
ईरान और इजराइल के बीच छिड़े युद्ध ने वैश्विक कच्चे तेल बाजार को हिला दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका से भारत की 40 प्रतिशत तेल सप्लाई चेन पर संकट मंडरा रहा है। इस बीच, देश की तीनों सरकारी तेल कंपनियों- इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम- ने पेट्रोल पंप मालिकों के लिए सख्त नया नियम लागू कर दिया है। अब पंपों को क्रेडिट पर ईंधन नहीं मिलेगा, सिर्फ एडवांस पेमेंट पर ही सप्लाई होगी।
यह फैसला पेट्रोल पंप संचालकों के लिए किसी सदमे से कम नहीं। अभी तक शॉर्ट टर्म क्रेडिट पॉलिसी के तहत तेल पहले मिलता था और भुगतान में 3-5 दिन की मोहलत या बैंक गारंटी पर 15-30 दिन की छूट मिल जाती थी। लेकिन अब ‘तेल पहले-पैसा बाद में’ का दौर खत्म। लाइवमिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, HPCL और BPCL ने पिछले सप्ताह से एडवांस सिस्टम चालू कर दिया, जबकि IOCL ने सोमवार से 5 दिन की क्रेडिट पॉलिसी निलंबित कर दी।
पेट्रोल पंप मालिकों की बढ़ी मुश्किलें
देश में 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप इस बदलाव से प्रभावित होंगे। भारतीय पेट्रोलियम डीलर्स संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय लोध ने पुष्टि की कि तीनों कंपनियां क्रेडिट लाइन बंद कर चुकी हैं। “यह व्यवस्था पूरे नेटवर्क पर लागू है। पहले दैनिक बिक्री के आधार पर मोहलत मिलती थी, अब कैश फ्लो की समस्या बढ़ जाएगी,” लोध ने कहा।
मेरठ के एक पंप मालिक राजेश कुमार बताते हैं, “रोजाना 20-30 हजार लीटर की बिक्री पर क्रेडिट से काम चलता था। अब एडवांस पेमेंट के लिए बैंक लोन लेना पड़ेगा, जो ब्याज बढ़ाएगा। ग्राहक भी घबराहट में ज्यादा स्टॉक कर रहे हैं, लेकिन हमारा स्टॉक सीमित हो गया।” हरियाणा में पोस्टर चिपकाकर जागरूक किया जा रहा है कि बिना लाइसेंस बड़े ड्रम में तेल न भरा जाए।
वैश्विक संकट का भारत पर असर
पश्चिम एशिया तनाव से कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल पार कर गया। भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल खपतकर्ता, अगले वित्त वर्ष में 26 करोड़ टन तेल आयात करने को तैयार है। एलपीजी संकट के बाद अब पेट्रोल-डीजल पर असर। सरकार ने रिफाइनरियों को घरेलू उत्पादन बढ़ाने को कहा है। PUC सर्टिफिकेट बिना ईंधन न देने का पुराना नियम भी सख्ती से लागू हो रहा है।
थोक खरीदार – कृषि, ट्रांसपोर्ट और उद्योग- भी क्रेडिट से वंचित। पेट्रोलियम मंत्रालय चुप है, लेकिन पंप मालिकों की पुष्टि से साफ है कि सप्लाई चेन बचाने का यह कदम है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से उपभोक्ता घबरा गए, जिससे जमाखोरी बढ़ी। पेट्रोलियम एक्ट के तहत बिना लाइसेंस स्टोरेज अवैध, आगजनी का खतरा। छोटे कैन (5-10 लीटर) सीमित मात्रा में ठीक, बड़े ड्रम बैन।
आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर?
पंप मालिकों का बढ़ा खर्च ईंधन कीमतों पर दिखेगा। दिल्ली-एनसीआर में PUC और EOL वाहनों पर पाबंदी पहले से है, अब राष्ट्रीय स्तर पर टेंशन। एजेंसियां चेतावनी दे रही हैं कि लंबे समय तक युद्ध चला तो कीमतें आसमान छू सकती हैं। सरकार स्टॉक बढ़ाने और वैकल्पिक रूट तलाश रही है।
पंप संगठन मांग कर रहा है कि क्रेडिट पॉलिसी बहाल हो या सब्सिडी दी जाए। फिलहाल, मालिकों को कैश मैनेजमेंट और डिजिटल पेमेंट पर निर्भर रहना पड़ेगा। यह संकट पश्चिम एशिया शांति पर निर्भर। भारत जैसे आयातक देश के लिए सबक- ऊर्जा आत्मनिर्भरता जरूरी।









