
आजकल शहर हो या छोटा शहर, लिव-इन रिलेशनशिप कोई नई बात नहीं रही। करियर, पढ़ाई और नई सोच के चलते कई जोड़े शादी से पहले या बिना शादी साथ रहना पसंद कर रहे हैं। समाज में बहस तो होती ही है, लेकिन कानून कहता है – ये गैरकानूनी नहीं। समस्या तब आती है जब कपल्स अधिकारों और नियमों से अनभिज्ञ रहते हैं। बाद में छोटी सी गलती बड़ी मुसीबत बन जाती है। अगर तुम भी लिव-इन में हो या सोच रहे हो, तो ये बेसिक बातें जान लो। इससे रिश्ता मजबूत बनेगा और टेंशन कम होगा।
शुरू करने से पहले ये शर्तें चेक करो
लिव-इन में कूदने से पहले कुछ बुनियादी नियम याद रखो। सबसे पहले, दोनों पार्टनर बालिग होने चाहिए – लड़के की उम्र 21 साल और लड़की की 18 साल से ज्यादा। नाबालिग के साथ रहना सीधा अपराध है, POCSO एक्ट के तहत सजा हो सकती है। दूसरा, दोनों अविवाहित हों। अगर कोई शादीशुदा है और तलाक नहीं लिया, तो ये व्यभिचार का केस बन सकता है।
सबसे बड़ी बात – आपसी सहमति। जबरदस्ती या दबाव वाला रिश्ता कभी सेफ नहीं। दोनों बराबरी से, खुशी से रहें, तभी ये लीगल माना जाएगा। मैं कहूंगा, रिश्ता मजबूत बनाने के लिए ये स्टेप्स पहले क्लियर कर लो।
जरूरी दस्तावेज
कागजात न होने से सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी जैसे आईडी प्रूफ हर हाल में रखो। घर का रेंट एग्रीमेंट दोनों के नाम से हो, जिसमें साफ लिखा हो कि तुम दोनों साथ रह रहे हो। सोसायटी या पुलिस वेरिफिकेशन में ये काम आएगा। मकान मालिक से बात कर लो, वो भी सहमत हो। अगर बच्चे हों, तो उनकी कस्टडी और मेंटेनेंस के लिए अलग से प्लानिंग करो। ये डॉक्यूमेंट्स न सिर्फ प्रूफ हैं, बल्कि भावी विवादों से बचाते हैं। भूलना मत, कागज मजबूत हो तो रिश्ता भी मजबूत!
कपल्स के अधिकार
लिव-इन में शादी जैसे सभी अधिकार नहीं मिलते। प्रॉपर्टी, इनहेरिटेंस या पेंशन का हक नहीं। लेकिन घरेलू हिंसा से सुरक्षा मिलती है – DV एक्ट के तहत। ब्रेकअप पर मेंटेनेंस क्लेम कर सकते हो, अगर लॉन्ग टर्म रिश्ता हो। सुप्रीम कोर्ट ने कई केस में लिव-इन पार्टनर को ‘पति-पत्नी जैसा’ माना है। लेकिन बच्चे पैदा हों तो उनकी जिम्मेदारी दोनों की। लड़की के लिए IPC 498A जैसे प्रावधान लागू। बस, ये जान लो कि सहमति और सम्मान पर टिका रिश्ता ही सुरक्षित है।
संभावित जोखिम और बचाव के टिप्स
समाज का ताना, फैमिली प्रेशर या पुलिस पूछताछ – ये सब हो सकता है। खासकर छोटे शहरों में। बचाव? लोकेशन चुनो जहां लिव-इन को स्वीकार किया जाता हो। फैमिली को इंफॉर्म रखो। लीगल एडवाइजर से सलाह लो। अगर ब्रेकअप हो, तो लिखित एग्रीमेंट बना लो। महिलाओं के लिए हेल्पलाइन 181 याद रखो। याद रखो, लिव-इन पर्सनल चॉइस है, लेकिन जिम्मेदारी के साथ। गलतियां सुधारने का मौका सबको मिलता है।
आखिरी सलाह
लिव-इन अच्छा हो सकता है अगर समझदारी से हो। कानून तुम्हारे साथ है, बशर्ते नियम फॉलो करो। बातचीत करो, विश्वास रखो और डॉक्यूमेंट्स अपडेट रखो। अगर शादी का प्लान है तो वो भी ठीक, लेकिन फोर्स मत करो। जिंदगी तुम्हारी, फैसला तुम्हारा। सेफ रहो, प्यार करो!









