
आज के डिजिटल दौर में हर व्यक्ति के पास एक या अधिक सेविंग अकाउंट हैं, जिन्हें हम पूरी तरह सुरक्षित मानते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि इनकम टैक्स विभाग आपके हर बड़े कैश लेन-देन पर नजर रखता है। सेविंग अकाउंट में पैसे रखने की कोई ऊपरी सीमा नहीं, लेकिन एक वित्तीय वर्ष में कुल ₹10 लाख से अधिक कैश जमा पर बैंक ‘स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन’ (SFT) के तहत रिपोर्टिंग करता है। छोटे-छोटे ट्रांजेक्शन जोड़कर यह सीमा पार हो जाए, तो नोटिस आ सकता है।
मासिक और वार्षिक लिमिट क्या है?
सेविंग अकाउंट से लेन-देन की कोई सख्त मासिक सीमा नहीं, लेकिन बैंक आमतौर पर 3-10 फ्री ट्रांजेक्शन (शहरी/ग्रामीण पर निर्भर) देते हैं । असली खतरा कैश पर है: FY में सभी सेविंग अकाउंट्स में कुल ₹10 लाख कैश डिपॉजिट पर SFT रिपोर्ट जाती है । PAN न होने पर यह ₹5 लाख हो जाती है । एक दिन में ₹2 लाख से अधिक कैश प्राप्ति/भुगतान धारा 269ST के उल्लंघन का कारण बनता है, जिसमें राशि बराबर पेनल्टी लग सकती है । निकासी पर भी ₹10 लाख से अधिक कैश पर जांच होती है । अप्रैल 2026 से नई रिपोर्टिंग नियमों पर चर्चा है, लेकिन मुख्य लिमिट वही।
विभाग क्यों नोटिस भेजता है?
विभाग ITR में घोषित आय और बैंक ट्रांजेक्शन का मिलान करता है। अगर कमाई ₹5 लाख है लेकिन ₹15 लाख कैश जमा, तो स्रोत मांगा जाता है । क्रेडिट कार्ड बिल पर ₹1 लाख कैश या ₹10 लाख अन्य माध्यम से भुगतान भी रिपोर्ट होता है । स्रोत साबित न होने पर 60-200% जुर्माना लग सकता है । 2025-26 में हजारों नोटिस इसी कारण भेजे गए।
बचाव के उपाय
- कैश कम इस्तेमाल करें; UPI/NEFT/RTGS अपनाएं, जिनमें कोई लिमिट नहीं ।
- ITR समय पर भरें, स्रोत दस्तावेज रखें (वेतन, बिक्री, उपहार)।
- हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन से पहले टैक्स एडवाइजर से सलाह लें।
- करेंट अकाउंट में ₹50 लाख कैश लिमिट का ध्यान रखें।
डिजिटल इंडिया में कैशलेस ट्रांजेक्शन न सिर्फ सुरक्षित, बल्कि टैक्स अनुपालन में आसान हैं। नियमों का पालन कर नोटिस से बचें, वरना कानूनी पचड़ा हो सकता है।









