
इलेक्ट्रिक दोपहिया (E2W) और तिपहिया (E3W) वाहनों के खरीदारों के लिए अच्छी या बुरी खबर कब आएगी, यह अब वित्त मंत्रालय के फैसले पर टिका है। भारी उद्योग मंत्रालय ने PM E-DRIVE योजना के तहत छोटे इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी 31 मार्च 2026 के बाद भी जारी रखने की सिफारिश की है। योजना को मार्च 2028 तक तो बढ़ा दिया गया है, लेकिन E2W और E3W के लिए रियायती दरें अभी भी उसी पुरानी समयसीमा पर अटकी हैं।
क्या है पूरा मामला?
PM E-DRIVE योजना 29 सितंबर 2024 को 10,900 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, E2W के लिए 1,772 करोड़ के बजट में से 1,259.91 करोड़ खर्च हो चुके हैं, जबकि E3W के 907 करोड़ के आवंटन में 737.35 करोड़ का उपयोग हो चुका है। फरवरी 2026 तक 14 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर को सब्सिडी मिल चुकी है, लेकिन कुल लक्ष्य 24.79 लाख का अभी बहुत बड़ा हिस्सा बाकी है। योजना के तहत अब तक 10 लाख E2W बिक चुके हैं, जबकि टारगेट 14 लाख था।
योजना की समयसीमा का पेच
हाल ही में योजना को मार्च 2028 तक विस्तार मिला, लेकिन यह मुख्य रूप से ई-ट्रक, ई-बस और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित है। आम उपभोक्ताओं के लिए पसंदीदा इलेक्ट्रिक स्कूटर और ऑटो रिक्शा की सब्सिडी 31 मार्च 2026 तक सीमित है। भारी उद्योग मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से नई मंजूरी मांगी है, ताकि बाजार में गिरावट न आए। ऑटो विशेषज्ञों का कहना है कि सब्सिडी हटने से कीमतें 15-20% बढ़ सकती हैं, जो उपभोक्ताओं को निरुत्साहित करेगी। बजट 2026-27 में 1,500 करोड़ आवंटित हुए हैं, जो EV को पुश दे रहे हैं।
कितने वाहनों की बिक्री हुई?
योजना शुरू होने के बाद इलेक्ट्रिक स्कूटर की बिक्री में उछाल आया। 10 लाख यूनिट बिक्री टारगेट से कम है, लेकिन पिछले साल की तुलना में 30% अधिक है। कंपनियों को 1,182 करोड़ की सब्सिडी जारी हो चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, सब्सिडी बने रहने से लक्ष्य पूरा हो सकता है और बाजार स्थिर रहेगा।
क्या सब्सिडी चालू रहेगी?
स्थिति अनिश्चित है। अगर वित्त मंत्रालय मंजूरी नहीं देता, तो अप्रैल 2026 से स्कूटर महंगे हो जाएंगे। खरीदते समय फैक्ट्री मूल्य का 15% तक सीधी छूट मिलती है, जो खत्म होने से आम आदमी प्रभावित होगा। मंत्रालय का प्रस्ताव सकारात्मक है, लेकिन अंतिम फैसला बाकी है।
योजना में बदलाव की संभावना?
सरकार का फोकस अब भारी वाहनों पर शिफ्ट हो रहा है, क्योंकि इनमें तकनीकी चुनौतियां अधिक हैं। E2W-E3W सब्सिडी के लिए अलग मंजूरी जरूरी होगी। उद्योग लॉबी का दबाव है कि छूट बढ़ाकर EV अपनापन तेज किया जाए। उपभोक्ताओं को आधिकारिक पोर्टल चेक करने की सलाह दी जाती है। यदि सब्सिडी मिली, तो इलेक्ट्रिक स्कूटर सस्ते रहेंगे, वरना महंगे।









