
अगर आप क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, EMI भर रहे हैं, या नया लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की क्रेडिट व्यवस्था को और बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब आपका क्रेडिट स्कोर महीने में एक बार के बजाय, हर सात दिन में अपडेट किया जाएगा। RBI का यह फैसला आपके लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।
लाखों कर्जदारों के लिए बड़ी राहत
यह नया बदलाव लाखों कर्जदारों के लिए बहुत बड़ी राहत लेकर आया है। पहले लोगों के लोन इसलिए अटके रहते थे क्योंकि बैंक उनके क्रेडिट स्कोर के नए अपडेट का इंतज़ार करते थे। अब ऐसा नहीं होगा। जैसे ही आप अपनी EMI भरेंगे, क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाएंगे या कोई नया लोन लेंगे, उसका पूरा रिकॉर्ड उसी हफ़्ते आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में तुरंत जुड़ जाएगा। इससे लोन लेने की प्रक्रिया तेज़ और आसान हो जाएगी।
RBI ने की गाइडलाइन जारी- अगले साल 1 अप्रैल से हर 7 दिन में अपडेट होगा क्रेडिट स्कोर, गलत रिपोर्ट पर होगा जुर्माना#AirPollution #SupremeCourt #CJI #VirtualHearing
— Dainik Bhaskar (@DainikBhaskar) November 27, 2025
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डेटा भेजने के नियमों में बदलाव
अब बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को क्रेडिट ब्यूरो (जैसे सिबिल) को डेटा भेजने के नियमों में बदलाव आया है। पहले जहाँ महीने में एक या दो बार जानकारी भेजी जाती थी, वहीं अब हर हफ्ते रिपोर्टिंग करना ज़रूरी होगा। बैंक हर महीने की 7, 14, 21, 28 तारीख और महीने के आखिर में नया डेटा भेजेंगे। इसका मतलब है कि आपकी ईएमआई (EMI), क्रेडिट कार्ड बिल और लोन जैसी वित्तीय गतिविधियों की ताज़ा जानकारी अब तुरंत रिकॉर्ड हो जाएगी। एक और सुविधा यह है कि हर बार केवल बदला हुआ डेटा ही भेजा जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया पहले से ज़्यादा तेज़ और आसान हो जाएगी।
उपभोक्ताओं को मिलने वाले मुख्य फायदे
नए नियमों से ग्राहकों को कई बड़े लाभ होंगे। अब ईएमआई (EMI) या बिल का भुगतान करने के बाद क्रेडिट स्कोर अपडेट के लिए दो-तीन हफ्ते का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, जिससे स्कोर तेज़ी से सुधरेगा। इसके अलावा, बैंकों को आपकी एकदम ताज़ा प्रोफाइल दिखेगी, जिससे लोन जल्दी अप्रूव हो सकेंगे और अप्रूवल की प्रक्रिया तेज होगी। क्योंकि डेटा लगातार अपडेट होता रहेगा, इसलिए रिकॉर्ड में गलतियों के चांस भी कम हो जाएंगे। संक्षेप में, समय पर भुगतान करने का सकारात्मक असर आपकी क्रेडिट हेल्थ पर तुरंत दिखेगा।
बैंकों को मिलने वाले लाभ
नए नियमों के लागू होने के बाद बैंकों को अपने ग्राहकों का डेटा अब ज़्यादा सटीक और ताज़ा मिलेगा। इस बेहतर जानकारी के कारण, बैंकों के लिए डिफ़ॉल्ट होने का खतरा कम हो जाएगा। साथ ही, लोन देने की प्रक्रिया (क्रेडिट अप्रेज़ल) मज़बूत होगी, धोखाधड़ी (Fraud) की पहचान करना आसान होगा, और लोन जारी करने (डिस्बर्सल) की पूरी प्रक्रिया भी तेज़ी से पूरी की जा सकेगी।









