
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत राशन वितरण में बड़ा बदलाव शुरू कर दिया है, जिसका सीधा असर देश के करोड़ों गरीब परिवारों की थाली पर दिखेगा। इस नए फैसले का फोकस अब केवल पेट भरने से आगे बढ़कर स्वास्थ्य और पोषण पर है, इसलिए चावल के कोटे में कटौती करते हुए बाकी अनाज और पोषक वस्तुओं की हिस्सेदारी बढ़ाई जा रही है।
सस्ते राशन से संतुलित भोजन की ओर
सरकार की नई रणनीति साफ है- “सस्ता राशन” के साथ “संतुलित भोजन” भी मिले। लंबे समय तक सिर्फ चावल आधारित भोजन लेने से शरीर में शुगर असंतुलन, मोटापा और मधुमेह जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी वजह से केंद्र सरकार अब ‘मोटे अनाज’ यानी मिलेट्स (श्री अन्न) को राशन सिस्टम से जोड़ रही है। बाजरा, ज्वार, रागी और मक्का जैसे अनाज फाइबर, प्रोटीन और खनिजों से भरपूर माने जाते हैं और इन्हें कई राज्यों में 1 रुपये किलो या कुछ जगहों पर मुफ्त देने की तैयारी है, ताकि गरीब परिवार भी इन तक आसानी से पहुंच सकें।
स्टॉक मैनेजमेंट और किसानों को फायदा
इसके साथ ही अनाज के सरकारी भंडार (स्टॉक) प्रबंधन का पहलू भी इस फैसले के पीछे अहम वजह है। पिछले कई वर्षों से सरकार भारी मात्रा में चावल की खरीद करती रही है, जबकि गेहूं और अन्य अनाजों की खपत व स्टॉक का संतुलन बिगड़ता रहा। अब चावल का हिस्सा कम करके और गेहूं व मिलेट्स की हिस्सेदारी बढ़ाकर Food Corporation और राज्यों के गोदामों पर दबाव घटाने की कोशिश की जा रही है। इससे किसानों को विविध फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और खाद्य सुरक्षा का दायरा भी विस्तृत होगा।
चावल के साथ मिलेट्स और फोर्टिफाइड अनाज
नए “मेन्यू” की बात करें तो राशन की दुकान पर अब केवल गेहूं और चावल की थैलियों तक बात सीमित नहीं रहेगी। जहां-जहां चावल जारी रहेगा, वहां सामान्य चावल की जगह फोर्टिफाइड चावल देने पर जोर है, जिसमें आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 मिलाए जाते हैं, ताकि एनीमिया और पोषण की कमी से लड़ाई मजबूत हो सके। कई राज्यों में मिलेट्स को पैकेट के रूप में चावल के कुछ हिस्से के बदले देने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि लाभार्थी चाहें तो घर की रसोई में दलिया, खिचड़ी, रोटी या अन्य व्यंजन के रूप में इनका इस्तेमाल कर सकें।
राज्यों की भूमिका
राज्य स्तर पर भी अपनी-अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से राशन किट को और समृद्ध बनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित कुछ राज्यों में दाल या काला चना किट का हिस्सा बन चुका है, जिससे गरीब परिवारों को प्रोटीन का एक स्थायी स्रोत मिल सके। कई जगह आयोडीन युक्त नमक और रिफाइंड या सरसों का तेल भी कम कीमत पर या सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि खाना केवल भरपेट ही नहीं, बल्कि संतुलित भी हो। जहां राज्य सरकारों के पास अतिरिक्त संसाधन हैं, वहां मसूर/अरहर दाल, चना, नमक और तेल जैसे कॉम्बो पैक की प्रणाली भी विकसित की जा रही है।
किन राज्यों में बदलाव ज्यादा दिखेगा?
सबसे ज्यादा असर उन राज्यों में दिखने वाला है, जहां परंपरागत रूप से चावल का बड़ा कोटा दिया जाता रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में गेहूं और मोटे अनाज की हिस्सेदारी बढ़ाकर चावल का हिस्सा घटाया जा रहा है। इससे खाद्य आदतों में धीरे-धीरे बदलाव की उम्मीद की जा रही है, क्योंकि गांव और कस्बों के गरीब परिवार भी मिलेट्स व मिश्रित अनाजों को अपनी रोजमर्रा की थाली में शामिल कर सकेंगे।
नया कोटा कैसे चेक करें?
लाभार्थियों के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि “अब हमें हर महीने क्या मिलेगा?” इसका जवाब सरकार ने डिजिटल तरीके से आसान बना दिया है। आप ‘Mera Ration’ ऐप डाउनलोड करके या अपने राज्य के PDS पोर्टल पर लॉगिन कर अपने राशन कार्ड नंबर से “RC Details” सेक्शन देख सकते हैं। वहां इस महीने के लिए आपके नाम पर कितने किलो गेहूं, चावल और कौन-सा मोटा अनाज या अतिरिक्त सामान (जैसे दाल, चना, तेल, नमक) आवंटित हुआ है, उसकी पूरी डिटेल मिल जाती है।
लाभार्थियों के लिए अगला कदम
अगर आप किसी खास राज्य- जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान या मध्य प्रदेश – के निवासी हैं, तो आपके लिए यह और भी ज़रूरी है कि आप अपना नया कोटा चेक करें, क्योंकि बदलाव सबसे पहले इन्हीं राज्यों में तेज गति से लागू हो रहे हैं। जरूरत हो तो अगली बार आप अपना राज्य और कार्ड का प्रकार (AAY, PHH, BPL या APL) बताकर यह भी जान सकते हैं कि इस महीने आपकी थाली में सरकार की तरफ से कौन-कौन सी नई चीजें जुड़ने वाली हैं।









