Tags

RBI का बड़ा मंथन शुरू! ईरान युद्ध और गिरते रुपये के बीच क्या सस्ती होगी लोन की EMI? जानें क्या है तैयारी

ईरान युद्ध ने कच्चे तेल को 112 डॉलर/बैरल पहुंचाया, रुपये 93 के पार। महंगाई 5.4% पर, MPC 6-8 अप्रैल चल रही। SBI रिपोर्ट: रेपो रेट 5.25% स्थिर रहेगा। होम लोन EMI पर राहत की उम्मीद कम, RBI लिक्विडिटी पर फोकस। 8 अप्रैल गवर्नर संजय मल्होत्रा ऐलान करेंगे।

By Pinki Negi

RBI का बड़ा मंथन शुरू! ईरान युद्ध और गिरते रुपये के बीच क्या सस्ती होगी लोन की EMI? जानें क्या है तैयारी

ईरान युद्ध के साए में कच्चे तेल के आसमान छूते दामों और रुपये की लगातार गिरती पूंछ ने भारतीय अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। ऐसे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक आज 6 अप्रैल से शुरू हो गई है, जहां सभी की नजरें होम लोन और अन्य उधारी की EMI पर मिलने वाली संभावित राहत पर टिकी हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अस्थिरता के बीच RBI इस बार ब्याज दरों में कटौती करने से परहेज करेगा, क्योंकि महंगाई का खतरा मंडरा रहा है।

ईरान युद्ध का आर्थिक असर

मिडिल ईस्ट में छिड़े ईरान-इजरायल संघर्ष ने होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर संकट ला खड़ा किया है। इससे कच्चे तेल के दाम 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुके हैं, जो भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए बड़ा झटका है। रुपये का भाव 93 डॉलर के पार बना हुआ है, जिससे आयात बिल फूल रहा है। खाने-पीने की चीजें महंगी हो रही हैं, आयात रुकने से सप्लाई चेन बाधित हो गई है।

नतीजा, इंपोर्टेड इन्फ्लेशन 5.4 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जिसमें और इजाफा हो सकता है। पिछले हफ्तों में RBI ने 12 अरब डॉलर की बिक्री कर रुपये को सहारा दिया, लेकिन तेल संकट लंबा खिंचने से महंगाई पर नियंत्रण मुश्किल होता जा रहा है।

RBI पर सबकी निगाहें

RBI पर सबकी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि रेपो रेट में कटौती से बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है, जो उपभोक्ताओं की EMI को कम कर राहत देता है। वर्तमान में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थिर है, जो 2025 की पिछली कटौतियों के बाद बना हुआ है। होम लोन, पर्सनल लोन और कार लोन लेने वालों को उम्मीद थी कि MPC इस बार दरें घटाकर ग्रोथ को बूस्ट देगी। लेकिन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ताजा रिसर्च रिपोर्ट ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि वैश्विक तनाव के कारण ब्याज दरों में कोई बदलाव की संभावना बेहद कम है। RBI का फोकस लिक्विडिटी मैनेजमेंट और वित्तीय स्थिरता पर रहेगा, न कि दर कटौती पर।

8 अप्रैल का इंतजार

8 अप्रैल को गवर्नर संजय मल्होत्रा फैसले सुनाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ, तो फ्लोटिंग रेट लोनधारकों की EMI पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन महंगाई बढ़ने से अप्रत्यक्ष बोझ जरूर पड़ेगा। पिछले महीने ईरान संघर्ष से ग्रोथ अनुमान 7 प्रतिशत से घटकर 6.5 प्रतिशत रह गया। बैंकों की मार्केट वैल्यू में 95 अरब डॉलर की गिरावट आ चुकी है, जो बाजार की चिंता को दर्शाती है। RBI को ग्रोथ और महंगाई के बीच संतुलन बनाना होगा। अगर तेल दाम नहीं सुधरे, तो भविष्य में दर वृद्धि भी संभव है, जो EMI का बोझ बढ़ा देगी।

मध्यम वर्ग की चिंता

मध्यम वर्ग के लाखों परिवार, जो होम लोन के भारी किस्तों से जूझ रहे हैं, इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं। ईरान युद्ध का असर न सिर्फ जेब पर पड़ेगा, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित करेगा। क्या RBI ग्रोथ को प्राथमिकता देगा या महंगाई रोकने पर जोर? 8 अप्रैल का ऐलान ही साफ करेगा। फिलहाल, उधारकर्ताओं को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

अभी-अभी मोदी का ऐलान

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें