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MMS वायरल करने पर कितनी मिलती है सजा? जानें BNS की किस धारा में होगा एक्शन

MMS या निजी वीडियो वायरल करना अब और भी गंभीर अपराध है! भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू होने के बाद इस पर कड़ी सज़ा का प्रावधान है। जानिए BNS की किस धारा के तहत आप पर एक्शन होगा, और पहली बार दोषी पाए जाने पर भी आपको कितनी जेल हो सकती है।

By Pinki Negi

MMS वायरल करने पर कितनी मिलती है सजा? जानें BNS की किस धारा में होगा एक्शन
MMS वायरल

आजकल सोशल मीडिया पर सेलेब्स और इनफ्लुएंसर के पर्सनल वीडियो वायरल होने के मामले बढ़ गए हैं। इनमें से कुछ वीडियो तो फेक या डीपफेक होते हैं, लेकिन कई बार ये बिना अनुमति के बनाए गए निजी वीडियो होते हैं। हाल ही में इनफ्लुएंसर सोफिक एसके का निजी वीडियो वायरल होने के बाद, यह सवाल एक बार फिर चर्चा में है कि किसी का प्राइवेट वीडियो वायरल करने पर कानून क्या सज़ा देता है और इसके लिए कितनी जेल हो सकती है।

इंफ्लुएंसर का वायरल वीडियो

बंगाल के इंफ्लुएंसर सोफिक एसके का एक निजी वीडियो बुधवार, 26 नवंबर को सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया। वीडियो के सामने आते ही, उससे जुड़े सर्च शब्द भी कुछ ही घंटों में ट्रेंड करने लगे। इस वीडियो की प्रामाणिकता (authenticity) को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स के बीच गहरी बहस छिड़ गई है—कुछ इसे असली मान रहे हैं, तो वहीं कई लोग इसे छेड़छाड़ किया गया या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके बनाया गया बता रहे हैं। हालांकि, अभी तक यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि वीडियो AI द्वारा बनाया गया था या यह असली था।

निजी वीडियो वायरल करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार (Right to Privacy) को मौलिक अधिकार घोषित किया है। इसलिए, किसी की अनुमति के बिना उसका पर्सनल वीडियो शूट करना या वायरल करना कानूनी तौर पर अपराध है। यदि कोई व्यक्ति बिना सहमति के वीडियो बनाता और वायरल करता है, तो उस पर आईटी एक्ट 2000 की धारा 66e लगती है, जिसमें तीन साल तक की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

यदि कोई व्यक्ति फोटो या वीडियो से छेड़छाड़ करके अश्लील बनाता है, तो उस पर धारा 67 के तहत कार्रवाई होती है, जिसमें तीन साल की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। ये कानून डीपफेक जैसे एआई-निर्मित छेड़छाड़ वाले वीडियो पर भी लागू होते हैं।

बीएनएस में नए सख्त प्रावधान

1 जुलाई 2024 से लागू हो रहे भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में महिलाओं की निजता की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान जोड़े गए हैं। बीएनएस के अनुसार, किसी महिला की निजी स्थिति (Private Condition) का फोटो या वीडियो बिना अनुमति के बनाना और फैलाना अब एक गंभीर अपराध है। धारा 73, जिसने पुराने आईपीसी 354 जी की जगह ली है, इसके तहत यह स्पष्ट किया गया है कि यह अपराध करने वाला पुरुष हो या महिला, दोनों पर समान और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

वीडियो वायरल करने पर सख्त सज़ा और कड़े नियम

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 73 के तहत, निजी वीडियो वायरल करने के अपराध में पहली बार दोषी पाए जाने पर कम से कम 1 से 3 साल तक की जेल और जुर्माना लगाया जाता है। दूसरी बार दोषी पाए जाने पर यह सज़ा 3 से 7 साल तक की कैद और जुर्माना हो जाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि धारा 73 के तहत, ये अपराध गैर-जमानती और असंज्ञेय (Cognizable) माने जाते हैं। इसका मतलब है कि पुलिस बिना वारंट के तुरंत गिरफ्तार कर सकती है, और ऐसे मामलों में जमानत मिलना भी आसान नहीं होता है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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