
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े करोड़ों कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह ईपीएफओ की पुरानी वेतन सीमा (Wage Ceiling) को बढ़ाने पर विचार करे और इस पर 4 महीने के भीतर फैसला ले। पिछले 11 सालों से इस सीमा में कोई बदलाव नहीं होने के कारण बहुत से कर्मचारी पीएफ और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं ले पा रहे थे। सरकार के इस संभावित फैसले से अब अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारी भी इस योजना के दायरे में आ सकेंगे, जिससे उनके भविष्य की बचत और सुरक्षित होगी।
ईपीएफओ वेतन सीमा पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदुरकर की बेंच ने सामाजिक कार्यकर्ता नवीन प्रकाश नौटियाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने सरकार को ईपीएफओ की वर्तमान वेतन सीमा पर विचार करने के लिए चार महीने का समय दिया है।
दरअसल, साल 2014 के बाद से इस नियम में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिससे 15,000 रुपये से ज्यादा वेतन पाने वाले कई कर्मचारी इस योजना के लाभ से वंचित हैं। याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि पुरानी सीमा होने के कारण करोड़ों कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही है। अब सरकार के फैसले से यह तय होगा कि क्या आने वाले समय में ज्यादा सैलरी वाले लोग भी पीएफ और पेंशन का लाभ उठा पाएंगे।
ईपीएफओ का ₹15,000 वाला नियम
ईपीएफओ (EPFO) के नियमों के अनुसार, ₹15,000 मासिक वेतन वह रेखा है जो तय करती है कि आपको पीएफ का सदस्य बनना ही होगा या नहीं। यदि नौकरी शुरू करते समय आपका वेतन (बेसिक + डीए) ₹15,000 या उससे कम है, तो पीएफ का हिस्सा बनना आपके लिए कानूनी रूप से अनिवार्य है।
लेकिन, यदि आपका वेतन ₹15,001 या उससे ज्यादा है, तो आप ‘अपवर्जित कर्मचारी’ (Excluded Employee) की श्रेणी में आते हैं और आपके लिए पीएफ सदस्य बनना जरूरी नहीं है। हालांकि, यदि आप और आपकी कंपनी दोनों सहमत हों, तो आप अपनी मर्जी से इस योजना में शामिल होकर बचत का लाभ उठा सकते हैं।
न्यूनतम वेतन और ईपीएफओ नियमों में टकराव
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकीलों ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। उन्होंने बताया कि पिछले 10 सालों से ईपीएफओ की 15,000 रुपये की वेतन सीमा नहीं बदली गई है, जबकि अब केंद्र और कई राज्य सरकारों का न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) ही इस सीमा से ऊपर निकल गया है। इसका मतलब यह है कि सरकार की नजर में जो सबसे कम वेतन है, वह भी ईपीएफओ की ऊपरी सीमा से ज्यादा हो चुका है। इस विरोधाभास के कारण बड़ी संख्या में कम वेतन पाने वाले मजदूर और कर्मचारी भी अनचाहे तरीके से पीएफ और सामाजिक सुरक्षा के लाभ से वंचित हो रहे हैं।
क्या बढ़ेगी पीएफ के दायरे में आने वाले कर्मचारियों की संख्या?
याचिका में यह गंभीर मुद्दा उठाया गया है कि ईपीएफओ की पुरानी वेतन सीमा के कारण संगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिक सामाजिक सुरक्षा से वंचित हैं। वकीलों ने तर्क दिया कि ₹15,000 से अधिक वेतन पाने वालों को इस कल्याणकारी योजना से बाहर रखना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश लाखों कर्मचारियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। यदि केंद्र सरकार अगले चार महीनों में इस वेतन सीमा को बढ़ाती है, तो वे सभी लोग भी पीएफ और पेंशन के सुरक्षा चक्र में शामिल हो सकेंगे जो अभी अपनी सैलरी की वजह से इससे बाहर हैं।









