
विदेश में पढ़ाई का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। लंबे समय से अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और दुबई जैसे देशों का दबदबा रहा, लेकिन अब वीजा सख्तियां, ऊंची फीस और अनिश्चितताओं ने छात्रों को यूरोप की ओर मोड़ दिया है। नीति आयोग की रिपोर्ट और वनस्टेप ग्लोबल की ‘स्टूडेंट परसेप्शन स्टडी’ से साफ खुलासा हुआ है कि यूरोप, खासकर आयरलैंड, जर्मनी और फ्रांस, अब टॉप चॉइस बन चुके हैं। 2024 में आयरलैंड को 38% छात्रों ने पसंद किया, जबकि कुल विदेश पढ़ाई में 15% गिरावट आई।
आयरलैंड में तेजी से बढ़ते छात्र
आयरलैंड में भारतीय छात्रों की संख्या एक दशक में 700 से उछलकर 9000 से अधिक हो गई है। यह उछाल अमेरिका-कनाडा जैसे देशों की वीजा पाबंदियों का नतीजा है। जहां ब्रिटेन ने पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा छोटा कर दिया, कनाडा ने आवेदनों पर रोक लगाई और अमेरिका में H-1B लॉटरी की मार झेलनी पड़ रही है, वहीं आयरलैंड ने दरवाजे खोल रखे हैं।
यहां अंग्रेजी में साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट (STEM) कोर्स आसानी से उपलब्ध हैं। कोर्स अवधि छोटी (1-2 साल) होने से जल्द डिग्री मिल जाती है, साथ ही 2 साल का पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा नौकरी की राह आसान बनाता है। आयरलैंड के टेक हब जैसे डबलिन में गूगल, फेसबुक और फार्मा कंपनियां छात्रों को तुरंत मौके देती हैं।
जर्मनी और फ्रांस का बढ़ता आकर्षण
जर्मनी भी पीछे नहीं है, जहां 52,000 से ज्यादा भारतीय छात्र पढ़ रहे हैं। पब्लिक यूनिवर्सिटीज में ट्यूशन फीस शून्य या नाममात्र (1500-2000 यूरो सालाना) है, जो अमेरिका के 40-50 लाख रुपये के मुकाबले सस्ता है। इंजीनियरिंग, डेटा साइंस और रिसर्च में वर्ल्ड-क्लास कोर्स, प्लस EU ब्लू कार्ड से जॉब सिक्योरिटी मिलती है। फ्रांस स्कॉलरशिप्स जैसे इरास्मस+ (101 भारतीयों को 2025 में मिली) से आकर्षित कर रहा है, जहां कल्चरल स्टडीज और साइंस में कम खर्च पर पढ़ाई संभव है। कुल मिलाकर, यूरोप में वीजा एप्लीकेशन्स 30% बढ़े हैं, क्योंकि यहां रहने का खर्च 10,000-14,000 यूरो सालाना है।
यूरोप चुनने के प्रमुख कारण
यह शिफ्ट किफायती शिक्षा, इंग्लिश-मीडियम प्रोग्राम्स, मल्टीकल्चरल एक्सपीरियंस और स्ट्रॉन्ग जॉब मार्केट का परिणाम है। नीदरलैंड्स और इटली जैसे देश भी उभर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर आयरलैंड कोर्सेस बढ़ाएगा, तो लोकप्रियता और चढ़ेगी। छात्रों को सलाह है कि DAAD (जर्मनी) या IDP काउंसलर से संपर्क करें। यूरोप अब न सिर्फ शिक्षा, बल्कि भविष्य का द्वार बन रहा है।









