
देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ पशुपालन अब राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) से नई ऊंचाइयों को छू रहा है। 2014 में शुरू हुई यह योजना गिर, साहीवाल, थारपारकर, राठी जैसी देसी नस्लों के संरक्षण और विकास पर केंद्रित है, जो दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ पशुपालकों की आय को दोगुना कर रही है। केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के तहत चल रही इस स्कीम में IVF गर्भाधान पर प्रति गर्भ ₹5,000 की सीधी सब्सिडी मिल रही है, जिससे छोटे किसान भी आधुनिक तकनीक अपना रहे हैं।
योजना का विस्तार और बजट
राष्ट्रीय गोकुल मिशन को 2021-26 के लिए राष्ट्रीय पशुधन मिशन में शामिल किया गया है, जिसमें कुल बजट ₹2,400 करोड़ है, जिसमें अतिरिक्त ₹1,000 करोड़ का प्रावधान जोड़ा गया। इसका मुख्य लक्ष्य देसी गायों की आनुवंशिक शुद्धता बचाना, दूध उत्पादन में 63% वृद्धि लाना और ग्रामीण रोजगार सृजन है। गोकुल ग्राम स्थापना, बछिया पालन केंद्र और सेक्स-सॉर्टेड सीमेन जैसी तकनीकों से पशुपालक कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले पशु तैयार कर रहे हैं। यह आत्मनिर्भर भारत का मजबूत कदम है, जहां लाखों किसान जुड़ चुके हैं।
पशुपालकों को ठोस लाभ
मिशन से पशुपालकों को डेयरी यूनिट पर 50% से 75% सब्सिडी मिल रही है- 200 गायों पर ₹2 करोड़ तक, जबकि 50 गायों पर ₹50 लाख। उत्तर प्रदेश की नंदिनी योजना में 25 देसी गायों पर ₹31.25 लाख अनुदान, बिहार में 75% सब्सिडी साहिवाल-गिर पर उपलब्ध है। IVF और कृत्रिम गर्भाधान (AI) से गर्भधारण दर 99% तक पहुंच रही है, जहां प्रति गर्भ ₹5,000 और लिंग क्रमबद्ध सीमेन पर छूट दी जा रही। देसी गायें जलवायु अनुकूल होने से रखरखाव सस्ता पड़ता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है, और गोबर-गोमूत्र से जैविक खेती व अतिरिक्त आय हो रही।
| लाभ प्रकार | सब्सिडी राशि | पात्र नस्लें |
|---|---|---|
| डेयरी फार्म | ₹2 करोड़ (200 गाय) | साहिवाल, गिर |
| IVF गर्भाधान | ₹5,000/गर्भ | सभी देसी |
| राज्य योजना (बिहार) | 75% | थारपारकर, राठी |
क्यों खास हैं देसी नस्लें?
भारत की देसी गायें कम देखभाल में टिकाऊ, बीमारियों से लड़ने में सक्षम और जैविक खेती के लिए आदर्श हैं। मिशन ने सहकारी डेयरी नेटवर्क मजबूत किया, ग्रामीण युवाओं को रोजगार दिया।
आवेदन प्रक्रिया
पशुपालन विभाग की वेबसाइट या स्थानीय कार्यालय से ऑनलाइन आवेदन करें। जरूरी दस्तावेज: आधार, जमीन पट्टा, बैंक पासबुक। मुफ्त प्रशिक्षण और जागरूकता कैंप भी आयोजित हो रहे। राष्ट्रीय गोकुल मिशन पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय बना रहा है, जो ग्रामीण भारत को सशक्त कर रहा।









