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ट्रेन यात्रियों को तगड़ा झटका! आज 1 अप्रैल से बदल गया टिकट कैंसिलेशन का नियम, 8 घंटे पहले रिफंड का खेल खत्म

1 अप्रैल 2026 से भारतीय रेलवे ने ट्रेन टिकट कैंसिलेशन और रिफंड के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब ट्रेन छूटने से 8 घंटे से कम समय पहले टिकट रद्द करने पर यात्री को कोई रिफंड नहीं मिलेगा और पूरा किराया रेलवे के पास रह जाएगा। इससे आखिरी वक्त पर प्लान बदलने वाले यात्रियों पर जेब पर भारी रिफंड नुकसान पड़ सकता है।

By Pinki Negi

ट्रेन यात्रियों को तगड़ा झटका! आज 1 अप्रैल से बदल गया टिकट कैंसिलेशन का नियम, 8 घंटे पहले रिफंड का खेल खत्म

भारतीय रेलवे के यात्रियों के लिए 1 अप्रैल से एक नया “कड़ाका” दौर शुरू हो गया है। ट्रेन टिकट कैंसिलेशन के नियमों में बड़े बदलाव के बाद अब आखिरी समय पर प्लान बदलना सीधे यात्रियों की जेब पर भारी पड़ने लगा है। नए नियमों के तहत अगर यात्री ट्रेन छूटने से 8 घंटे से कम समय पर टिकट कैंसिल करता है, तो उसे कोई रिफंड नहीं मिलेगा, यानी पूरा किराया रेलवे के पास रह जाएगा। यह बदलाव कंफर्म टिकटों से लेकर तत्काल और वेटलिस्ट बुकिंग तक लगभग सभी श्रेणियों पर असर डाल रहा है।

8 घंटे का नया “कट‑ऑफ समय”

पहले ट्रेन चलने से 4 घंटे पहले तक टिकट कैंसिल करने पर भी यात्री कम‑से‑कम हिस्सेदारी के तौर पर रिफंड पा सकता था, लेकिन अब यह सीमा 8 घंटे तक खींच दी गई है। यानी अगर ट्रेन 10 बजे रवाना हो रही है तो 2 बजे के बाद कैंसिल करने पर आपको एक रुपया भी वापस नहीं मिलेगा। रेल मंत्रालय के अनुसार यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से 1 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच लागू हो रहा है, ताकि सिस्टम और यात्री दोनों के लिए अडजस्टमेंट आसान हो सके।

नई स्लैब और “गणित” का दबाव

ट्रेन छूटने से 72 घंटे से अधिक समय पहले टिकट कैंसिल करने पर यात्रियों को अभी भी लगभग पूरे किराए का रिफंड मिलता है, बस एक तय फ्लैट कैंसिलेशन चार्ज कटता है। हालांकि, जैसे‑जैसे समय घटता है, नुकसान तेजी से बढ़ जाता है। 72–24 घंटे के बीच टिकट कैंसिल करने पर लगभग 25 प्रतिशत किराया काटा जाता है, जबकि 24–8 घंटे के बीच कैंसिल करने पर 50 प्रतिशत तक रकम डूब सकती है।

इस नए सिस्टम का असर साफ तौर पर उस यात्री पर पड़ता है जो “प्लान बी” के तौर पर दो अलग‑अलग ट्रेनों में पहले से टिकट बुक कर लेता है। मान लीजिए नई दिल्ली से लखनऊ की एक कंफर्म टिकट ₹1,200 में ली गई, लेकिन बाद में तत्काल बुकिंग पर ₹1,600 में बेहतर सीट मिल जाती है। अब 8 घंटे के “कट‑ऑफ समय” के कारण अगर पुरानी टिकट उसी समय स्लॉट में कैंसिल होती है, तो यात्री को न केवल ₹400 अतिरिक्त चार्ज बर्दाश्त करना पड़ता है, बल्कि पुरानी टिकट की रकम भी पूरी तरह डूब सकती है, जिससे उसका नुकसान तेजी से बढ़ जाता है।

बिजनेस ट्रैवलर, तत्काल यूजर-बैकअप बुकिंग वालों पर असर

बिजनेस‑क्लास यात्री, जिनकी मीटिंग या ऑफिस शेड्यूल आखिरी वक्त तक बदलता रहता है, अब और ज्यादा सतर्क रहने को मजबूर हो गए हैं। अगर वे यात्रा से 8 घंटे से कम समय पहले निर्णय लेते हैं, तो कैंसिलेशन के बाद उनके पास कुल रिफंड शून्य रह सकता है। इसी तरह तत्काल टिकट के उपयोगकर्ताओं पर भी दोहरा दबाव है, क्योंकि वे तो पहले से ही ज्यादा किराया देते हैं और अब उनकी रिफंड की “खिड़की” और छोटी हो गई है।

परिवारों और छात्रों के लिए भी यह नियम चुनौतीपूर्ण है, जो अक्सर कंफर्म सीट के चक्कर में जल्दी‑जल्दी टिकट बुक कर लेते हैं, लेकिन बाद में प्लान बदल जाते हैं। अब अगर वे यात्रा के करीब‑करीब दिन ही फैसला बदलते हैं, तो उन्हें न सिर्फ बुकिंग चार्ज बर्दाश्त करने पड़ेंगे, बल्कि रिफंड की उम्मीद भी खत्म हो जाएगी।

यात्रियों के लिए संभावित रणनीति

अब यात्रियों को जितना जल्द हो सके, यात्रा की पुष्टि तय करनी होगी। यानी जैसे‑जैसे यात्रा की तारीख करीब आती है, उतनी ही जल्दी टिकट कैंसिल करने का फैसला लेना उचित होगा। मल्टीपल बैकअप बुकिंग का आसान तरीका अब महंगा रणनीति साबित हो सकता है, क्योंकि हर अनुपयोगी टिकट जेब पर दबाव डाल सकती है। भविष्य में अगर ट्रैवल एप्स या IRCTC‑आधारित प्लेटफॉर्म “ट्रिप कैंसिलेशन इंश्योरेंस” की सुविधा देते हैं, तो उन्हें चुनना अधिक तर्कसंगत लग सकता है, खासकर उन यात्रियों के लिए जिनके लिए प्लान की निश्चितता कम है।

इस नए फ्रेमवर्क के बाद रेलवे का लक्ष्य स्पष्ट है- अव्यवहारिक और आखिरी वक्त की कैंसिलेशन को कम करना, सीट‑मैनेजमेंट में स्थिरता लाना और सिस्टम पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को कम करना। लेकिन यात्री तब तक इस नई “रिफंड‑सख्ती” के लिहाज से अपनी यात्रा योजना में अधिक दूरदर्शिता बरतेंगे, तब तक उनकी जेब और रेल बजट दोनों के बीच तनाव बना रहेगा।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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