
रिटायरमेंट के बाद एनपीएस का पैसा निकालना आसान लगता है, लेकिन गलत फैसला आपके पूरे फंड को तेजी से खत्म कर सकता है। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में सालों की जमा पूंजी एकमुश्त नहीं मिलती- नए नियमों के तहत एसएलडब्ल्यू (सिस्टेमैटिक लंपसम विदड्रॉल) और एसयूआर (सिस्टेमैटिक यूनिट रिडेम्पशन) जैसे विकल्प उपलब्ध हैं। 2026 के अपडेट्स ने निकासी को लचीला बनाया है, लेकिन बाजार उतार-चढ़ाव और टैक्स प्रभाव को नजरअंदाज करने की भूल न करें।
निकासी के नए नियम: 2026 अपडेट
एनपीएस कॉर्पस आठ लाख रुपये तक होने पर पूरी राशि टैक्स-फ्री एकमुश्त निकाल सकते हैं। आठ से 12 लाख के बीच कॉर्पस पर छह लाख तक लंपसम लें, बाकी एसयूआर या ऐन्युटी में डालें। 12 लाख से ज्यादा पर 80% तक लंपसम (20% ऐन्युटी अनिवार्य) की सुविधा है पहले 60% सीमा से कहीं ज्यादा फायदा। सरकारी कर्मचारियों के लिए ऐन्युटी न्यूनतम 40% रहती है। प्रीमेच्योर एग्जिट में भी 25% तक तीन बार निकासी संभव, लेकिन पेनल्टी से बचें। ये बदलाव रिटायरमेंट प्लानिंग को सरल बनाते हैं।
एसएलडब्ल्यू: तय रकम की स्थिरता
एसएलडब्ल्यू में हर महीने निश्चित राशि निकालें, जैसे 50,000 रुपये। बाजार गिरने पर ज्यादा यूनिट्स बिक्री से कॉर्पस तेजी से घट सकता है, लेकिन ऊपर चढ़ने पर यूनिट्स बचती हैं। ईएमआई, मेडिकल या नियमित खर्च वालों के लिए आदर्श – म्यूचुअल फंड के एसडब्ल्यूपी जैसा। विशेषज्ञ सलाह: गिरते बाजार में खर्च कंट्रोल करें, वरना फंड 10-15 साल पहले खत्म हो सकता है।
एसयूआर: बाजार पर निर्भर आय
एसयूआर में हर महीने तय यूनिट्स बेचें एनएवी ऊंचा तो ज्यादा आय, नीचा तो कम। उदाहरण: 1 करोड़ कॉर्पस, एनएवी 10 पर 5,000 यूनिट्स से 50,000; एनएवी 12 पर 60,000; 8 पर 40,000। अतिरिक्त आय स्रोत (किराया) वालों के लिए बेहतर, क्योंकि उतार-चढ़ाव सहन करने की क्षमता चाहिए। लंबे समय तक फंड बचाने में प्रभावी, लेकिन बाजार क्रैश पर इमरजेंसी फंड जरूरी।
SLW vs SUR: सही चुनाव का फॉर्मूला
| विशेषता | SLW | SUR |
|---|---|---|
| निकासी आधार | निश्चित रकम | निश्चित यूनिट्स |
| बाजार प्रभाव | कम (स्थिर आय) | ज्यादा (चलायमान आय) |
| जोखिम | निम्न-मध्यम | मध्यम-उच्च |
| उपयुक्त | नियमित खर्च वाले | बाजार सहनशील, अतिरिक्त आय वाले |
एसएलडब्ल्यू सुरक्षित लेकिन कॉर्पस-खतरे वाला; एसयूआर लचीला लेकिन अनिश्चित। बकेट स्ट्रैटेजी अपनाएं 6-12 महीने का खर्च लिक्विड फंड में रखें।
टैक्स और विशेषज्ञ सलाह
लंपसम 60% तक टैक्स-फ्री, बाकी स्लैब पर टैक्स। ऐन्युटी आय टैक्सेबल। गलती: सब एकमुश्त निकालना – रणनीति बनाएं। विशेषज्ञ कहते हैं, आय जरूरत, उम्र और बाजार टॉलरेंस चेक करें। एनपीएस ट्रस्ट से कंसल्ट करें। गलत विकल्प से रिटायरमेंट फंड आधा हो सकता है। सलाह लें, लंबी उम्र के लिए प्लान करें।









