
अगर आप विदेश घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो पासपोर्ट आपका सबसे बड़ा साथी बन जाता है। बिना इसके कहीं आने-जाने का सोचना भी मुश्किल। आजकल तो पासपोर्ट ही किसी देश की ताकत का आईना बन गया है। ये बताता है कि आपके पासपोर्ट से कितने देशों के दरवाजे बिना झिझक खुलते हैं। हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 की ताजा रिपोर्ट ने फिर से दुनिया की साफ तस्वीर पेश की है। इसमें सिंगापुर टॉप पर काबिज हो गया है। आइए, इसकी गहराई में उतरते हैं और देखते हैं कि भारत कहां खड़ा है।
दुनिया का नंबर वन पासपोर्ट
सोचिए, एक छोटा-सा देश लेकिन पासपोर्ट की ताकत में बादशाह! सिंगापुर का पासपोर्ट अब दुनिया का सबसे शक्तिशाली है। इसके धनी 192 देशों में बिना वीजा के घूम सकते हैं। ये संख्या सुनकर ही मन उछल जाता है। चाहे बिजनेस ट्रिप हो या छुट्टियां, सिंगापुर वाले कहीं भी फटाफट निकल पड़ते हैं।
ये रैंकिंग वैश्विक मोबिलिटी को मापती है, यानी कितनी आसानी से आप दुनिया घूम सकते हैं। सिंगापुर ने अपनी सख्त कानूनी व्यवस्था और आर्थिक ताकत से ये मुकाम हासिल किया। पड़ोसी देशों के मुकाबले ये काफी आगे निकल गया।
जापान-कोरिया की जोड़ी ने मारी लीड
सिंगापुर के ठीक बाद जापान और दक्षिण कोरिया ने बराबरी का कमाल दिखाया। दोनों के पासपोर्ट 188 देशों में वीजा-फ्री एंट्री देते हैं। जापान की टेक्नोलॉजी और कोरिया का के-पॉप कल्चर शायद इनकी ताकत बढ़ा रहा है। यूरोप के दिग्गज जैसे फ्रांस, जर्मनी, इटली और स्पेन तीसरे-चौथे स्पॉट पर जमे हैं। इनके पास भी 192 के करीब एक्सेस है। फिर UAE का क्या कहना! दो दशक में 57 पायदान की उछाल मारकर टॉप 5 में एंट्री। ऑयल मनी और स्मार्ट डिप्लोमेसी ने ये करिश्मा दिखाया।
अमेरिका की शानदार वापसी टॉप 10 में
अमेरिका को कौन भूल सकता है? पिछले साल थोड़ा नीचे खिसक गया था, लेकिन 2026 में 179 देशों की वीजा-फ्री पहुंच के साथ 10वें नंबर पर लौट आया। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और मलेशिया भी टॉप 10 क्लब में शामिल। ये देश अपनी स्थिर अर्थव्यवस्था और सुरक्षित माहौल से यात्रियों को लुभाते हैं। लेकिन सवाल ये है कि ये रैंकिंग कैसे तय होती है? हेनले इंडेक्स 227 देशों के आधार पर चेक करता है कि कितने जगहों पर वीजा-ऑन-अराइवल या ई-वीजा मिलता है। ये न सिर्फ घुमक्कड़ों के लिए, बल्कि बिजनेसमैन और नौकरीपेशा लोगों के लिए गेम-चेंजर है।
भारत 80वें पर कितना रास्ता बाकी?
अब अपनी बात। भारत का पासपोर्ट 80वें पायदान पर पहुंच गया। इसका मतलब 60 से ज्यादा देशों में बिना वीजा घूम सकते हैं। ये सुधार तो है, लेकिन टॉप 50 से कोसों दूर। थाईलैंड, इंडोनेशिया जैसे पड़ोसी खुले द्वार दे रहे हैं, लेकिन यूरोप-अमेरिका अभी सपना। सरकार की विदेश नीति, आर्थिक ग्रोथ और डिप्लोमेसी से ये सुधर सकती है। याद कीजिए, 10 साल पहले भारत 80 के पार था। अब युवा पीढ़ी को ये प्रेरणा देना चाहिए कि मजबूत पासपोर्ट मजबूत देश बनाता है।
पाकिस्तान का मामला
पड़ोसी पाकिस्तान की बात करें तो थोड़ा सुधार हुआ। 103 से 98वें स्पॉट पर आ गया, टॉप 100 में एंट्री। लेकिन हकीकत निराशाजनक। वीजा-फ्री देशों की संख्या घटकर 31 रह गई, पहले 33 थे। आर्थिक चुनौतियां और सुरक्षा मुद्दे इसे पीछे खींच रहे। भारत से 18 पायदान नीचे, ये फर्क साफ बताता है कि हमारी डिप्लोमेसी कितनी सशक्त है।
क्या करें भारतीय?
ये रैंकिंग सिर्फ नंबर नहीं, देश की इमेज है। सिंगापुर जैसे छोटे राष्ट्र हमें सिखाते हैं कि स्मार्ट पॉलिसी से बड़ा मुकाम हासिल होता है। भारत को वीजा एग्रीमेंट बढ़ाने, पर्यटन प्रमोट करने और आर्थिक रिश्ते मजबूत करने होंगे। अगर आप ट्रैवलर हैं, तो इन देशों की लिस्ट चेक करें – थाईलैंड, मलदीव से शुरूआत आसान। कुल मिलाकर, 2026 की ये लिस्ट हमें जागृत करती है। मजबूत पासपोर्ट, मजबूत भारत!









