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इलाज के लिए ₹50 लाख की सरकारी मदद! दुर्लभ बीमारियों के लिए केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, जानें कैसे करें आवेदन

दुर्लभ बीमारियों के महंगे इलाज का डर अब होगा खत्म! केंद्र सरकार अब दे रही है ₹50 लाख की भारी वित्तीय सहायता। जानें कौन सी बीमारियां हैं शामिल और कैसे 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के जरिए आप इस मदद के लिए आवेदन कर सकते हैं।

By Pinki Negi

इलाज के लिए ₹50 लाख की सरकारी मदद! दुर्लभ बीमारियों के लिए केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, जानें कैसे करें आवेदन
इलाज के लिए ₹50 लाख की सरकारी मदद

गंभीर और दुर्लभ बीमारियों का इलाज अक्सर इतना महंगा होता है कि मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए इसे वहन करना नामुमकिन हो जाता है। इसी संकट को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने ‘राष्ट्रीय दुर्लभ बीमारी नीति’ (National Policy for Rare Diseases) के तहत वित्तीय सहायता की सीमा को बढ़ाकर ₹50 लाख कर दिया है। यह राशि उन बीमारियों के लिए दी जाती है जिनका इलाज बहुत महंगा और जीवनभर चलने वाला होता है।

क्या है सरकार का नया फैसला?

पहले दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए वित्तीय सहायता कम थी और यह केवल कुछ विशिष्ट श्रेणियों तक सीमित थी। अब सरकार ने नियमों में ढील देते हुए निम्नलिखित प्रावधान किए हैं:

  • सभी लाभार्थियों के लिए: अब किसी भी श्रेणी की दुर्लभ बीमारी (Group 1, 2, या 3) के लिए मरीज को ₹50 लाख तक की मदद मिल सकती है।
  • अस्पताल को सीधी मदद: यह राशि मरीज को नकद न देकर सीधे उस अस्पताल को दी जाती है जहाँ इलाज चल रहा है।

कौन सी बीमारियाँ इसके अंतर्गत आती हैं?

दुर्लभ बीमारियों की सूची में कई गंभीर रोग शामिल हैं, जैसे:

  • लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर (LSD)
  • स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA)
  • मस्कुलर डिस्ट्रॉफी
  • हंटर सिंड्रोम
  • गौचर रोग
  • अन्य जेनेटिक विकार जो बहुत कम लोगों में पाए जाते हैं।

सहायता पाने के लिए पात्रता (Eligibility)

  1. भारतीय नागरिक: आवेदक का भारत का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।
  2. सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE): मरीज का इलाज सरकार द्वारा नामित 12-15 ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (जैसे AIIMS दिल्ली, PGI चंडीगढ़) में होना चाहिए।
  3. डिजिटल पोर्टल पर पंजीकरण: मरीज का डेटा दुर्लभ बीमारी पोर्टल पर दर्ज होना चाहिए।

आवेदन कैसे करें?

मदद पाने की प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी है:

  • स्टेप 1: अस्पताल का चयन: सबसे पहले मरीज को अपने राज्य या नजदीकी Center of Excellence (CoE) अस्पताल में जाना होगा।
  • स्टेप 2: मेडिकल बोर्ड की जाँच: अस्पताल का एक विशेष बोर्ड मरीज की बीमारी की जाँच करेगा और पुष्टि करेगा कि यह दुर्लभ बीमारी की श्रेणी में है।
  • स्टेप 3: ऑनलाइन पंजीकरण: अस्पताल प्रशासन मरीज का विवरण Rare Diseases Portal पर अपलोड करेगा।
  • स्टेप 4: फंड की मांग: इलाज की अनुमानित लागत (Estimate) के आधार पर अस्पताल सरकार से फंड की मांग करेगा।
  • स्टेप 5: इलाज शुरू: सरकार से मंजूरी मिलते ही ₹50 लाख तक की राशि अस्पताल के खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी और इलाज शुरू हो जाएगा।

जरूरी दस्तावेज (Documents)

  • मरीज का आधार कार्ड।
  • आय प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)।
  • बीमारी से संबंधित सभी मेडिकल रिपोर्ट्स।
  • निवास प्रमाण पत्र।
Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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