था, जिसमें बैंकों की निष्क्रिय जमाओं को रखा जाता है।

अदालत की चिंता और आंकड़े

अदालत ने इसे नीतिगत मुद्दा मानने से इनकार करते हुए कहा कि बैंक ट्रस्टी के रूप में कार्य करते हैं। कानूनी वारिस indemnity bond देकर जानकारी ले सकते हैं। देश में कुल अनक्लेम्ड राशि 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जिसमें बैंक डिपॉजिट्स के अलावा म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस शामिल हैं। मार्च 2021 तक DEA फंड में ही 39,264 करोड़ रुपये जमा हो चुके थे, जो अब 72,000 करोड़ से ऊपर पहुंच चुके हैं।

वर्तमान प्रक्रिया

RBI ने हाल ही में 15 लाख रुपये तक के क्लेम के लिए सरलीकृत प्रक्रिया जारी की है। नॉमिनी या लीगल हेयर्स को केवल indemnity bond जमा करना होता है। सहकारी बैंकों के लिए यह सीमा 5 लाख है। फिर भी, मुख्य समस्या यह है कि वारिसों को मृतक के सभी खातों की जानकारी ही नहीं मिलती। UDGAM पोर्टल (https://www.investigatemoney.rbi.org.in) से जांच संभव है, लेकिन यह सभी बैंकों को कवर नहीं करता।

अगली सुनवाई और उम्मीदें

याचिका अनुच्छेद 14 (समानता), 21 (जीवन का अधिकार) और 300A (संपत्ति का अधिकार) का हवाला देती है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और आरबीआई को नए हलफनामे दाखिल करने को कहा। अगली सुनवाई 5 मई 2026 को होगी। यह फैसला लाखों परिवारों के लिए राहत बन सकता है, जो अपनों की अमानत को वर्षों तक परेशान होकर ढूंढते रहते हैं। पारदर्शिता से न केवल धन वापस आएगा, बल्कि वित्तीय समावेशन को बल भी मिलेगा।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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