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Chanakya Niti: आखिर घर में क्यों होता है झगड़ा? चाणक्य ने बताए कलह के ये 3 असली कारण, आज ही सुधार लें ये आदत

क्या आपके घर की शांति भी क्लेश की भेंट चढ़ रही है? आचार्य चाणक्य ने उन 3 छिपी हुई आदतों का खुलासा किया है जो हंसते-खेलते परिवार को बर्बाद कर देती हैं। जानें वे कौन से कारण हैं जिन्हें आज ही सुधार कर आप अपना घर स्वर्ग बना सकते हैं।

By Pinki Negi

Chanakya Niti: आखिर घर में क्यों होता है झगड़ा? चाणक्य ने बताए कलह के ये 3 असली कारण, आज ही सुधार लें ये आदत
Chanakya Niti

महान दार्शनिक आचार्य चाणक्य का मानना था कि किसी भी परिवार में कलह का मुख्य कारण केवल बाहरी घटनाएँ नहीं, बल्कि सदस्यों की आदतें और उनके सोचने के अलग-अलग तरीके होते हैं। जब विचारों में तालमेल की कमी और स्वभाव में टकराव होता है, तभी घर की शांति भंग होती है। यदि परिवार के लोग एक-दूसरे के स्वभाव को समझें और चाणक्य द्वारा बताए गए व्यवहार के नियमों को अपनाएं, तो आपसी मनमुटाव को दूर किया जा सकता है। उनकी नीतियों को जीवन में उतारकर किसी भी घर में फिर से सुख, शांति और प्रेम का माहौल स्थापित किया जा सकता है।

घर की शांति छीन लेती हैं ये बातें

घर वह स्थान है जहाँ हमें सबसे अधिक सुकून मिलना चाहिए, लेकिन अक्सर छोटी-छोटी बातें अपनों के बीच कड़वाहट और विवाद पैदा कर देती हैं। आचार्य चाणक्य के अनुसार, परिवार में होने वाली इस कलह के पीछे कुछ ठोस कारण होते हैं जो हमारी मानसिक शांति को नष्ट कर देते हैं।

जब हम अपने ही प्रियजनों के साथ बहस में उलझ जाते हैं, तो खुशहाल माहौल तनाव में बदल जाता है। चाणक्य ने अपनी नीतियों में बहुत गहराई से समझाया है कि वे कौन सी गलतियाँ या स्वभाव हैं जिनकी वजह से घर में अशांति फैलती है। इन कारणों को समझकर हम न केवल विवादों को रोक सकते हैं, बल्कि अपने घर में फिर से खुशियाँ वापस ला सकते हैं।

परिवार की एकता का दुश्मन है ‘अहंकार’

आचार्य चाणक्य के अनुसार, किसी भी परिवार के टूटने की सबसे बड़ी वजह ‘मैं’ वाली भावना होती है। जब घर के सदस्यों में ‘हम’ की जगह सिर्फ खुद का स्वार्थ और ‘मुझे ही चाहिए’ जैसी सोच आ जाती है, तो आपसी रिश्तों में दरार पड़ने लगती है। स्वार्थ और अहंकार न केवल घर की शांति छीन लेते हैं, बल्कि परिवार की एकता को भी नष्ट कर देते हैं। चाणक्य ने सिखाया है कि यदि व्यक्ति अपने अहंकार को त्यागकर पूरे परिवार के हित के बारे में सोचना शुरू कर दे, तो घर में कभी क्लेश नहीं होगा और हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहेगी।

रिश्तों में कड़वाहट की वजह

आचार्य चाणक्य के अनुसार, परिवार में एक-दूसरे की राय का सम्मान न करना और बातों को अनसुना करना किसी धीमे जहर से कम नहीं है। जब घर के सदस्यों को लगता है कि उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है, तो उनके मन में निराशा और गुस्सा पनपने लगता है, जो अंततः बड़े झगड़ों का रूप ले लेता है। आपसी बातचीत की कमी (कम्युनिकेशन गैप) ही अधिकांश गलतफहमियों की जड़ होती है। अगर हम अपनों की बातों को ध्यान से सुनें और उन्हें उचित सम्मान दें, तो रिश्तों की नींव मजबूत होती है और घर में खुशहाली बनी रहती है।

चाणक्य के अनुसार झूठ और धोखा हैं परिवार के सबसे बड़े दुश्मन

आचार्य चाणक्य का मानना था कि किसी भी मजबूत परिवार की आधारशिला ‘भरोसा’ होती है। जब रिश्तों में झूठ और धोखे का प्रवेश होता है, तो वह नींव कमजोर होने लगती है। एक छोटा सा झूठ भी यदि पकड़ा जाए, तो वह व्यक्ति की साख को हमेशा के लिए खत्म कर देता है और अपनों के मन में शक पैदा कर देता है। चाणक्य के अनुसार, जिस घर में ईमानदारी और पारदर्शिता (खुलकर बात करना) होती है, वहीं सुख और शांति का वास होता है। परिवार को टूटने से बचाने के लिए सत्य का मार्ग अपनाना और आपसी विश्वास बनाए रखना सबसे जरूरी है।

घर की बातें बाहर न जाएँ

आचार्य चाणक्य ने चेतावनी दी है कि परिवार के निजी मामलों में किसी बाहरी व्यक्ति का दखल देना सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। अक्सर बाहरी लोग या पड़ोसी अपनी बातों और अफवाहों से घर के सदस्यों के बीच अविश्वास का बीज बो देते हैं। जब हम घर की समस्याओं को बाहर ले जाते हैं, तो बाहरी लोग स्थिति का फायदा उठाकर झगड़े और बढ़ा सकते हैं। चाणक्य के अनुसार, बुद्धिमान वही है जो अपने घर की परेशानियों को चारदीवारी के भीतर ही मिल-बैठकर सुलझा ले। परिवार की गोपनीयता बनाए रखना ही सुख-शांति का असली आधार है।

चाणक्य के अनुसार ‘लालच’ है परिवार की शांति का दुश्मन

आचार्य चाणक्य के अनुसार, धन का लालच किसी भी सुखी परिवार को बर्बाद करने की ताकत रखता है। जब घर के सदस्यों में संपत्ति या पैसों को लेकर स्पष्टता (Transparency) नहीं होती, तो यह मनमुटाव और कभी न खत्म होने वाले कानूनी झगड़ों की वजह बन जाता है। चाणक्य ने सिखाया है कि परिवार तभी तक एकजुट रहता है जब तक लोग पैसों से ज्यादा रिश्तों को अहमियत देते हैं। जिस घर में लालच रिश्तों पर हावी हो जाता है, वहाँ अपने ही लोग एक-दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं। सच्ची सुख-समृद्धि वहीं है जहाँ धन से अधिक प्रेम और आपसी तालमेल को महत्व दिया जाए।

चाणक्य के अनुसार खुशहाली के लिए अपनाएं ये गुण

आचार्य चाणक्य के अनुसार, “मैं ही सही हूँ” की सोच और पल भर में आने वाला गुस्सा किसी भी परिवार को तबाह कर सकता है। अहंकार व्यक्ति की सुनने और समझने की शक्ति को खत्म कर देता है, जिससे वह अपनों की सलाह को भी अपमान समझने लगता है। गुस्से में कहे गए कड़वे शब्द वापस नहीं लिए जा सकते और वे प्रियजनों के दिल पर गहरा घाव कर देते हैं।

चाणक्य ने सिखाया है कि परिवार को टूटने से बचाने के लिए अपने अहंकार का त्याग करना और धैर्य (सब्र) से काम लेना बहुत जरूरी है। जब इंसान खुद को सही साबित करने के बजाय रिश्तों को बचाने की कोशिश करता है, तभी घर में शांति और खुशहाली बनी रहती है।

रिश्तों में दरार की वजह है ‘अत्यधिक उम्मीदें’

आचार्य चाणक्य के अनुसार, परिवार में क्लेश का एक बड़ा कारण एक-दूसरे से बहुत ज्यादा अपेक्षाएं रखना है। जब हम चाहते हैं कि घर के लोग हमारी पसंद के हिसाब से चलें या हर काम हमारी इच्छा के अनुसार करें, तो समस्या की शुरुआत वहीं से होती है। उम्मीदें पूरी न होने पर मन में निराशा और क्रोध पैदा होता है, जो रिश्तों में कड़वाहट घोल देता है। चाणक्य ने सिखाया है कि रिश्ते तभी मजबूत होते हैं जब हम दूसरों को वैसे ही स्वीकार करें जैसे वे हैं। जितनी कम उम्मीदें होंगी, मन उतना ही शांत रहेगा और घर का माहौल भी खुशहाल बना रहेगा।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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